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Varanasi: विदेश मंत्री एस. जयशंकर बोले- मंदिरों के संरक्षण से विश्व को साथ लाने में मिली मदद

Updated at : 11 Dec 2022 4:10 PM (IST)
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Varanasi: विदेश मंत्री एस. जयशंकर बोले- मंदिरों के संरक्षण से विश्व को साथ लाने में मिली मदद

विदेश मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंदिरों के संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाये गए हैं. नेपाल, चीन, भूटान, कम्बोडिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ही नहीं बल्कि अमेरिका में हजार से अधिक मंदिर आज मौजूद हैं.

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Varanasi: विदेश मंत्री एस. जयशंकर रविवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में आयोजित संगोष्ठी में सम्मिलित हुए. उन्होंने कहा कि मंदिरों के विश्व स्तर पर संरक्षण की जरूरत है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है कि भारतीयों की आस्था को सशक्त किया जाए. उन्होंने कहा कि भारतीय हेरिटेज का पुनर्निर्माण और साज-संवार विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं के संरक्षण के लिए भी जरूरी है. एएसआई इसके लिए निरंतर सक्रिय है.

रामायण सर्किट के जरिये जोड़े गये त्रेतायुगीन स्थल

विदेश मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंदिरों के संरक्षण के लिए जरूरी कदम उठाये गए हैं. नेपाल, चीन, भूटान, कम्बोडिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ही नहीं बल्कि अमेरिका में हजार से अधिक मंदिर आज मौजूद हैं. रामायण सर्किट के जरिये त्रेतायुगीन स्थलों को जोड़ा गया है. अंकोरवाट मंदिर कम्बोडिया का विश्व विख्यात मंदिर है। वहां आज पुनर्निर्माण कर उसे संरक्षित और विस्तृत कर पर्यटकों-आस्थावानों को आकर्षित किया जा रहा है. सऊदी अरब जैसे देश में मंदिर की स्थापना ग्लोबल विलेज की संकल्पना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

भारतीयों की आस्था को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध

उन्होंने कहा कि मंदिरों के विश्व स्तर पर संरक्षण की जरूरत है और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है कि भारतीयों की आस्था को सशक्त किया जाए. कोरिया से अयोध्या का रिश्ता आज दोनों देशों के बीच बड़ा संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहा है. असल में मंदिरों के पुनरोत्थान, संरक्षण से सिर्फ हिन्दू धर्म ही नहीं बल्कि विश्व भर को साथ लाने में मदद भी मिली है. इससे कारोबार ही नहीं बल्कि संस्कृति और आपसी सम्बन्धों को भी मजबूती मिली है.

हस्तकला संकुल का किया मुआयना

विदेश मंत्री ने वाराणसी में प्रस्तावित जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए बड़ालालपुर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय सांस्कृतिक हस्तकला संकुल का मुआयना किया. सम्मेलन के लिए इस स्थान को लेकर उन्होंने अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए.

हर राज्य व 55 शहरों में होंगे जी-20 शिखर सम्मेलन

विदेश मंत्री ने बताया कि जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत को मिली है. इसे जश्न की तरह मनाया जाएगा. हर राज्य में कार्यक्रम किए जाएंगे. अलग-अलग सम्मेलन के लिए स्थलों का चयन होना है. विदेश मंत्रालय की टीम रिपोर्ट बना रही है. कुछ स्थलों को हमने भी देखा है. काशी का अपना विशेष महत्व है. काशी में भी शिखर सम्मेलन होगा. इसकी तैयारी चल रही है. देश के हर राज्य व 55 शहरों में जी-20 शिखर सम्मेलन होंगे. काशी में दुनिया के विकास मंत्रियों का सम्मेलन होना है. इसकी अध्यक्षता खुद ही करेंगे.

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महाकवि सुब्रह्मण्यम भारती के घर पहुंचे

इससे पूर्व विदेश मंत्री रविवार को तमिल महाकवि सुब्रमण्यम भारती के हनुमानघाट स्थित आवास पर पहुंचे. यहां उन्होंने महाकवि के भांजे के वी कृष्णन से भेंट की और कुशलक्षेम पूछा. परिवार से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री ने कहा कि अब तक के सबसे महान तमिल साहित्यकारों में से एक, महाकवि भारती का काशी हनुमान घाट स्थित घर एक ज्ञान केंद्र और पावन तीर्थ है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और महिला सशक्तीकरण पर सुब्रमण्यम भारती की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं. काशी में ही भारती जी का परिचय अध्यात्म और राष्ट्रवाद से हुआ. महाकवि के व्यक्तित्व पर काशी ने गहरा प्रभाव छोड़ा.

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