राज्य में 1.04 लाख शिक्षकों के पद रिक्त

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कोलकाता/नयी दिल्ली: पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 1.04 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि देशभर के स्कूलों में शिक्षकों के 11.87 लाख पद रिक्त हैं. मध्याह्न् भोजन योजना में स्वच्छता व सुरक्षा सुनिश्चित करने, इस योजना की निगरानी के लिए अधिकार संपन्न समिति गठित करने, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा मिशन गठित करने जैसे विषयों पर […]

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कोलकाता/नयी दिल्ली: पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 1.04 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जबकि देशभर के स्कूलों में शिक्षकों के 11.87 लाख पद रिक्त हैं. मध्याह्न् भोजन योजना में स्वच्छता व सुरक्षा सुनिश्चित करने, इस योजना की निगरानी के लिए अधिकार संपन्न समिति गठित करने, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा मिशन गठित करने जैसे विषयों पर केंद्र और राज्यों के शिक्षा मंत्री, शिक्षाविद व अन्य पक्ष विचार-विमर्श करेंगे.

इसके मद्देनजर 10 अक्तूबर 2013 को दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (केब ) की बैठक होगी, जिसमें शिक्षकों की कमी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के मध्यम से शिक्षा, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा मिशन, मध्याह्न् भोजन योजना जैसे विषयों पर चर्चा होगी.

मानव संसाधन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बैठक में स्कूलों में सतत समग्र मूल्यांकन (सीसीइ) के अमल की भी समीक्षा की जायेगी. साथ ही शिक्षकों के पेशेवर विकास पर भी विचार किया जायेगा. राज्य में अभी भी 49.14 प्रतिशत स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में शिक्षकों के 1.04 लाख पद रिक्त हैं, जबकि झारखंड में 68 हजार, मध्यप्रदेश में 95 हजार, महाराष्ट्र में 33 हजार पद रिक्त हैं. शिक्षा का अधिकार प्रदान करने की पहल के तहत पश्चिम बंगाल में शिक्षकों के 4.62 लाख पद, झारखंड में 1.89 लाख पद, मध्यप्रदेश में 3.60 लाख पद, उत्तर प्रदेश में 8 01 लाख पद मंजूर किए गये हैं. सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के मार्ग में शिक्षकों की कमी के आड़े आने पर संसद की स्थायी समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त की है.

शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूली आधारभूत संरचना में शौचालयों का विकास महत्वपूर्ण मापदंड बताया गया है. पश्चिम बंगाल में 52.20 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं जहां लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं. मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 22 प्रतिशत स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है. हालांकि, 94.26 प्रतिशत स्कूलों में पेयजल सुविधा है. मंत्रालय ने कहा है कि अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के तहत सकल नामांकन दर (जीइआर) 18.8 प्रतिशत है.

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