निर्वाचित सदस्यों को ही जीटीए का जिम्मा

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कोलकाता: दाजिर्लिंग के विकास के लिए राज्य सरकार गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन किया है और इसके लिए चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से सदस्य चुने गये हैं. इसलिए सरकार जीटीए को संचालित करने का जिम्मा भी निर्वाचित सदस्यों को ही देना चाहती है. राज्य सरकार यहां मनोनीत सदस्यों की बजाय निर्वाचित सदस्यों को इलाके […]

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कोलकाता: दाजिर्लिंग के विकास के लिए राज्य सरकार गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन किया है और इसके लिए चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से सदस्य चुने गये हैं. इसलिए सरकार जीटीए को संचालित करने का जिम्मा भी निर्वाचित सदस्यों को ही देना चाहती है. राज्य सरकार यहां मनोनीत सदस्यों की बजाय निर्वाचित सदस्यों को इलाके के विकास का जिम्मा सौंपना चाहती है.

ये बातें गुरुवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राइटर्स बिल्डिंग में संवाददाताओं से कही. उन्होंने कहा कि गोरखालैंड की मांग करनेवाले लोगों को यह सोचना चाहिए कि वहां के विकास के लिए जो एडमिनिस्ट्रेशन का गठन किया गया है, उसका नाम भी गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन रखा गया है. उनकी मांग के अनुसार जीटीए का गठन हुआ है, संविधान के अनुसार चुनाव हुआ और फिर वहां के सदस्यों को ही विकास का जिम्मा भी सौंपा गया है. अब उन्हें क्या चाहिए.

सिर्फ गोरखालैंड अलग राज्य नहीं किया गया, बाकी सभी सुविधाएं उन्हें दी जा रही हैं. जीटीए के अंतर्गत करीब 98 फीसदी विभागों का स्थानांतरण किया जा चुका है. चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य या भूमि. राज्य के एक-दो विभागों को छोड़ कर बाकी सभी विभाग उन्हें सौंप दिये गये हैं, यहां तक कि जीटीए के लिए केंद्र से रुपया भी आ चुका है और राज्य सरकार ने भी राशि प्रदान की है. अगर इस राशि को समय पर योजनाओं पर खर्च नहीं किया गया, तो यह राशि वापस चली जायेगी.

लोकसभा चुनाव के पहले सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने के लिए कांग्रेस व भाजपा इस मुद्दे को उछाल रही है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि किसी कीमत पर गोरखालैंड को अलग राज्य का दर्जा नहीं दिया जायेगा. वह बंगाल का हिस्सा था, है और हमेशा बना रहेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीटीए के अंतर्गत सभी विजयी सदस्यों को लेकर चार सितंबर को चुनाव होगा और निर्वाचित सदस्यों में से ही पांच लोगों को जीटीए सभा का दायित्व दिया जायेगा. उन्होंने कहा कि अगर इस चुनाव प्रक्रिया में कोई हिस्सा नहीं लेता है, तब राज्य सरकार आगे की कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि जीटीए का संचालन मनोनीत की बजाय निर्वाचित सदस्य ही करें.

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