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चुनावी गणित: अतिपिछड़े वोटों की लड़ाई तीखी, पढें किसने क्या कहा

Updated at : 26 Dec 2016 8:26 AM (IST)
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चुनावी गणित: अतिपिछड़े वोटों की लड़ाई तीखी, पढें किसने क्या कहा

!!लखनऊ से राजेंद्र कुमार!! इस बार के चुनाव में अति पिछड़ी जातियों का वोट जीत में निर्णायक भूमिका निभायेगा. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गत गुरुवार को 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने का फैसला लेकर यह संकेत दे दिया है. मुख्यमंत्री के फैसले से भाजपा और बसपा के नेताओं को […]

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!!लखनऊ से राजेंद्र कुमार!!

इस बार के चुनाव में अति पिछड़ी जातियों का वोट जीत में निर्णायक भूमिका निभायेगा. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गत गुरुवार को 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने का फैसला लेकर यह संकेत दे दिया है. मुख्यमंत्री के फैसले से भाजपा और बसपा के नेताओं को झटका लगा है. भाजपा और बसपा के नेता जानते हैं कि यूपी की जातिवादी राजनीति में अखिलेश का यह फैसला खासा महत्व रखता है. सपा को इसका लाभ होगा. राज्य में पिछड़े वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित वर्ग में दर्ज कराने का मुद्दा फिर जोर पकड़ेगा. अति पिछड़ी जातियों का बसपा की ओर बढ़ रहा रूझान रोकने में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कामयाब हो जायेंगे. जो उन्हें चुनावी फायदा देगा. सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इसकी शुरुआत की थी. नेताजी ने एक तीर से कई निशाने साधने की चाह के तहत अक्तूबर वर्ष 2005 में 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी आरक्षण का लाभ दिलाने को अधिसूचना जारी करायी थी. तब भी इसका मकसद अति पिछड़ों को लुभाने के साथ बसपा के दलित वोटों को विचलित करना रहा था, क्योंकि अनुसूचित जाति का आरक्षण कोटे में हिस्सेदार बढ़ने के साथ पिछड़ा कोटा में दावेदारों की संख्या कम होती है. इसका लाभ सपा को मिलता. बसपा और भाजपा के लिए नुकसानदेह माने जानेवाले मुलायम सरकार के फैसले को वर्ष 2007 में बसपा शासन में निरस्त कर दिया गया था.

अखिलेश ने शुरू से ही दिया ध्यान: सपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक फिर से चुनाव वैतरणी पार करने के लिए सरकार बनने के तत्काल बाद ही मुख्यमंत्री ने पुराने फार्मूले का अजमाने का फैसला किया था. अखिलेश के निर्देश पर ही कैबिनेट उपसमिति ने 17 जातियों को एससी में दर्ज कराने का ड्राफ्ट तैयार किया. लंबे समय तक ड्राफ्ट पर विचार विमर्श के बाद गुरुवार को कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी. मुख्यमंत्री के फैसले से अति पिछड़े वोटों को हासिल करने की लड़ाई और तेज होगी. आनेवाला समय ही बतायेगा कि विस चुनाव में इन अति पिछड़ी जातियों का वोट किसे मिलेगा.

सपा के कदम से बसपा सुप्रीमो तिलमिला गयी

अखिलेश की इस फैसले से बसपा प्रमुख मायावती बुरी तरह से तिलमिला गयीं. कई पेज का प्रेसनोट जारी कर अखिलेश सरकार के फैसले को चुनावी हथकंडा बताया. यह भी कहा कि नेताजी की वजह से ही ये 17 जातियां आरक्षण का लाभ पाने से वंचित रही हैं. अब सपा मुखिया का बेटा भी 17 जातियों को राजनीतिक मझधार में फंसा रहा है. यह केवल चुनावी स्टंट है.

किसने क्या कहा

अनुसूचित वर्ग में शामिल करने का काम केंद्र सरकार करती है, अखिलेश की मंशा 17 अति पिछड़ी जातियों को एससी में शामिल कराना नहीं वरन उन्हें त्रिशंकु की भांति लटकाना है.

स्वामी प्रसाद मौर्य, वरिष्ठ नेता, भाजपा

अखिलेश सरकार का यह फैसला केवल चुनावी झुनझुना है. इससे इन 17 जातियों को कोई लाभ नहीं मिलनेवाला. क्यों कि यह महज केवल एक प्रस्ताव है. इसका पास होना बाकी है.

केशव प्रसाद मौर्य,प्रदेश अध्यक्ष,भाजपा

अखिलेश सरकार के फैसले से निश्चित तौर पर बसपा का नुकसान होगा, क्योंकि यदि पिछड़ों की संख्या दलितों के हिस्से में बढ़ायेंगे, तो वहां कंप्टीशन बढ़ेगा. ऐसे में दलितों का नुकसान होगा. राजनीतिक नुकसान बसपा का होगा.

सुरेंद्र राजपूत,प्रदेश प्रवक्ता,कांग्रेस

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