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कोलकाता : बिना टेस्ट के बनाते थे नकली रिपोर्ट, जानिए कैसे पुलिस के हाथ लगा यह गिरोह

Updated at : 24 May 2018 1:05 AM (IST)
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कोलकाता : बिना टेस्ट के बनाते थे नकली रिपोर्ट, जानिए कैसे पुलिस के हाथ लगा यह गिरोह

कोलकाता : नकली डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम पर पीड़ित मरीजों की जान से खिलवाड़ करनेवाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के हाथ लगे आरोपियों के नाम विजय कुमार झा (27) और संतोष कुमार साव (29) हैं. दोनों पोर्ट इलाके के नादियाल व संतोषपुर […]

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कोलकाता : नकली डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम पर पीड़ित मरीजों की जान से खिलवाड़ करनेवाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के हाथ लगे आरोपियों के नाम विजय कुमार झा (27) और संतोष कुमार साव (29) हैं. दोनों पोर्ट इलाके के नादियाल व संतोषपुर के रहनेवाले हैं. बुधवार को दोनों को अदालत में पेश करने पर उन्हें दो दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेजने का निर्देश दिया गया है.
कैसे पुलिस के हाथ लगा यह गिरोह
पुलिस सूत्रों के मुताबिक संदेह के आधार पर अजहर आलम अंसारी नामक एक व्यक्ति ने राजाबागान थाने में इसकी शिकायत दर्ज करायी थी. शिकायत में उन्होंने कहा था कि इलाके के कुछ मेडिकल स्टोर में डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है.
पुलिस ने शिकायत दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू की और मुखबिरों की मदद लेकर नादियाल व संतोषपुर इलाके से दो युवकों को गिरफ्तार किया. दोनों के एक ठिकाने पर छापेमारी कर वहां से काफी अलग-अलग नाम के डायग्नोस्टिक सेंटर की रसीद व मेडिकल स्लिप हाथ लगे हैं. गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस हिरासत में लेने के बाद उनसे पूछताछ हो रही है.
ऐसे चलाते थे नकली डायग्नोस्टिक सेंटर का धंधा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक प्राथमिक पूछताछ में दोनों ने बताया कि कुछ मरीज इधर-उधर नहीं भटक कर डॉक्टर व मेडिकल स्टोर में टेस्ट करवाकर रिपोर्ट ले जाते हैं. उनका गिरोह इसी तरह के मरीजों को टार्गेट करता था. पोर्ट इलाके के अलावा आसपास के इलाकों में वे मेडिकल स्टोर, छोटे-मोटे डॉक्टर के चेंबर व कुछ अन्य दुकानों से मरीजों के खून का सैंपल कलेक्ट करते थे. इन सैंपल को एक तय ठिकाने में लाकर बिना किसी डायग्नोस्टिक सेंटर में उसकी जांच किये ही उस मरीज के नाम पर नकली डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम पर छपे बिल में रिपोर्ट दे देते थे. इसके लिए उस ठिकाने पर एक कम्प्यूटर भी मौजूद था, जिससे वे रिपोर्ट प्रिंट करते थे. इस तरह से वह रोजाना 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी आसानी से करते थे.
गिरोह के दोनों सदस्यों को पुलिस हिरासत में लिया गया है. इनसे पूछताछ कर इनके साथ इस धंधे में और कौन जुड़े हैं, इस बारे में इनसे जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है.
वकार रजा, डीसी (पोर्ट विभाग)
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