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Monday, March 4, 2024

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Ram Mandir: रामलला प्राण प्रतिष्ठा पूजन आज से, 18 जनवरी को गर्भ गृह में रखी जाएगी मूर्ति-चंपत राय

श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों के लिए 20 और 21 जनवरी को रामलला के दर्शन बंद रहेंगे. अयोध्या में 5.47 मिनट पर सूर्यास्त होगा. इसके बाद सभी अपने-अपने घरों के आगे पांच दीये जलाएं.

अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पूजा 22 जनवरी को दोपहर 12.20 होगी और एक बजे तक चलेगी. रामलला की श्यामल रंग की मूर्ति का चयन हुआ है. 16 जनवरी से प्राण प्रतिष्ठा पूजा शुरू होगी. 18 जनवरी को मूर्ति गर्भ गृह में रखी जाएगी. मूर्ति का जल नल अन्न शैय्या वास कराया जाएगा. पीएम माेदी, मोहन भागवत, सीएम योगी आदित्यनाथ गर्भ गृह में मौजूद रहेंगे.

श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियों के लिए 20 और 21 जनवरी को रामलला के दर्शन बंद रहेंगे. अयोध्या में 5.47 मिनट पर सूर्यास्त होगा. इसके बाद सभी अपने-अपने घरों के आगे पांच दीये जलाएं. उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को मंदिर केंद्रित कार्यक्रम होने चाहिए. अपने-अपने मंदिरों में स्वच्छता अभियान चलाएं. सब में भजन कीर्तन पूजन हो. एलईडी स्क्रीन लगाकर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को दिखाएं. महासचिव चंपत राय ने कहा कि रामलला की मूर्ति का अभिषेक सभी नदियों के जल से होगा. सभी जगह से जल कलश में पहुंच रहा है.

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पांच वर्ष के बालक रूपी है श्री रामलला की मूर्ति 

ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने बताया कि मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगी राज की मूर्ति का चयन किया गया है. यह मूर्ति श्यामल रंग की है. मूर्ति का वजन लगभग 150 से 200 किलोग्राम है. मूर्ति पांच वर्ष के बालक रूप की है व खड़े आकार में है. इससे पहले भी अरुण योगीराज की मूर्ति के चयन को लेकर खबरें लगातार वायरल हो रही थी. लेकिन अधिकृत घोषणा सोमवार को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने की. अरुण योगीराज ने मूर्ति निर्माण के दौरान मोबाइल व परिवार से पूरी तरह से दूर थे. उनका कहना है कि राम लला के बालरूप की मूर्ति को बनाना कठिन था, क्योंकि इस तरह की मूर्ति कहीं मौजूद नहीं है. वह पत्थर में श्री रामलला का चेहरा खोज रहे थे.

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प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त

आगामी पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी विक्रम संवत 2030 तदनुसार 22 जनवरी, 2024 सोमवार को भगवान श्री रामलला के श्री विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा होगी. सभी शास्त्रीय विधि का पालन करते हुए प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम मध्याह्न अभिजीत मुहूर्त में होगा. प्राण-प्रतिष्ठा की विधि 16 जनवरी से शुरू होकर 21 जनवरी तक चलेगी. 16 जनवरी को प्रायश्चित एवं कर्म कुटी पूजन, 17 जनवरी को मूर्ति का परिसर प्रवेश, 18 जनवरी सायंकाल तीर्थ पूजन एवं जल यात्रा, जलाधिवास एवं गंधाधिवास, 19 जनवरी प्रातः औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास सायंकाल धान्याधिवास 20 जनवरी प्रातः शर्कराधिवास, फलाधिवास, एवं सायंकाल पुष्पाधिवास 21 जनवरी सुबह मध्याधिवास, सायंकाल शय्याधिवास, इस प्रकार द्वादश अधिवास होंगे. सामान्यतया प्राण-प्रतिष्ठा में सप्त अधिवास होते हैं. न्यूनतम तीन अधिवास चलन में हैं. अनुष्ठान में 121 आचार्य होंगे. इस अनुष्ठान के संयोजक गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ एवं प्रमुख आचार्य श्री लक्ष्मीकांत दीक्षित काशी के होंगे.

