फंसा 100 करोड़ का आलू

Updated at : 08 Aug 2014 5:06 AM (IST)
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फंसा 100 करोड़ का आलू

आलू सप्लाई रोकने के लिए बंगाल सरकार के आदेश पर सीमा सील झारखंड के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की उठी मांग रांची/आसनसोल/ सीतारामपुर :पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश पर बंगाल की सीमा से चौकी कुल्टी थाना के चौरंगी के पास पुलिस, कृषि विपणन विभाग व बाजार समिति के अधिकारी संयुक्त रूप से वाहनों की जांच […]

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आलू सप्लाई रोकने के लिए बंगाल सरकार के आदेश पर सीमा सील

झारखंड के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की उठी मांग

रांची/आसनसोल/ सीतारामपुर :पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश पर बंगाल की सीमा से चौकी कुल्टी थाना के चौरंगी के पास पुलिस, कृषि विपणन विभाग व बाजार समिति के अधिकारी संयुक्त रूप से वाहनों की जांच कर रहे हैं. बुधवार की रात्रि दो दर्जन से अधिक ट्रकों को वापस भेजा गया.

इधर पश्चिम बंगाल प्रगतिशील आलू व्यवसायी समिति के सचिव वरेन मंडल ने कहा है कि राज्य की विभिन्न सड़कों पर सौ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का आलू पड़ा हुआ है. इससे व्यवसाय लड़खड़ाने लगा है. बर्धवान में 25 ट्रक, चौरंगी चौक (कुल्टी) में 20 ट्रक, खड़गपुर में 160 ट्रक , पुरुलिया में 40 से अधिक ट्रक, पश्चिम मेदिनीपुर में 40 ट्रक आलू फंसा हुआ है. पुलिस इन ट्रकों को झारखंड, ओड़िशा व बिहार जाने नहीं दे रही है.

बंगाल में आलू की कीमतें लगातार बढ़ रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले माह घोषणा की थी कि चंद्रमुखी आलू की अधिकतम कीमत 14 रुपये प्रति किलो होगी. इसके लिए टास्क फोर्स का भी गठन किया गया था. इसके बाद भी कीमत बेलगाम हो गयी है. इस समय ज्योति आलू 22 रुपये तथा चंद्रमुखी आलू 25 रुपये किलो बिक रहा है.

पश्चिम बंगाल के कृषि विपणन सचिव सुब्रत विश्वास ने कहा कि राज्य से चोरी छिपे आलू अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है. इसी कारण बुधवार को सीमा सील करने का निर्देश दिया गया है. कोल्ड स्टोरेज संचालकों व आलू के थोक व्यवसायियों से भी बातचीत जारी है. उनसे सहयोग करने को कहा गया है. विभागीय अधिकारियों ने कहा कि पंजाब और उत्तर प्रदेश से उत्पादित आलू पाकिस्तान जा रहा है. इसकी भरपाई बंगाल से की जा रही है. इसी कारण आलू बाहर जाने से रोका गया है.

पश्चिम बंगाल में आलू की बढ़ती कीमत को देखते हुए बंगाल सरकार ने इसके लिए गठित टास्क फोर्स को निर्देश दिया है कि जब तक राज्य में आलू की कीमतें नियंत्रित नहीं हो जाती, राज्य से बाहर आलू की आपूर्ति नहीं होगी.

इस आदेश के बाद पश्चिम बंगाल की सीमाएं सील कर दी गयी हैं. इधर झारखंड में आलू की उपलब्धता कम हो गयी है. इससे इसकी कीमत भी अनियंत्रित होती जा रही है. राज्य के आलू व्यवसायी संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.

– बंगाल में सरकार ने शीत गृहों और विक्रय केंद्रों पर की पुलिस बल की तैनाती

– बुधवार की रात दो दर्जन से अधिक आलू लदे ट्रक बंगाल की सीमा पर पकड़ कर वापस भेज दिये गये

– पुलिसकर्मियों व स्थानीय नेताओं द्वारा आलू लदे ट्रकों से अवैध वसूली किये जाने की भी मिल रही हैं शिकायतें

– इधर झारखंड में आलू की उपलब्धता हुई कम, रांची के पंडरा बाजार में लाल आलू खत्म मत अनियंत्रित होने की आशंका से बढ़ी चिंता

आलू व्यवसायी संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा

रांची : आलू व्यवसायी संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर उन्हें बंगाल से आलू की आवक पर रोक लगाये जाने के बाद की स्थिति से अवगत कराया गया. संघ ने लिखा है कि आलू की आवक लगातार कम होने से इसकी कीमत में इजाफा हो गया है.

वहीं यूपी सहित अन्य राज्यों से आलू खरीदने व लाने का खर्च बंगाल से अधिक होने के कारण नहीं मंगाया जा रहा है. बंगाल सरकार ने शीत गृह विक्रय केंद्र में पुलिस बल को तैनात कर दिया है और किसी भी सूरत में आलू को वहां से नहीं भेजे जाने का निर्देश दिया है. राज्य में सभी सीमावर्ती चेक पोस्ट पर बैरियर लगा कर आलू लदे वाहन को रोका जा रहा है. वहीं पुलिसकर्मी व स्थानीय नेता आलू लदे ट्रकों से अवैध वसूली करने की भी शिकायतें मिल रही है.

संघ ने मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए अविलंब पश्चिम बंगाल सरकार से बात कर इस समस्या का निदान करने को कहा है. यह पत्र अध्यक्ष विकास कुमार सिंह, महासचिव पवन शर्मा व होलसेल बाजार समिति के अध्यक्ष शंभु प्रसाद गुप्ता की ओर से लिखा गया है.

हिम्मत है, तो हेमंत सोरेन कोयला रोकें : बंधु तिर्की

रांची : तृणमूल कांग्रेस के विधायक बंधु तिर्की ने कहा है कि बंगाल सरकार ने अपने लोगों की चिंता की है. इसलिए आलू के झारखंड आने पर रोक लगा दी. ममता बनर्जी का यह फैसला ठीक है. वह अपने राज्य के लिए जिम्मेवार है. हेमंत सोरेन सरकार के पास हिम्मत है, तो झारखंड का कोयला रोक दे.

सरकार इच्छा शक्ति से चलती है. ममता बनर्जी के पास सरकार चलाने का अनुभव और मजबूत इरादा है. झारखंड में सरकार को निर्णय लेने का मादा नहीं है. हेमंत सोरेन सरकार किसी काम की नहीं है. उन्होंने कहा कि यह सरकार स्थानीय नीति लागू नहीं कर पायी. स्थानीयता को लेकर लोगों को भ्रम में रखा गया. इस सरकार में छोटे-छोटे फैसले नहीं होते हैं.

स्थायी मुख्य सचिव तक नियुक्त नहीं कर पाये. सरकार फरजी रूप से नियुक्त हुए लोगों को नियमित करने की सोच रही है, लेकिन यहां के लोगों को हक देने का साहस नहीं दिखा पा रही है. ऐसी सरकार को राज्य के लोगों की चिंता नहीं है.

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