सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने महिला के वीडियो से बदनाम करने का किया था जिक्र, एसआईटी करेगी जांच
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Sep 2021 10:47 AM
महंत नरेंद्र गिरि ने अपने कथित सुसाइड नोट में शिष्य आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरी का नाम लेते हुए लिखा है कि वो गलत काम करते हुए मेरी फोटो को वायरल कर देगा.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व श्रीमठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि की संदेहास्पद मौत के मामले में चौंकाने वाली बात सामने आयी है. 8 पन्नों के अपने सुसाइड नोट में उन्होंने कई बातों का जिक्र किया है. नोट में उन्होंने एक फोटो का भी जिक्र किया है. उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरी का नाम लेते हुए लिखा है कि वो गलत काम करते हुए मेरी फोटो को वायरल कर देगा. ऐसे में मैं किस किस को सफाई देता रहूंगा. वहीं अब इस मामले की जांच एसआईटी करेगी.
महंत नरेंद्र गिरि ने अपने कथित सुसाइड नोट में शिष्य आनंद गिरि, बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है. सोशल मीडिया पर वायरल सुसाइड नोट में महंत ने लिखा है, ‘मैं बहुत दुखी होकर आत्महत्या कर रहा हूं. मेरी मौत की जिम्मेदारी आनंद गिरि, आद्या प्रसाद तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी की होगी.’
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का लंबे समय से आनंद गिरि से विवाद चल रहा था. आनंद गिरि ने आरोप लगाया था कि 2012 में नरेंद्र गिरि ने गद्दी की आठ बीघा जमीन सपा के तत्कालीन विधायक को 40 करोड़ रुपये में बेच दी थी और पैसे को रिश्तेदारों को दे दिया था. हालांकि, नरेंद्र गिरि ने कहा था कि वह जमीन का हिसाब कोर्ट को दे दिये हैं.
आनंद गिरि ने ये भी दावा किया था कि 2015 में उसे बाघंबरी गद्दी का उत्तराधिकारी बनाया गया और 2012 में वसीयत की गयी थी. फिर उसे निरस्त कर दिया गया था. वसीयत को लेकर आनंद गिरि और महंत नरेंद्र गिरि में काफी दिनों तक विवाद चला था. 2018 में ऑस्ट्रेलिया में महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप में फंसे आनंद गिरि ने आरोप लगाया था कि उन्हें छुड़ाने के नाम पर नरेंद्र गिरि ने चार करोड़ रुपये वसूले थे. इसके बाद, नरेंद्र गिरि ने पीएम मोदी और सीएम योगी को चिट्ठी लिख कर जान को खतरा बताया था.
नरेंद्र गिरि 300 साल पुरानी बाघंबरी गद्दी के महंत थे. वह श्री पंचायती तपोनिधि निरंजन अखाड़े के महंत व सचिव भी थे. बताया जा रहा है कि बाघंबरी मठ के पास अरबों रुपये की संपत्ति है. मठ के पास प्रयागराज और नोएडा में करोड़ों की जमीन है. इसके अलावा, मठ और बड़े हनुमान मंदिर से भी आमदनी होती है.
सुसाइड नोट में गिरि ने लिखा है, ‘बलवीर गिरि, मैंने तुम्हारे नाम एक रजिस्ट्री वसीयत की है, जिसमें मेरे ब्रह्मलीन हो जाने के बाद तुम बड़े हनुमान मंदिर एवं मठ बाघंबरी गद्दी के महंत बनोगे. मेरी समाधि पार्क में नींबू के पेड़ के पास दी जाये. यही मेरी अंतिम इच्छा है. धनंजय मेरे कमरे की चाबी बलवीर को दे देना.’
Posted by: Pritish Sahay
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