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UP : यूपी जल निगम भर्ती मामले में आजम खां की जमानत अर्जी खारिज, कोर्ट ने की यह ट‍िप्‍पणी

पूर्व मंत्री आजम खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से झटका लगा है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी जल निगम भर्ती मामले में आजम खां की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
आजम खां को हाईकोर्ट से झटका
आजम खां को हाईकोर्ट से झटका
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Jal Nigam Recruitment Scam: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने जल निगम भर्ती घोटाले में पूर्व मंत्री आजम खान की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने सपा शासन के दौरान जल निगम में करीब 1300 पदों पर हुई भर्ती घोटाला मामले में पूर्व मंत्री और रामपुर संसदीय क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद मोहम्मद आजम खान की जमानत याचिका खारिज कर दी. सीबीआई स्पेशल कोर्ट विशेष जज मनोज पांडेय ने अभियुक्त के अपराध को गंभीर करार दिया है.

इस भर्ती घोटाले के दौरान आजम खान उप्र जल निगम के अध्यक्ष थे. बीते 25 अप्रैल 2018 को पूर्व मंत्री आजम खान, जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आसुदानी, नगर विकास के पूर्व सचिव एसपी सिंह, आजम खान के तत्कालीन ओएसडी सैयद आफाक अहमद और तत्कालीन चीफ इंजीनियर अनिल कुमार खरे समेत अन्य के खिलाफ गबन, धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, सबूत मिटाने और एंटी करप्शन एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी.

इस दौरान असआईटी ने सभी के खिुलाफ एक चार्जशीट भी दाखिल की थी. जिसके बाद 15 जुलाई को सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने मामले में अभियुक्त आजम खान और गिरीश चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ आईपीसी की धारा 201, 204, 420 ,467, 468, 471, 120बी और एंटी करप्शन एक्ट की धारा 13 के तहत संज्ञान लिया था.

अदालत की ओर से अभियुक्तों पर मनचाहे अभ्यर्थियों का चयन कराने के लिए एक साजिश के तहत मनचाही संस्था मेसर्स एपटेक लिमिटेड का चयन कराने, दों पर भर्ती में एपटेक व उप्र जलनिगम के मध्य हुए अनुबंध का भी उल्लघंन, परीक्षा सम्पन्न होने के बाद उत्तर कूंजी आनलाइन प्रदर्शित नहीं होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया जारी रखना, परीक्षा के प्राइमरी डाटा को क्लाउड सर्वर से डिलीट कराकर मूल्यवान साक्ष्य को नष्ट करवाने, परीक्षा परिणाम के मूल सीबीटी अंक बढ़वाकर अपात्र अभ्यर्थियों का चयन करवाते सहित कई अन्य आरोप है.

बता दें कि आजम खां के खिलाफ सपा सरकार में जल निगम में 1300 पदों पर हुई भर्तियों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगा हुआ है. 2017 में योगी सरकार के बनने के बाद मामले की जांच एसआईटी को सौंपी गई थी. एसआईटी ने 22 सितंबर 2017 को जल निगम मुख्यालय में छापा मारकर भर्ती से जुड़े तमाम मूल दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे. जिसके बाद 29 मार्च 2018 को एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट भेजकर मामले में एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की थी.

Posted By Ashish Lata

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