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कौन करेगा साइकिल की सवारी?

Updated at : 02 Jan 2017 1:46 PM (IST)
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कौन करेगा साइकिल की सवारी?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह दोनों ही पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर चुनाव आयोग से मिलेंगे. आयोग ने उन्हें वक्त दे दिया है. मुलायम आज शाम 4.30 बजे चुनाव आयोग से मिलेंगे. मुलायम सिंह यादव का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, बावजूद इसके वे दिल्ली […]

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह दोनों ही पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावे को लेकर चुनाव आयोग से मिलेंगे. आयोग ने उन्हें वक्त दे दिया है. मुलायम आज शाम 4.30 बजे चुनाव आयोग से मिलेंगे. मुलायम सिंह यादव का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, बावजूद इसके वे दिल्ली पहुंच गये हैं. वहीं अमर सिंह और शिवपाल यादव भी दिल्ली पहुंच गये हैं. मुलायम ने कहा कि साइकिल सपा का चुनाव चिह्न है, इसलिए उस सिर्फ और सिर्फ उनकी पार्टी का हक है. लेकिन इस चुनाव चिह्न पर अखिलेश अपना दावा पेश कर रहे हैं.

थमने का नाम ही नहीं ले रहा है सपा का झगड़ा
गौरतलब है कि कल अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष से हटा दिया था और खुद अध्यक्ष बन गये थे. जबकि मुलायम ने इस अधिवेशन को ही असंवैधानिक करार दिया. साथ ही मुलायम ने रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा को पार्टी से निष्कासित कर दिया. वहीं मुलायम सिंह यादव ने पांच जनवरी को आयोजित पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन को रद्द कर दिया है.

राज्यसभा और लोकसभा के सांसद कौन किसके साथ
राज्यसभा में सपा के 19 सांसद हैं, जबकि लोकसभा में पांच. बात अगर राज्यसभा के सांसदों की जाये तो कुल 19 सांसदों में से अधिकतर अखिलेश के पक्षधर ही लगते हैं. रामगोपाल यादव, नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा को मुलायम ने पार्टी से निकाल दिया है. इन्हें अखिलेश खेमे का माना जता है. शेष बचे 16 सांसदों में से जया बच्चन और अमर सिंह एक खेमे में साथ नजर आयेंगे इसकी संभावना कम है. ऐसे में यह माना जा सकता है कि जया अखिलेश के साथ खड़ी होंगी. बाकी सांसद क्या निर्णय करेंगे यह उनके अखिलेश और मुलायम के साथ संबंध पर निर्भर करता है. वहीं लोकसभा के सांसदों पर अगर गौर करें तो कुल पांच सांसद यहां है, जिनमें मुलायम सिंह यादव, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव और तेजप्रताप यादव. यहां भी अखिलेश का पलड़ा भारी ही नजर आता है क्योंकि डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव तो खुले तौर पर अखिलेश के समर्थक है. तेजप्रताप जो कि मुलायम के पोते हैं, वह किस खेमें में जायेंगे इसपर संशय है.
अखिलेश में नजर आ रहा पार्टी का भविष्य
सपा में जारी घमासान के बीच ऐसा प्रतीत होता है कि अब अखिलेश मुलायम से अलग चुनाव लड़ेंगे. ऐसे में लोगों को उनमें पार्टी का भविष्य नजर आ रहा है. कार्यकर्ता उनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं. अखिलेश के साथ जनता भी है क्योंकि उन्होंने विकास कार्य किये हैं और उनकी छवि भी पाक-साफ है. ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर साइकिल की सवारी कौन करेगा? हालांकि अब यह निर्णय चुनाव आयोग को करना है. हालांकि इस मुद्दे पर बोलते हुए चुनाव आयोग के पूर्व अध्यक्ष एसवाई कुरैशी ने कहा कि मुझे लगता है कि साइकिल चुनाव चिह्न को रद्द कर दिया जायेगा और सपा के दोनों खेमे को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिया जायेगा, यह भी संभव है कि उन्हें पार्टी का नाम भी दूसरा रखना पड़े.
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