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WB News : बांकुड़ा वन विभाग ने हिरणों की 62 सींगों को जला कर किया नष्ट

Updated at : 06 May 2024 6:55 PM (IST)
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WB News : बांकुड़ा वन विभाग ने हिरणों की 62 सींगों को जला कर किया नष्ट

जिला वन विभाग ने हिरणों की 62 सींगों को जला कर नष्ट कर दिया. वन्य जीवों के अवशेष या वन्य प्राणियों के देह के अंगों का किसी भी रूप से उपयोग नहीं किया जायेगा. संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की गयी.

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बांकुड़ा.

जिला वन विभाग ने हिरणों की 62 सींगों को जला कर नष्ट कर दिया. वन्य जीवों के अवशेष या वन्य प्राणियों के देह के अंगों का किसी भी रूप से उपयोग नहीं किया जायेगा. संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत यह कार्रवाई की गयी. जिले के उत्तर, दक्षिण और तीन वन प्रभागों के संग्रह में जंगली हाथियों के 57 दांत थे, जिन्हें बीते एक दशक में एकत्र किया गया था. बरजोड़ा औद्योगिक क्षेत्र के सहरजोड़ा में सीएनजी एनवायरो सॉल्यूशंस नामक कारखाने की भट्टी में सारे हाथी दांतों को जला दिया गया. वैसे ही सोमवार को हिरणों की सींगों को भी उस फैक्टरी की भट्टी में जला दिया गया. उस दौरान वन विभाग के केंद्रीय सर्किल के मुख्य वन संरक्षक एस कुलन डायवाल, बांकुड़ा उत्तर वन प्रभाग के डीएफओ उमर इमाम के अलावा कई वन विभाग अधिकारी उपस्थित थे.मौके पर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि मौजूद थे. एस कुलन डायवाल ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में पिछले वर्ष ही संशोधन किया गया है. गत दिसंबर में 57 हाथीदांत को नष्ट किया गया था. इस बार 62 हिरण सींगों को भी जला कर नष्ट कर दिया गया. मुकुटमणिपुर के पास हिरण पार्क में बीते आठ-10 वर्षों में प्राकृतिक कारणों से कई हिरण मर गये थे. वहां से सींग एकत्र किये गये. वन्य जीव प्रकृति की रचना है. जब कोई जंगली जंतु मर जाये, तो उसके अवशेष प्रकृति को लौटा देने चाहिए कानूनन यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वन्य जीव या उसके अंग का किसी भी रूप में गलत इस्तेमाल ना हो. इसका उद्देश्य वन्यजीव शिकारियों को कड़ी चेतावनी देना भी है. कहते हैं, इस दिन सींगों को 2000 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भट्ठी में जलाया गया. यह पूछने पर कि हिरण सींगों को जलाया क्यों गया, अधिकारी ने बताया कि संशोधित कानून में इसका प्रावधान है. जंगली जंतुओं के अवशेषों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. हालांकि, उन्होंने कहा कि वह पहले भी उत्तर बंगाल में यह काम कर चुके हैं. लेकिन कानून में संशोधन के बाद राज्य में बांकुड़ा से उठाया गया, यह पहला कदम था.

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