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सांसद वरुण गांधी ने अपनी ही पार्टी पर फि‍र किया प्रहार, रेलवे में घटतीं नौकरियों को लेकर पूछा सवाल

BJP सांसद ने लिखा, 'विगत 6 वर्षों में तृतीय-चतुर्थ श्रेणी में 72000 हजार पद समाप्त कर चुका रेलवे अब NCR जोन के 10000 पदों को भी समाप्त करने जा रहा है. समाप्त होती हर नौकरी रेलवे की तैयारी कर रहे करोड़ों युवाओं की उम्मीदें तोड़ रही है. यह ‘वित्तीय प्रबंधन’ है या ‘निजीकरण’ की तरफ बढ़ाया जा रहा कदम?'

By Prabhat Khabar Digital Desk, Lucknow
Updated Date
पीलीभीत सांसद वरुण गांधी
पीलीभीत सांसद वरुण गांधी
फोटो : ट्विटर.

Varun Gandhi Twitter News: भारतीय जनता पार्टी के पीलीभीत संसदीय सीट से सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर अपनी पार्टी की सरकार के खिलाफ हल्‍ला बोल दिया है. उन्‍होंने इस बार बेरोजगारी को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है. उन्‍होंने रेलवे में समाप्‍त हो रहे 72000 हजार पदों को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा है, यह ‘वित्तीय प्रबंधन’ है या ‘निजीकरण’ की तरफ बढ़ाया जा रहा कदम?

आए दिन अपनी सरकार पर उठाते हैं सवाल

पीलीभीत संसदीय सीट से बीजेपी सांसद वरुण गांधी के आध‍िकार‍िक ट्वीटर अकाउंट से लिखा है, 'विगत 6 वर्षों में तृतीय-चतुर्थ श्रेणी में 72000 हजार पद समाप्त कर चुका रेलवे अब NCR जोन के 10000 पदों को भी समाप्त करने जा रहा है. समाप्त होती हर नौकरी रेलवे की तैयारी कर रहे करोड़ों युवाओं की उम्मीदें तोड़ रही हैं. यह ‘वित्तीय प्रबंधन’ है या ‘निजीकरण’ की तरफ बढ़ाया जा रहा कदम?'

वरुण गांधी ने किया ट्वीट
वरुण गांधी ने किया ट्वीट
Screenshot

कुछ दिन पहले भी किया था हमला 

वरुण गांधी आए दिन सरकार के लिए मुसीबत बढ़ाने वाले ट्वीट करते ही रहते हैं. उन्‍होंने हाल ही में दो ट्वीट किए थे. बीजेपी सरकार पर प्रहार करते हुए उन्‍होंने लिखा था, 'अपने कंधों पर पूरे परिवार की उम्मीदों का बोझ लेकर चलने वाले प्रतियोगी छात्रों का जीवन विगत कुछ वर्षों से एक लंबे संघर्ष की दास्तां बन चुका है. छात्र अब सिर्फ ‘पढ़ाई’ नहीं करता, अपने हक की ‘लड़ाई’ भी स्वयं लड़ता है. अरसों से लटकी भर्तियां और रेत की तरह फिसलता वक्त, छात्र हताश है.' उन्होंने इसके आगे लिखा था, 'बिना कारण रिक्त पड़े पद, लीक होते पेपर, सिस्टम पर हावी होता शिक्षा माफिया, कोर्ट-कचहरी व टूटती उम्मीद. छात्र अब प्रशासनिक अक्षमता की कीमत भी स्वयं चुका रहा है. चयन सेवा आयोग कैसे बेहतर हो, परीक्षाएं कैसे पारदर्शी एवं समय पर हों, इस पर आज और अभी से काम करना होगा. कहीं देर ना हो जाए.'

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