बंगाल में बनेगा पहला मैनग्रोव चिड़ियाघर

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कोलकाता : विश्व का पहला मैनग्रोव चिड़ियाघर राज्य में बनने जा रहा है. वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक दक्षिण 24 परगना के झड़खाली में यह स्पेशलाइज्ड पशुशाला तैयार होगा. स्टेट जू ऑथोरिटी के सदस्य व सचिव बृजराज शर्मा ने बताया कि आशा की जा रही है कि झड़खाली में चिड़ियाघर का दूसरा कैंपस विश्व […]

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कोलकाता : विश्व का पहला मैनग्रोव चिड़ियाघर राज्य में बनने जा रहा है. वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक दक्षिण 24 परगना के झड़खाली में यह स्पेशलाइज्ड पशुशाला तैयार होगा.

स्टेट जू ऑथोरिटी के सदस्य सचिव बृजराज शर्मा ने बताया कि आशा की जा रही है कि झड़खाली में चिड़ियाघर का दूसरा कैंपस विश्व का पहला मैनग्रोव पशुशाला बनेगा. राज्य में मैनग्रोव पशुशाला तैयार करने के संबंध में प्राथमिक बातचीत एक वर्ष पहले ही हो गयी थी.

अलीपुर चिड़ियाघर की दशा को ठीक करने के लिए राज्य को कदम उठाने के लिए सेंट्रल जू ऑथोरिटी ने निर्देश दिया था. तभी देश के सर्वाधिक पुराने चिड़ियाघरों में से एक की दशा को ठीक करने के लिए कई जरूरी कदम उठाने के लिए तत्कालीन स्टेट जू ऑथोरिटी ने फैसला लिया था.

इसमें से महत्वपूर्ण फैसला था कि पशुओं के पिंजरे की परिधि को बढ़ाया जाये. जहां तक संभव हो सके पिंजरे से बाहर उन्हें इन्क्लोजर में रखा जाये. अलीपुर चिड़ियाघर के निदेशक कन्हाईलाल घोष का कहना है कि चिड़ियाघर के परिसर का क्षेत्रफल तो बढ़ नहीं सकता है लिहाजा चिड़ियाघर में प्रदर्शित होने वाली प्रजातियों की संख्या को कम किया जायेगा.

पशुओं को ठीक तरीके से रखने के लिए ओपन इनक्लोजर की मान्यता विश्व भर में है. लेकिन पशुओं की संख्या को घटाना आसान नहीं. शहर में ऐसी कोई वैकल्पिक जगह नहीं जहां अतिरिक्त पशुओं को रखा जा सके. इसलिए अलीपुर चिड़ियाघर के दूसरे कैंपस के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी गयी.

प्राथमिक तौर पर सोनारपुर ब्लॉक के मादुरदह के पास जमीन मिलने पर भी वह खास पसंद नहीं आयी थी. राज्य के प्रस्ताव को सेंट्रल जू ऑथोरिटी ने भी खारिज कर दिया था.

इसके बाद झड़खाली में करीब 100 एकड़ जमीन की खोज की गयी. लेकिन वहां भी समस्या थी. कभी जमीन वन विभाग के पास थी लेकिन बाद में एक अन्य विभाग के हाथों में वह जमीन चली गयी. वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक जुलाई के अंतिम सप्ताह में वह जमीन उन्हें वापस मिल गयी.

जमीन हाथ में मिलने के बाद ही मैनग्रोव चिड़ियाघर तैयार करने का सपना अधिकारियों ने देखना शुरू कर दिया. बृजराज शर्मा के मुताबिक झड़खाली की जमीन की जांच करते वक्त उन्होंने देखा कि वहां मैनग्रोव अरण्य है.

वहीं स्पेशलाइज्ड चिड़ियाघर तैयार करने की योजना ने जन्म लिया. इसके अलावा आजकल स्पेशलाइज्ड चिड़ियाघर की अवधारणा प्रचलन में है. अन्यथा एक जगह के लोग दूसरे स्थान पर स्थित चिड़ियाघर में क्यों जायेंगे.

इस स्पेशलाइज्ड चिड़ियाघर में विशेष प्राकृतिक परिवेश मौसम में जिस तरह की प्रजातियां रह पाती हैं उन्हें लेकर ही यह पशुशाला तैयार की जायेगी. पता चला है कि यहां सुंदरवन के नमकीन आबोहवा में रहने वाले प्राणियों को रखने की योजना बनायी जा रही है.

ऐसी करीब 10-12 प्रजातियां जो सुंदरवन के परिवेश में रहती हैं जैसे रॉयल बंगाल टाइगर, विशेष मगरमच्छ आदि, उन्हें ही उक्त चिड़ियाघर में रखा जायेगा. सब कुछ यदि ठीक ठाक रहा तो अगले पांच वर्षो के भीतर ही यह मैनग्रोव चिड़ियाघर तैयार हो जायेगा.

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