सभी पंथ-संप्रदाय, अखाड़ों के आचार्य रहेंगे मौजूद

श्री राम जन्मभूमि मंदिर प्रांगण प्राण-प्रतिष्ठा के साक्षी बनने के लिए देश की सभी आध्यात्मिक धार्मिक मत, पंथ, संप्रदाय, उपासना पद्धतिय के सभी अखाड़ों के आचार्य, सभी पंरपराओं के आचार्य, सभी संप्रदायों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्री महंत, महंत, नागा साथ ही 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवास तटवासी, द्वीपवासी जनजाति परंपराओं से जुड़े विशिष्टजन रहेंगे.

शैव, वैष्णव, शाक्त, गणपत्य, पत्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंक रामानंद्र, रामानुज, निंबार्क, मद्धव, विष्णु नामी, रामसनेही, घीसा पंथ, गरीबदासी, गौड़ीया, कबीरपं वाल्मीकि, असम से शंकरदेव, माधव देव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम – गायत्री परिवार, अनुकूलचंद, ठाकुर परंपरा, उड़ीसा का महिमा समाज, पंजाब से अकाली, निरंकारी, नाम राधास्वामी तथा स्वामीनारायण, वारकरी, वीर शैव आदि है. प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहेंगे. गर्भ गृह में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूर्ण के बाद सभी साक्षीगण क्रमशः दर्शन करेंगे

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जनकपुरी से उपहार लेकर पहुंचे भक्त, ननिहाल से आए आभूषण

इस मौके पर कई प्रदेशों के जल, स्वर्ण, रजत, रत्न, वस्त्र, आभूषण विशाल घंटा, नगाड़ा और भिन्न भिन्न प्रकार की सुगंधि लेकर लोग आते ही जा रहें है. जिसमें सार्वाधिक उल्लेखनीय मां जानकी के मायके जनकपुर एवं सीत भार (पुत्री के घर निर्माण के समय भेजा जाने वाला उपहार) लेकर श्रद्धालु पहुंचे हैं. भगवान की ननिहाल रायपुर दंडकारण्य क्षेत्र से भिन्न-भिन्न प्रकार के आभूषण समर्पित किए है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र आह्वान किया है कि 22 को अयोध्या में भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा के दिन अपने आसपास के मंदिरों की सजावट और मंदिर के देवता की उपासना के अनुरूप भजन, पूजन, कीर्तन और आरती करें. प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को एलईडी स्क्रीन लगाकर सामूहिक रूप से देखें.

प्राण प्रतिष्ठा से पहले दो घंटे ‘मंगल ध्वनि’

श्रीरामजन्मभूमि प्राण प्रतिष्ठा समारोह के मौके पर सुबह 10 बजे से मुहूर्त के ठीक पहले तक लगभग 2 घंटे के लिए श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में शुभ की प्रतिष्ठा के लिए मंगल ध्वनि का आयोजन किया जा रहा है. इसमें भारत के विभिन्न अंचलों और राज्यों से पारंपरिक वाद्यों का वादन होगा. विभिन्न राज्यों के पच्चीस प्रमुख और दुर्लभ वाद्य यंत्रों के मंगल वादन से अयोध्या में ये प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न होगा. इन राज्यों और उनके प्रमुख वादों में उत्तर प्रदेश-पखावज, बांसुरी और ढोलक कर्नाटक-वीणा महाराष्ट्र-सुंदरी, पंजाब-अलगोजा, उड़ीसा-मर्दल, मध्य प्रदेश-संतूर, मणिपुर-पुंग असम-नगाड़ा, काली छत्तीसगढ़-तंबूरा, बिहार-पखावज, दिल्ली-शहनाई राजस्थान-रावणहत्था, पश्चिम बंगाल-श्रीखोल सरोद, आंध्र प्रदेश-घटम, झारखंड सितार, गुजरात-संतार, तमिलनाडु-नागस्वरम् तविल और मृदंगम्, उत्तराखंड से हुड़का आएगा. इस मांगलिक संगीत कार्यक्रम के परिकल्पनाकार और संयोजक यतींद्र मिश्र हैं. जो प्रख्यात लेखक, संस्कृति के जानकार और कलाविद् हैं. इस कार्य में उनका सहयोग केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी दिल्ली ने किया है.

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