कोलकाता : मॉरीशस भोजपुरी का भारतीय स्वर्ग है : बुधू

Updated at : 07 Feb 2019 5:49 AM (IST)
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कोलकाता :  मॉरीशस भोजपुरी का भारतीय स्वर्ग है : बुधू

कोलकाता : मॉरीशस में भारत से वे लोग गये थे, जो पढ़े-लिखे भले न हों, लेकिन संस्कारवान थे. भोजपुरी माटी के वे लोग कोलकाता से ही जहाज पर मॉरीशस गये थे. मैं कालीघाट के पास आदि गंगा को देखकर भाव विह्वल हो गयी. भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मॉरीशस सरकार की अध्यक्षा और भोजपुरी की गीत गवई […]

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कोलकाता : मॉरीशस में भारत से वे लोग गये थे, जो पढ़े-लिखे भले न हों, लेकिन संस्कारवान थे. भोजपुरी माटी के वे लोग कोलकाता से ही जहाज पर मॉरीशस गये थे. मैं कालीघाट के पास आदि गंगा को देखकर भाव विह्वल हो गयी. भोजपुरी स्पीकिंग यूनियन, मॉरीशस सरकार की अध्यक्षा और भोजपुरी की गीत गवई परंपरा की संवर्धक डॉ सरिता बुधू ने भारतीय भाषा परिषद में आयोजित एक परिसंवाद में ये बातें कहीं.

बुधवार को भारतीय भाषा परिषद की ओर से ‘मॉरीशस और भारत का सांस्कृतिक संबंध : भोजपुरी की महती भूमिका’ पर आयोजित परिसंवाद में उन्होंने कहा कि भोजपुरी गीतों का संरक्षण जरूरी है. इसके लिए मॉरीशस में कई स्कूल खोले गये हैं. उन्होंने आगे कहा कि मॉरीशस की भोजपुरी संस्कृति में जातीय संकीर्णता नहीं है. इस मौके पर सरिता बुधू ने भोजपुरी गीतों का गायन भी किया.

इस दौरान उपस्थित डॉ चंद्रकला पांडेय ने अपने संबोधन में कहा कि मॉरीशस में भारत की सांस्कृतिक जड़ें हैं. मॉरीशस के लोग यात्रा पर गये भारतवासियों का स्पर्श कर इस महसूस करते हैं. बनारस, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, छपरा, आरा, चंपारण आदि भोजपुरी क्षेत्रों के लोग वहां अभी भी हैं. डीजीपी (होमगार्ड) मृत्युंजय कुमार सिंह ने कहा कि भोजपुरी, भारत और मॉरीशस के बीच सेतु है जो अभी भी बना हुआ है. भारत की कविताओं और गीतों ने वहां के लोगों को हमेशा उर्जा प्रदान की है.
अध्यक्षीय भाषण देते हुए डॉ शंभुनाथ ने कहा कि मॉरीशस में भारतीयों का श्रमिक जीवन नारियल के खोल सा कठोर रहा है पर उनकी भावनाएं नारियल के पानी की तरह मीठी रही हैं. भोजपुरी और हिंदी का संबंध मिट्टी और पेड़ की तरह है. पेड़ तभी बचेगा, जब मिट्टी बचेगी. आरंभ में परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वह मॉरीशस गयी थी. मॉरीशस भोजपुरी का भारतीय स्वर्ग है. पियूष कांत राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
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