बुआ-भतीजे के रिश्ते को किस ओर लेकर जायेगा राज्यसभा चुनाव?

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के दोनों प्रत्याशियों ने बसपा के सहयोग से जीत दर्ज की. इस जीत के बाद यह उम्मीद की जा रही कि अगले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा एक मंच पर होंगे और भाजपा के लिए परेशानी का कारण बनेंगे. इस उम्मीद को पुख्ता करने […]
उत्तर प्रदेश में गोरखपुर और फूलपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के दोनों प्रत्याशियों ने बसपा के सहयोग से जीत दर्ज की. इस जीत के बाद यह उम्मीद की जा रही कि अगले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा एक मंच पर होंगे और भाजपा के लिए परेशानी का कारण बनेंगे. इस उम्मीद को पुख्ता करने के लिए गोरखपुर और फूलपुर के प्रत्याशियों को बधाई देते हुए अखिलेश यादव ने मायावती से यह आग्रह किया था कि वह पुरानी बातों को भूल जायें, क्योंकि कई बार पुरानी बातों को भूलना ही अच्छा होता है. अखिलेश की इस अपील और ‘बुआ’ मायावती के साथ भेंट के बाद उम्मीद और जाग गयी थी, लेकिन आज राज्यसभा चुनाव के दौरान जिस तरह की राजनीति हो रही है, उसने राजनीतिक विशेषज्ञों के माथे पर बल ला दिया है कि क्या बुआ-भतीजा एक साथ आयेंगे? आखिर क्या होगा इनके नव पल्लवित रिश्ते का? क्या यह रिश्ता अच्छे से जमने के पहले ही मृतप्राय हो जायेगा?
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