अब मशीन पढ़ रही पत्रों का पता

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कोलकाता: भारतीय डाक ने कूरियर कंपनियों की चुनौतियों से निबटने की तैयारी कर ली है. इसके लिए जहां अभियान चला कर ग्राहकों व आम लोगों को डाक के अधिक उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है. वहीं डाक ने एक ऐसी मशीन खोज निकाली है, जो पत्रों का पता पढ़ कर जल्दी-जल्दी उसकी छंटाई […]

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कोलकाता: भारतीय डाक ने कूरियर कंपनियों की चुनौतियों से निबटने की तैयारी कर ली है. इसके लिए जहां अभियान चला कर ग्राहकों व आम लोगों को डाक के अधिक उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है. वहीं डाक ने एक ऐसी मशीन खोज निकाली है, जो पत्रों का पता पढ़ कर जल्दी-जल्दी उसकी छंटाई करती है और उसे उसके गंतव्य के लिए भेज देती है. ताकि लोगों तक जल्द पत्र भिजवाया जा सके.

इसके लिए कोलकाता में ऑटोमेटेड मेल प्रोसेसिंग सेंटर चालू किया गया है, जहां पूर्वी भारत का पहला लेटर सॉर्टिग मशीन (एलएसएम) लगायी गयी है. यह मशीन ओसीआर तकनीक पर काम करती है. यह एक घंटे में 35,000 पत्रों की छंटनी कर सकती है.

बंगाल सर्किल के मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल जे पंडा ने बताया कि पहले डाककर्मियों द्वारा डाक की छंटाई की जाती थी. अब मशीन से डाक की छंटाई होने से त्वरित गति से छंटाई संभव हो पा रही है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि पत्रों भेजने में कुछ मूलभूत निर्देशों का पालन किया जाये, ताकि मशीन आसानी से पत्रों की छंटाई कर पाये. उन्होंने बताया कि जनसंख्या बढ़ने के साथ-साथ ही डाकिये पर काम का दबाव भी बढ़ा है. अब पहले जैसा नहीं रहा कि डाकिया इलाके के लोगों को व्यक्तिगत रूप से पहचानता है. ऐसी स्थिति में जरूरी है कि लिफाफा पर स्पष्ट, साफ और निर्देशानुसार पता लिखा जाये, जिससे पत्रों को त्वरित ढ़ंग से वितरित किया जा सके.

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