नौनिहालों के बचपन को स्कूली बैग के बोझ से बचाने की सार्थक कवायद, पहली से आठवीं कक्षा तक स्कूलों में लॉकर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Nov 2018 2:40 AM (IST)
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आसनसोल : अब पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के स्कूली छात्र-छात्राओं को स्कूल में लॉकर आवंटित किये जायेंगे. जिसमें वे अपनी पाठ्य-पुस्तकों के साथ ही साथ जरूरी सामान भी रख पायेंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने फंड भी आवंटन शुरू कर दिया है. इसका मूल उद्देश्य नौनिहालों को बस्ते के बोझ से मुक्ति […]
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आसनसोल : अब पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक के स्कूली छात्र-छात्राओं को स्कूल में लॉकर आवंटित किये जायेंगे. जिसमें वे अपनी पाठ्य-पुस्तकों के साथ ही साथ जरूरी सामान भी रख पायेंगे. इसके लिए राज्य सरकार ने फंड भी आवंटन शुरू कर दिया है. इसका मूल उद्देश्य नौनिहालों को बस्ते के बोझ से मुक्ति दिलाना है.
स्कूली बच्चे पाठ्य-पुस्तकों तथा कॉपियों के बोझ से पहले से ही परेशान हैं. किसी के बैग का वजन नौ किलोग्राम होता है तो किसी के बैग का वजन सात किलो. इस वजन के बोझ तले बचपन दब सा जाता है.
इससे रिहाई के लिए उन्हें स्कूलों में लॉकर उपलब्ध कराये जायेंगे. पहले चरण में प्रथम कक्षा से लेकर आठ कक्षा तक के छात्र-छात्राओं को यह सुविधा मिलेगी. दूसरे चरण में नौवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक के स्कूली छात्र-छात्रा लाभान्वित होंगे. ये लॉकर उनकी कक्षा में रहेंगे या फिर उनकी कक्षा के बाहर रखे जायेंगे.
गैर जरूरी पुस्तकें, ड्राई फूड, पीटी पोशाक आदि रख पायेंगे छात्र
राज्य के 50 हजार प्राथमिक, 14 हजार माध्यमिक स्कूलों में सुविधा
राज्य सरकार से इस मद में पर्याप्त राशि का हुआ आवंटन तैयारी शुरू
स्कूली शिक्षा विभाग के अनुसार इस मद में राशि का आवंटन कर दिया गया है. प्रथम तथा दूसरी कक्षा के छात्र-छात्राओं की पुस्तकें अभी स्कूल में ही रखने का प्रावधान है. सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पुस्तकें रखने की सुविधा तो है लेकिन सरकार के स्तर से पोषित या सहायता प्राप्त सभी प्राथमिक स्कूलों में इसकी सुविधा नहीं है.
राज्य सरकार ने राज्य के 50 हजार प्राथमिक स्कूलों तथा 14 हजार माध्यमिक स्कूलों की आठवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं के लिए लॉकर की सुविधा देने का निर्णय लिय है. प्रथम तथा दूसरी कक्षा के छात्र अपनी पुस्तकें स्कूल में रख कर खाली हाथ घर आ सकेंगे. इसके बाद की कक्षाओं के छात्र अपना बैग तथा पुस्तकें अपने घर ले जा सकेंगे.
जरूरत पड़ने पर कुछ पुस्तकें तथा कॉपियां वे स्कूल के ल़ॉकरों में रख सकेंगे. किसी दिन या विशेष मौके पर वे अपना बैग भी उस लॉकर में रख पायेंगे. इसके साथ ही पीने के पानी का बोतल, ड्राई फूड तथा उन पुस्तकों तथा कॉपियों को भी लॉकरों में रखा जा सकेगा, जिनके घर न ले जाने से कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा.
स्कूल शिक्षा विभाग के स्तर से कई महीने पहले ही जिला शिक्षा निरीक्षकों (डीआइ) को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिये गये थे. विभिन्न जिला शिक्षा निरीक्षकों के स्तर से मिली रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा पर अगले चरण का कार्रवाई की जा रही है. जिन स्कूलों में कक्षाएं बड़ी है, उनमें लॉकर उन्हीं कक्षाओं में रखे जायेंगे.
प्रत्येक लॉकर पर संबंधित छात्र का नाम लिख कर उसका चाबी संबंधित छात्र को सौंप दी जायेगी. वे अपनी सुविधा के अनुसार लॉकर का उपयोग करेंगे. यदि कक्षाएं छोटी होंगी तो लॉकरों के रखने की व्यवस्था कक्षाओं के बाहर होंगी. बाहर रहनेवाले लॉकरों की सुरक्षा की व्यवस्था के मुद्दे पर विचार विमर्श विभागीय स्तर पर चल रहा है.
जानकारों के अनुसार स्कूली बैग का वजन अधिक होने तथा उसके लंबे समय तक पीठ या कंधे पर होने से छात्रों के मेरूदंड़ पर प्रतिकूल असर पड़ता है. वर्ष 2006 में निर्मित कानून में कहा गया है कि स्कूली बैग का वजन उनके वजन के 10 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए. नर्सरी तथा किड्स गार्टेन के बच्चों के स्कूली बैग पर प्रतिबंध है.
स्कूली छात्रों के लिए लॉकर की व्यवस्था अनिवार्य हैं. विभिन्न निजी स्कूलों में यह सुविधा होने के बाद भी सरकारी या सरकार पोषित स्कूलों में प्रथम तथा दूसरी कक्षा को छोड़ कर अन्य किसी कक्षा के लिए यह व्यवस्था नहीं है.
हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी स्कूलों के बच्चों के बैग अधिक वजनी नहीं होते हैं. लेकिन कई पुस्तकों को घर नहीं ले जाने से भी कार्य चल जाता है, उन पुस्तकों को छात्र लॉकरों में रख पायेंगे. लॉकर में कराटे या पीटी क्लासेज के पोशाक तथा पेन के बॉक्स रखे जा सकेंगे. सरकार का मुख्य लक्ष्य स्कूली बैग का वजन कम करना है.
इस कारण से पहले चरण में पुस्तकों की संख्या में कमी लाने की योजना है. हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि लॉकर देने से ही स्कूली बैग का वजन कम नहीं होगा, बल्कि इसके लिए पाठ्यक्रम को संक्षिप्त तथा मनोग्राही बनाना होगा.
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