एयरपोर्ट से फिर एक बांग्लादेशी गिरफ्तार, दुबई से आया था कोलकाता

Updated at :31 May 2018 5:07 AM
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एयरपोर्ट से फिर एक बांग्लादेशी गिरफ्तार, दुबई से आया था कोलकाता

कोलकाता : कोलकाता एयरपोर्ट से मंगलवार की रात फिर एक बांग्लादेशी को गिरफ्तार किया गया. उसका नाम मोहम्मद रेहान मोल्ला बताया गया है. दुबई से कोलकाता आ रहे बांग्लादेशी रेहान की एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान संदेह होने पर उसे रोक कर तलाशी ली गयी. पासपोर्ट देखने के बाद संदेह हुआ कि वह नाम बदलकर […]

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कोलकाता : कोलकाता एयरपोर्ट से मंगलवार की रात फिर एक बांग्लादेशी को गिरफ्तार किया गया. उसका नाम मोहम्मद रेहान मोल्ला बताया गया है. दुबई से कोलकाता आ रहे बांग्लादेशी रेहान की एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान संदेह होने पर उसे रोक कर तलाशी ली गयी. पासपोर्ट देखने के बाद संदेह हुआ कि वह नाम बदलकर आ रहा था. उसके पास से भारतीय पासपोर्ट बरामद किया गया है. उसे तुरंत गिरफ्तार कर एनएससीबीआइ एयरपोर्ट थाने की पुलिस के हवाले कर दिया गया.
गौरतलब है कि ठीक इसी तरह से गत सोमवार की रात बांग्लादेश के खुलना निवासी उज्जवल शेख को एयरपोर्ट से ही भारतीय पासपोर्ट व बांग्लादेशी जन्म प्रमाण पत्र के साथ गिरफ्तार किया गया था. वह कुछ साल पहले भारत आया था. फिर पुणे में काम के सिलसिले में गया था. वहां साड़ी की दुकान में काम करता है.
बांग्लादेश में उसकी पत्नी और बच्चे हैं और जबकि वह मुंबई में भी शादी कर चुका है. वह मुंबई से कोलकाता होकर बांग्लादेश जानेवाला था, उसके पहले ही उसे दबोचा गया था.
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार मोल्ला से पूछताछ की जा रही है कि आखिर वह नाम बदलकर कैसे पासपोर्ट बना लिया था. भारतीय पासपोर्ट बनाने के पीछे क्या मंशा थी. इन सारे तथ्यों का पता लगाया जा रहा है कि वह भारतीय पासपोर्ट कब और कैसे बनाया? पुलिस का अनुमान है कि इसके पीछे कोई एक गिरोह है, जो बांग्लादेश से आनेवालों को भारत में पासपोर्ट बनवाने में मदद करता है. इस गिरोह के बारे में पता लगाया जा रहा है.
892 निबंधित राजनीतिक पार्टियां भाग नहीं लेती हैं किसी भी चुनाव में
आसनसोल. आसनसोल शहर के लावारिस तथा वेवश बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था का अभियान चलानेवाले तथा आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक चंद्रशेखर कुंडू ने इस बार निष्क्रय राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोला है. उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर उन निबंधित 892 राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ जांच करने की मांग की है जो निबंधन कराने के बाद भी चुनाव नहीं लड़ती हैं. उनका आरोप है कि संभवत: इन राजनीतिक पार्टियों का मुख्य उद्देश्य काले धन को सफेद करना है.
क्यों मामला हो गया संगीन: इसी माह चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि राजनीतिक पार्टियां सूचना के अधिकार के तहत नहीं आती है. पुणे के एक निवासी ने चुनाव आयोग से सूचना के अधिकार के तहत छह राजनीतिक पार्टियों के बारे में जानकारी मांगी थी कि इन्हें कितना और किस मद से चंदा आता है.? आयोग ने उसे इसकी जानकारी नहीं दी है. श्री कुंडू का कहना है कि इस स्थिति में आम आदमी के लिए इन पार्टियों के बारे में जानना काफी मुश्किल है. यही कारण है कि उन्होंने वर्ष 2017 में निष्क्रय राजनीतिक पार्टियों की सूची मांगी थी. इस वर्ष उसका जबाब मिला है.
काले धन पर जताया संदेह: उन्होंने कहा कि नियमानुसार कोइ भी निबंधित राजनीतिक पार्टियों को आयकर विभाग की धारा 13(ए) के तहत एक सौ फीसदी छूट मिलती है. जो व्यक्ति या संस्था इन पार्टियों को चंदा देती हैं, उन्हें भी आयकर की धारा 80 जीसीबी व धारा 80 जीजीसी के तहत कर भुगतान में छूट मिलती है. यदि इन 892 राजनीतिक दलों को 20 करोड़ रूपये प्रति वर्ष का चंदा मिलता हो तो कुल राशि 18 हजार करोड़ रूपये से अधिक होती है. यह राशि अवैध नहीं है. लेकिन इस राशि पर सरकार को कोई शुल्क हासिल नहीं होता है. इसी क्रम में काले धन को भी सफेद किया जा सकता है. किसी भी राजनीतिक पार्टी के निबंधन में 10 हजार रूपये का शुल्क लगता है. इतनी राशि कोई भी आसानी से खर्च कर देता है. हालांकि वित्तमंत्री ने संसद में घोषणा की थी कि राजनीतिक दलों को दो हजार रूपये से अधिक की राशि नगद नहीं दी जा सकती है. इससे अधिक राशि इलेक्ट्रोल बांड के जरिये ही दी जा सकती है जो विभिन्न बैंकों में उपलब्ध है.
इंजीनियरिंग कॉलेज के शिक्षक चंद्रशेखर कुंडू ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र
क्या है पूरा मामला
श्री कुंडू ने सूचना के अधिकार के तहत केंद्रीय चुनाव आयोग से जबाब मांगा था. उनके जबाब में आयोग ने उन्हें सूचित किया कि देश में 2044 राजनीतिक पार्टियां निबंधित है. लेकिन इनमें से 892 पार्टियां चुनाव नहीं लड़ती है. स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठता है कि आखिरकार ये पार्टियां करती क्या है? आयोग ने इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दिया है. राष्ट्रपति को पत्र लिख कर उन्होंने इन पार्टियों के खिलाफ जांच करने की मांग की है. उनका कहना है कि क्या इनका निबंधन पिछले दरवाजे से काले धन को सफेद करने के लिए किया गया है? इसकी जांच राष्ट्रपति ही करा सकते हैं.
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