रसोई घर में अब जगह लेगी बायोगैस

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कोलकाता: रसोई गैस की आसमान छूती कीमत से परेशान लोगों को राहत दिलाने के लिए जल्द ही फिनिक्स इंडिया रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी महानगर में कंप्रेस्ड नेचुरल बायोगैस (सीएनबीजी) सिलेंडर सप्लाई करने जा रही है. बायोगैस महानगर के लोगों के लिए भले ही नया नाम है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में वर्षो से घरों में इसका […]

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कोलकाता: रसोई गैस की आसमान छूती कीमत से परेशान लोगों को राहत दिलाने के लिए जल्द ही फिनिक्स इंडिया रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी महानगर में कंप्रेस्ड नेचुरल बायोगैस (सीएनबीजी) सिलेंडर सप्लाई करने जा रही है.

बायोगैस महानगर के लोगों के लिए भले ही नया नाम है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में वर्षो से घरों में इसका इस्तेमाल हो रहा है. आम भाषा में इसे गोबर गैस के नाम से जाना जाता है. इस गैस को गाय, बैल, भैंस के गोबर एवं रसोई घरों से निकलने वाले कचरे से तैयार किया जाता है. इसके कारण यह एलपीजी से सस्ती होती है. कंपनी की इस योजना को पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) एवं इंडियन स्टैंडर्डस इंस्टीटय़ूट (आइएसआइ) से सभी प्रकार की मंजूरी मिली चुकी है. चार फरवरी से महानगर समेत राज्य के विभिन्न इलाकों में बायोगैस सिलेंडरों की सप्लाई शुरू हो जायेगी.

कंपनी के मुख्य सलाहकार सुमन चौधरी ने बताया कि रसोई गैस के मुकाबले बायो गैस की कीमत काफी कम है. 14.2 किलो के रसोई गैस के रियायती दरवाले सिलेंडर की कीमत जहां 410 रुपये है, वहीं 12.5 किलो के बायोगैस का सिलेंडर हम लोग केवल 275 रुपये में उपलब्ध करायेंगे.

बगैर सब्सिडी वाले रसोई गैस के सिलेंडर की कीमत 1248 रुपये है, जबकि 18 किलो के एलपीजी के कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1900 रुपये है, वहीं हम लोग कॉमर्शियल गैस का 15 किलो का सिलेंडर बाजार में उतारेंगे, जिसकी कीमत 50 रुपये प्रति किलो होगी. फिलहाल कंपनी अपने गुजरात के बडोदरा स्थित प्लांट से बायोगैस सिलेंडर की सप्लाई करेगी. कंपनी राजरहाट में अपना एक प्लांट लगा रही है, जहां से मार्च से गैस का उत्पादन शुरू हो जायेगा. गुजरात प्लांट की क्षमता रोजाना 1000 सिलेंडर की है. राजारहाट प्लांट में प्रति दिन 10 हजार सिलेंडर गैस तैयार होगी.

श्री चौधरी ने बताया कि गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, हरियाणा इत्यादि इलाकों में पहले से ही बायोगैस रसोई घरों में इंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन वहां इसे सिलेंडर के रूप में सप्लाई नहीं की जाती है, बल्कि पाइपलाइन के द्वारा बायोगैस घरों तक पहुंचायी जाती है. भारत में पहली बार एलपीजी स्टाइल में बायोगैस छोटे सिलेंडर में घरों तक पहुंचाने का काम पश्चिम बंगाल से शुरू होगा. लोगों तक इस किफायती गैस को पहुंचाने के लिए कंपनी ने 125 से अधिकत डिस्ट्रीब्यूटरों का एक नेटवर्क तैयार किया है. पर, महानगर में कंपनी स्वयं बायोगैस की सप्लाई करेगी. गैस तैयार करने के लिए गोबर की व्यवस्था करने के लिए कंपनी ने राज्य के विभिन्न मिल्क को-ऑपरेटिव सोसाइटी से करार किया है. रसोई घरों से निकलने वाले कचरे के लिए कंपनी ने कोलकाता नगर निगम से संपर्क साधा है. श्री चौधरी ने बताया कि बायोगैस का सिलेंडर भी विशेष होगा. श्री चौधरी ने दावा किया कि लाल व सफेद रंग का बायोगैस का सिलेंडर एक्सिडेंट प्रूफ होगा.

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