होम क्वारंटाइन में वृद्ध की मौत, शव में पड़े कीड़े

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 13 Apr 2020 6:44 AM

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बाराबंकी : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आयी है. यहां बढ़नापुर गांव में होम क्वारंटाइन 82 साल के बुजुर्ग की मौत हो गयी. मौत के बाद जब दुर्गंध उठी तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई. पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो शव की दुर्दशा […]

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बाराबंकी : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आयी है. यहां बढ़नापुर गांव में होम क्वारंटाइन 82 साल के बुजुर्ग की मौत हो गयी. मौत के बाद जब दुर्गंध उठी तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई. पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो शव की दुर्दशा देख सभी की रूह कांप उठी. बुजुर्ग के शव में कीड़े पड़ गये थे. फर्श, घर की दीवारों पर कीड़े रेंग रहे थे. कोरोना जांच के लिए सैंपल लेकर शव को दफन कराया गया है. गांव को सील कर दिया गया है.22 मार्च को क्वारैंटाइन किया गया था बुजुर्गथाना मोहम्मदपुर खाला इलाके के गांव बढ़नापुर निवासी एक 82 वर्षीय बुजुर्ग गुजरात से अपने गांव आया था. प्रशासन ने 22 मार्च को उसे होम क्वारैंटाइन किया. उसके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी गयी. 4 अप्रैल को घर के बाहर आशा कार्यकत्री ने नोटिस चिपका दिया कि, कोई भी इस घर के भीतर प्रवेश न करे. यह कोरोना के संदिग्ध का घर है. बुजुर्ग का परिवार गुजरात में था. अकेले होने के कारण खुद ही खाना बनाते थे.

शनिवार को उसके घर से लोगों को दुर्गंध महसूस हुई. इसकी सूचना प्रशासन को दी गयी. ग्रामीणों ने कहा- दुर्गंध इतनी तेज थी, घर के बाहर भी लोगों का खड़ा होना मुश्किल हो रहा था. पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के लोग पहुंचे तो देखा गया कि, बुजुर्ग का अकड़ा मृत शरीर पड़ा था. शव पर कीड़े रेंगते दिखायी दिये. इसके चलते अंदेशा है कि, बुजुर्ग की मौत कई दिनों पहले हो चुकी थी. प्रशासन ने बिना पोस्टमार्टम कराये शव को दफन करा दिया है.प्रधान को अफसोस, बोले- काम में उलझा था, नहीं दे पाया ध्यानगांव की आशा बहू ने कहा- 22 मार्च को क्वारंटाइन किये जाने के वक्त वह बुजुर्ग के घर आयी थी. उसके बाद 4 अप्रैल को नोटिस चिपकाने आयी थी. इस दौरान उन्हें किसी अनहोनी की भनक भी नहीं लगी. महिला ग्राम प्रधान के पति महेन्द्र वर्मा ने कहा- मृतक अपने पौत्र के साथ गुजरात से गांव आया था, क्योंकि इसके प्रपौत्र का मुंडन था.

पौत्र बाराबंकी शहर में रहता है. एक अप्रैल को बुजुर्ग राशन भी लेकर गये थे. 4 अप्रैल को बेलहरा के डॉक्टर बृजेश के यहां से अपनी दवा भी लेकर आये थे, क्योंकि वह अस्थमा का मरीज था. अब इनकी मृत्यु कब हुई? यह बता पाना संभव नहीं है. अपनी लापरवाही मानते हुए महेन्द्र वर्मा कहते है कि वह पिछले कई दिनों से दूसरे कामों में उलझे हुए थे इसी कारण मृतक की ओर ध्यान नहीं दे पाये.सीएमओ ने दिया गैर जिम्मेदाराना जवाबमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर रमेश चन्द्रा ने कहा- आशा बहू जाती रही होगी और बाहर से हालचाल जानकर वापस हो जाती होगी. कीड़े पड़ने के लक्षणों के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है. उसको कोरोना के कहीं लक्षण नहीं थे, फिर भी हमने उसका सैंपल लेकर भेज दिया है. जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कह पाना संभव होगा.

जब सीएमओ से यह पूछा गया कि अगर उसे इस दौरान मेडिकल टीम देखती तो उसकी ऐसी भयावह मृत्यु न होती तो इस पर उन्होंने बात काटते हुए कहा कि होम क्वारैंटाइन का अर्थ यह नहीं होता कि हम उसे रोज देखें. बल्कि संस्थागत क्वारंटाइन में मरीज हर समय डॉक्टरों की देखरेख में रहता है. होम क्वारंटाइन में हमें सिर्फ इतना देखना होता है कि वह 14 दिनों तक किसी से मिले न और वह घर बाहर निकले न बस.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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