UP में इलाज के नाम पर धोखाधड़ी, कहीं डॉक्टर नहीं तो कही अस्पताल बंद, जानिए स्वास्थ्य केंद्रों की हकीकत
अस्पताल में इलाज के नाम पर धोखाधड़ी (AI)
UP News: कानपुर जिले में 40 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे मरीजों को सिर्फ फार्मासिस्ट और एएनएम से ही इलाज मिल रहा है. इस वजह से छोटे-मोटे मर्ज के मरीज भी बड़े अस्पतालों का रुख कर रहे हैं, जिससे वहां भीड़ बढ़ गई है.
UP News: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 40 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरे समय डॉक्टर नहीं हैं. ऐसे में मरीजों को फार्मासिस्ट और ANM से ही इलाज और दवाएं मिल रही हैं. डॉक्टर से सलाह और जरूरी जांच नहीं होने के कारण सामान्य बुखार, सर्दी-जुकाम और दूसरी छोटी बीमारियों के मरीज भी हैलट और उर्सला जैसे बड़े अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. इससे इन अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है.
डॉक्टर नहीं होने से बढ़ी परेशानी
कानपुर में 53 अर्बन पीएचसी, 43 ग्रामीण पीएचसी, 247 सीएचओ उपकेंद्र और 93 आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं. इनमें कई केंद्रों पर डॉक्टरों की कमी है. मरीज पहुंचने पर फार्मासिस्ट उन्हें सामान्य दवाएं देकर वापस कर रहे हैं. डॉक्टर नहीं होने से मरीजों की बीमारी की सही जांच और समय पर इलाज प्रभावित हो रहा है.
कई स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं आते डॉक्टर
शिवराजपुर के डुढवा जमौली, आटी, मुस्ता और बीरामऊ पीएचसी में डॉक्टरों की नियमित मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मुस्ता में डॉक्टर सप्ताह में दो दिन आते हैं. बिल्हौर के नानामऊ पीएचसी में भी डॉक्टर नहीं हैं और केंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है. अरौल में भी डॉक्टर की नियमित उपलब्धता नहीं होने की बात सामने आई है.
कई जगह केंद्र बंद रहने की शिकायत
शिवराजपुर के सुखरेज गांव में बने आयुष्मान आरोग्य मंदिर के बारे में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि केंद्र अक्सर बंद रहता है. चौबेपुर के बंसठी पीएचसी में तैनात डॉक्टर मातृत्व अवकाश पर हैं. डॉक्टरों की कमी के कारण उनकी जगह किसी दूसरे डॉक्टर की ड्यूटी नहीं लगाई गई. सरसौल के शिशुपुर केंद्र के बारे में बताया गया कि वह कई महीनों से बंद था और करीब एक सप्ताह पहले दोबारा शुरू हुआ है.
बड़े अस्पतालों पर बढ़ रहा दबाव
डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और वायरल बुखार के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टर नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. गरीब और ग्रामीण परिवार इन सरकारी केंद्रों पर इलाज के लिए निर्भर रहते हैं. यहां इलाज नहीं मिलने पर वे हैलट, उर्सला, केपीएम और कांशीराम अस्पताल पहुंच रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए वॉक-इन इंटरव्यू से भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. जल्द ही स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरे समय डॉक्टर उपलब्ध कराने की बात कही गई है. Must Read: नाबालिग के हाथ में स्कूल बस की स्टेयरिंग? UP में पेड़ से टकराई बच्चों से भरी बस, 13 घायल
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लेखक के बारे में
By खुशबू कुमारी
खुशबू कुमारी पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में डिजिटल कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने पटना विमेंस कॉलेज, से मास कम्युनिकेशन में स्नातक किया है तथा वर्तमान में इग्नू से मास्टर ऑफ आर्ट्स (मास कम्युनिकेशन एंड डिजिटल मीडिया) की पढ़ाई कर रही हैं. उन्हें जनहित से जुड़ी खबरों, डिजिटल पत्रकारिता, समाचार लेखन, फोटोग्राफी, वीडियो एडिटिंग और ग्राफिक डिजाइन में विशेष रुचि है. वे राजनीति, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, अपराध और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर शोधपरक, तथ्यपरक और पाठकों के लिए उपयोगी डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं. उनका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, स्पष्ट और प्रभावी जानकारी पहुंचाना है, ताकि समाचार केवल सूचना का माध्यम न होकर समाज के लिए उपयोगी साबित हों.
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