अलीगढ़ में कौन था मुलायम सिंह का बड़ा भाई, जिसने मुश्किल वक्त में दिया साथ, चुनाव हारे तो बनवाया MLC

Mulayam Singh Yadav Death: गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती मुलायम सिंह यादव का आज उपचार के दौरान निधन हो गया. बीते कई दिनों से उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई थी, उनकी तबीयत में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था. कल पैतृक गांव सैफई में शाम 3 बजे उनका अंतिम संस्कार होगा.
दिवंगत मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का अलीगढ़ से खास लगाव था. अलीगढ़ में एक शख्सियत ऐसी थी, जिसे वह अपने बड़े भाई का दर्जा देते थे, उनकी पत्नी को बहन मानते थे. उसी शख्सियत ने मुलायम सिंह यादव को विधानसभा चुनाव हार जाने के बाद विधान परिषद सदस्य और विधान परिषद के विपक्ष का नेता भी बनवाया था.
अलीगढ़ की इगलास तहसील के गांव कजरोठ में स्वतंत्र सेनानी और 2 बार विधायक रहे ठाकुर शिवदान सिंह के पुत्र व पूर्व कृषि मंत्री चौधरी राजेन्द्र सिंह से मुलायम सिंह यादव का खास रिश्ता था. मुलायम सिंह यादव, चौधरी राजेंद्र सिंह को अपना बड़ा भाई मानते थे, उनकी पत्नी सरोज सिंह को बहन मानकर राखी बंधवाते थे. यादव, चौधरी राजेंद्र सिंह के अलीगढ़ और लखनऊ स्थित आवास पर अधिकतर आते-जाते रहते थे और रुकते भी थे. मुलायम सिंह यादव ने चौधरी राजेंद्र सिंह के पुत्र दिलीप सिंह व सुनील सिंह को गोद में भी खिलाया है.
साल 1980 में कांग्रेस की सरकार में मुलायम सिंह राज्य मंत्री थे, फिर चौधरी चरण सिंह के लोकदल के अध्यक्ष बने. उसके बाद मुलायम सिंह विधानसभा चुनाव हार गए थे. 1982-85 में चौधरी राजेंद्र सिंह ने ही मुलायम सिंह को विधान परिषद सदस्य बनवाया था, साथ ही उन्हें विधान परिषद का नेता विपक्ष भी बनवाया. चौधरी राजेंद्र सिंह ने मुलायम सिंह यादव को हमेशा सहारा दिया. 1977 में जब जनता पार्टी सरकार बनी, तो उसमें राजेन्द्र सिंह कृषि व सिंचाई मंत्री बने. राजेन्द्र सिंह ने अपने घनिष्ठ मित्र मुलायम सिंह यादव को सहकारिता मंत्री बनाया था.
दरअसल, साल 1989 में इगलास विधानसभा के चुनाव में चौधरी राजेंद्र सिंह 64 वोट से हार गए. उस समय जनता दल में दो धड़े थे. एक मुलायम सिंह को प्रदेश का मुख्यमंत्री, तो दूसरा चौधरी अजित सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था. राजेंद्र सिंह के हार जाने के बाद अजित सिंह के धड़े को झटका लगा. अजित सिंह ने राजेंद्र सिंह को लखनऊ पहुंचने और निर्वाचित विधायकों को एकत्रित करने के लिए कहा, तो राजेंद्र सिंह ने कहा कि वह चुनाव हार चुके हैं.
ऐसी स्थिति में आपका लखनऊ पहुंचना जरूरी है. चौधरी अजित सिंह मुख्यमंत्री पद के लिए होने वाले शक्ति परीक्षण वाले दिन ही लखनऊ पहुंच सके, जो मुलायम सिंह यादव के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ और 5 दिसम्बर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक के लिए मुलायम सिंह पहली बार मुख्यमंत्री बने.
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By Sohit Kumar
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