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CJI Chandrachud: हिंदी में भी एलएलबी की पढ़ाई हो, राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में बोले सीजेआई चंद्रचूड़

Updated at : 13 Jul 2024 2:58 PM (IST)
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CJI Chandrachud: हिंदी में भी एलएलबी की पढ़ाई हो, राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में बोले सीजेआई चंद्रचूड़

CJI Chandrachud: सुप्रीम के कोर्ट मुख्य न्यायाधीश शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ के दीक्षांत समारोह में मौजूद थे. उन्होंने अपने संबोधन में अंग्रेजी के अलावा स्थानीय भाषा में कोर्ट के फैसले देने की बात कही.

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लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (CJI Chandrachud) ने लखनऊ में कहा कि हिंदी में भी एलएलबी की पढ़ाई होनी चाहिए. हिंदी में भी एडवोकेट बेहतर तरीके से पक्ष रखते हैं. जज और वकील तो अंग्रेजी को समझ सकते हैं, लेकिन आम आदमी को इसमें दिक्कत है. इसलिए अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी फैसले होने चाहिए. वो शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (National Law University) लखनऊ के दीक्षांत सामारोह को संबोधित कर रहे थे. सीजीआई ने कहा कि कोर्ट में कई फैसले अंग्रेजी में होने के कारण आम लोगों को समझ में नहीं आते हैं. दीक्षांत समारोह में में सीएम योगी आदित्यनाथ और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली भी मौजूद थे.

वकील हिंदी में भी बेहतर तरीके से रखते हैं पक्ष

सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (RMLNLU) को हिंदी में एलएलबी का कोर्स कराना चाहिए. सीजेआई डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति आपके विश्वविद्यालय के पड़ोस के गांव में, गांव से विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय की विधिक सहायता केंद्र में आता है और अपनी जमीन से जुड़ी समस्या को बताता है, लेकिन यदि छात्र को खसरा और खतौनी का मतलब ही नहीं पता है तो छात्र उस व्यक्ति को कैसे मदद कर पाएगा. इसलिए जमीन संबंधित क्षेत्रीय कानूनों के बारे में भी छात्र को जानकारी देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट से जब वो इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे तो समझा आया कि वहां के वकील हिंदी में भी बेहतर तरीके से अपना पक्ष रखते हैं. सीजेआई ने कहा कि उन्होंने 81 कॉलेज का सर्वे किया और पाया कि अंग्रेजी न मालूम होने से आम जनता को बहुत दिक्कत होती है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हिंदी में हो रहा अनुवाद

सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस ने कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में ऐसे कई निर्देश दिए हैं, जिससे न्याय की प्रक्रिया को आम लोगों के लिए आसान बनाया जा सके. इसमें सुप्रीम कोर्ट के अंग्रेजी में दिए गए फैसलों का भारत की विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है. जिससे आम जनता भी समझ सके कि निर्णय में आखिर लिखा क्या गया है. आज 1950 से लेकर 2024 तक सर्वोच्च न्यायालय के 37000 निर्णय है, जिनका हिंदी में अनुवाद हो गया है और यह सेवा सब नागरिकों के लिए मुफ्त है.

सुशासन की पहली शर्त विधि का शासन: सीएम योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कहा कि सुशासन की पहली शर्त है विधि का शासन. न्याय संगत व्यवस्था हर व्यक्ति को प्रिय है और न्याय समय पर हो, समयबद्ध तरीके से हो, इसके लिए उस फील्ड के विशेषज्ञ उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं. उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय एक सही राह पर आगे बढ़ चुका है. यहां के उपाधि प्राप्त करने वाले जितने भी स्नातक, परास्नातक और शोध करने वाले छात्र हैं, वे अपने कार्यों के माध्यम से न सिर्फ विश्वविद्यालय को बल्कि समाज और राष्ट्र को लाभान्वित करके अपने अभिभावकों और अपने गुरुजनों को गौरवान्वित करने का कार्य करेंगे.

मुख्य न्यायाधीश की बातों की हर कोई करता है सराहना: सीएम योगी

सीएम योगी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में भी मुख्य अतिथि के रूप में भारत के मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ का आशीर्वाद उन्हें मिल रहा है. इससे पहले भी दो दीक्षांत समारोह में उनका आशीर्वाद यहां के विद्यार्थियों को प्राप्त होता रहा है. इस अवसर पर उनकी उपस्थित हम सबको आह्लादित करती है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय में जाने से पूर्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल उत्तर प्रदेश वासियों के लिए और न्याय जगत के लिए अविस्मरणीय पल रहा है. आज भी उत्तर प्रदेश का वासी, न्याय जगत में विश्वास करने वाला हर व्यक्ति बड़े ही सकारात्मक भाव से उनकी बातों की सराहना करता है. दीक्षांत समारोह में इलाहाबाद उच्च न्यायायल के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह, विभागाध्यक्ष विधि प्रो. आदित्य प्रताप सिंह, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कई जस्टिस मौजूद थे.

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Amit Yadav

लेखक के बारे में

By Amit Yadav

UP Head (Asst. Editor)

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