वीरपाड़ा : एक ही बिस्तर पर हो रहा दो-दो मरीजों का इलाज

Updated at : 10 Sep 2018 12:46 AM (IST)
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वीरपाड़ा : एक ही बिस्तर पर हो रहा दो-दो मरीजों का इलाज

वीरपाड़ा : राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद राज्य में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है. जबकि राज्य सरकार का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराये. लेकिन डुवार्स के एकमात्र बड़े वीरपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल की अवस्था सोचनीय बनी हुई है. यहां बिस्तर के अभाव […]

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वीरपाड़ा : राज्य सरकार के तमाम दावों के बावजूद राज्य में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है. जबकि राज्य सरकार का यह दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराये.
लेकिन डुवार्स के एकमात्र बड़े वीरपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल की अवस्था सोचनीय बनी हुई है. यहां बिस्तर के अभाव में एक ही बेड पर दो दो मरीजों को रखकर इलाज किया जा रहा है. जबकि यह स्थिति हरगिज स्वास्थ्यकर नहीं कही जा सकती. इसके अलावा फर्श पर मरीजों को सुलाकर उनका इलाज किया जाता है. इससे कई मरीजों को संक्रमण होने की आशंका घर कर रही है.
उल्लेखनीय है कि वीरपाड़ा-मदारीहाट ब्लॉक क्षेत्र के करीब छह लाख की आबादी इसी वीरपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल पर निर्भर हैं. अस्पताल सूत्र के अनुसार आउटडोर के विभिन्न वार्ड में प्रतिदन 750-800 मरीज इलाज के लिये आते हैं. इनडोर में दो सौ मरीजों के लिये बिस्तर है. लेकिन अस्पताल में अक्सर 350-400 मरीज भर्ती रहते हैं.
बाध्य होकर अस्पताल प्रबंधन को एक ही बेड पर दो दो मरीजों को रखकर इलाज करना पड़ रहा है. हालांकि चिकित्सकों को भी पता है कि यह स्वास्थ्यकर स्थिति नहीं है. लेकिन उनकी भी अपनी मजबूरी है. कई बार तो मरीज अधिक होने पर उन्हें फर्श पर भी बिस्तर लगाकर इलाज किया जाता है. इस तरह से वार्ड में इतनी भीड़-भाड़ की स्थिति रहती है कि मरीज के परिजनों के लिये चलना-फिरना दुश्वार हो जाता है.
अस्पताल के अधीक्षक सौम्यजीत पुरकायस्थ ने बताया कि कई विभाग में चिकित्सक की कमी से उन्हें सेवा देने में समस्या हो रही है. मरीजों के परिजनों का कहना है कि एक ही बेड पर दो दो मरीजों को रखने से संक्रमण की आशंका बनी रहती है. इसी तरह फर्श पर सुलाकर इलाज करने में भी यही समस्या हो सकती है.
केवल एक एनेस्थेसिस्ट
अस्पताली में न्यूनतम दो की जगह केवल एक एनेस्थेसिस्ट हैं. इससे जब वे अवकाश पर होते हैं तो ओटी को बंद रखना पड़ता है. अस्पताल में काफी संख्या में प्रसूति महिलाएं भर्ती होती हैं. यहां केवल दो ही स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं जबकि प्रसूताओं को देखते हुए अस्पताल में तीन विशेषज्ञ होने चाहिये. ऐसी हालत में मरीजों के परिजनों में क्षोभ रहना लाजिमी है.
38 की जगह मात्र 20 चिकित्सक
अस्पताल में अनुमोदित चिकित्सकों की संख्या 38 है लेकिन फिलहाल केवल 20 चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा है. प्रसूताओं का अधिक दबाव होने से एक और स्त्री रोग विशेषज्ञ की जरूरत है. जनरल मेडिसिन विभाग में एक और विशेषज्ञ की जरूरत है. कम चिकित्सक रहने से मरीजों का अधिक दबाव रहता है.
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