International Yoga Day 2022: वाराणसी की पुष्पांजलि शर्मा योग को दे रहीं नए आयाम, शिष्य बने 'खास से आम'
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Jun 2022 6:50 AM
ऐसे में उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में योग दिवस को लेकर लोगों के अंदर काफी उत्साह देखने को मिलता है. मगर आज से 12 साल पहले तक यहां योग के प्रति इतनी जागरूकता नहीं थी. योगासन से लोगों को जोड़ने का बीड़ा उठाया था महिला योग गुरु पुष्पांजलि ने.
International Yoga Day 2022: आज अंतररराष्ट्रीय योग दिवस है. हर साल 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है. पीएम नरेंद्र मोदी का भी योग के प्रति रुझान जगजाहिर है. ऐसे में उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में योग दिवस को लेकर लोगों के अंदर काफी उत्साह देखने को मिलता है. मगर आज से 12 साल पहले तक यहां योग के प्रति इतनी जागरूकता नहीं थी. योगासन से लोगों को जोड़ने का बीड़ा उठाया था महिला योग गुरु पुष्पांजलि ने. इस महिला योग गुरु ने समाज की भलाई के लिए आईएएस की तैयारी छोड़कर योग गुरु बनने का फैसला किया था.
पुष्पांजलि शर्मा के जीवन से जुड़ी कई ऐसी दिलचस्प संघर्ष की कहानियां हैं जो दूसरों के लिए प्रेरणादायी हैं. वह आईएएस बनकर देश की सेवा करना चाहती थीं. मगर अब वह काशी में बेस्ट महिला फिजियो ट्रेनर और योग स्पेशलिस्ट हैं. उन्होंने बताया कि सास (मदर इन लॉ) की कैंसर की बीमारी ने उन्हें जीना सिखाया. उन्होंने योग के दम पर शादी के 16 साल बाद भी फिटनेस को बरकरार रखा. कई मशहूर राजनीतिक हस्तियों और फिल्मी स्टार को योग सीखा चुकी पुष्पांजलि ने वाराणसी जिले के ग्रामीण इलाकों में भी लोगों के अंदर योग के प्रति अलख जगाने के लिए बहुत मेहनत की है. वे गांव में बच्चों, लड़कियों और महिलाओं को फ्री कैंप लगाकर इसकी ट्रेनिंग देती हैं.




पुष्पांजलि अपने बारे में बताते हुए कहती हैं, ‘मेरे पिता कल्पनाथ राय बिहार में पुलिसकर्मी थे. मेरी इंटर तक की पढ़ाई सासाराम में हुई. 10 मार्च 1999 को जौनपुर के रहने वाले अजय कुमार शर्मा से मेरी शादी हो गई. इसके बाद हम दोनों बनारस के बड़ा लालपुर में रहने लगे.’ पुष्पांजलि ने कहा कि पति और सास की मदद से 10 अप्रैल 1999 को उन्होंने बीए फर्स्ट ईयर का एग्जाम दिया. बीए और एमए की पढ़ाई गोरखपुर से पूरी की. उनके मुताबिक, अजय भी गोरखपुर के एसबीएस कॉलेज में शिक्षक के पद पर कार्यरत हो गए. साल 2003 में उनकी सास की हालत खराब हो गई. चार महीने तक वह बीएचयू स्थित सुंदरलाल अस्पताल में कैंसर डिपार्टमेंट में रहीं. यहां लोगों को तड़पते देखा तो उसी दौरान मन में ठान लिया कि लोगों को स्वस्थ करना है. इसके बाद ही लोगों को योग सिखाना शुरू कर दिया.



पुष्पांजलि ने बताया कि एक संस्था की सहायता से वह उन बच्चों को योग की ट्रेनिंग देती हैं, जो समाज में भटक गए हैं. बाल संप्रेषण गृह में वह बच्चों को योग टिप्स देती हैं. इससे बच्चे स्वस्थ रहकर जीवन को खुशहाल बना सकें. साथ ही, गांव के बच्चों को कैंप लगाकर योग करना और उसके लाभों को बताना शुरू किया. उनका कहना है कि जब इंसान स्वस्थ और खुशहाल रहेगा तभी समाज सुंदर होगा. योग तन और मन दोनों को खूबसूरत बनाता है. वहीं, ग्रामीण महिलाओं को भी योग सिखाने के बारे में सोचा जो काफी विरोध के बाद पूरा हुआ.




पुष्पांजलि ने एक सवाल के जवाब में कहा कि लोगों के अंदर योगा को लेकर जागरूकता नहीं है. हम लोग स्लोगन बोलते हैं, ‘योग से होगा लेकिन एकदिन से कुछ नहीं होगा.’ यहां के लोग सिर्फ योग दि वस दिन पर ही एक्टिव दिखते हैं योगा के प्रति और बाकी दिन कुछ गतिविधि नहीं करते. वहीं, विदेशियों के अंदर वह योग को लेकर ज्यादा जागरूकता पाती हैं. उन्होंने कहा, ‘जब मैंने अपना योग स्टूडियो शुरू किया था तो देखा कि विदेशी लोगों के अंदर योग की जिज्ञासा और जानकारी ज्यादा है. एक-एक पॉइंट को लेकर उन्हें ज्ञान है कि कब क्या करना चाहिए. बनारस में लोग योग के नाम पर बाबा रामदेव और श्री रविशंकर के अलावा किसी को नहीं जानते हैं जबकि दुर्भाग्य की बात है कि महर्षि पतंजलि जो कि इतने बड़े योगी हैं वह भी बनारस के ही हैं. करपात्री महाराज ने भी योग को पूरी दुनिया में प्रचारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
योगगुरू पुष्पांजलि बताती हैं, ‘जब मैं 2010 में लोगों के बीच आकर योग सीखना चाहती थी तब योग के प्रति लोगों को जागरूक करना इतना आसान नहीं था. उस वक्त गांव-गांव में जाकर लोगों को इकठ्ठा कर उन्हें योग के बारे में समझाती थी. इसके फायदे बताती थी. ग्राम प्रधान से संपर्क कर इसके लिए चटाई और बैठने के स्थान की व्यवस्था करती थी. लड़कियों और महिलाओं के पास पहनने के लिए ढंग के कपड़े तक नहीं रहते थे. ऐसी स्थिति में सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से लोवर-टीशर्ट की व्यवस्था करती थी.’ उन्होंने कहा कि गांव के लोग बड़े सीधे सज्जन होते थे. हर चीज को उन्होंने नियमानुसार अनुसरण किया. ये बात उनकी काफी अच्छी थी जबकि शहर के लोग आसानी से बातों को नहीं सुनते थे. इन सब चीजों की पब्लिसिटी वह शहर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करना शुरू किया.
उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि साल 2012 से 2013 के बीच की बात है कि तब केवल फेसबुक-वाट्सअप था. इसके माध्यम से वह लोगों को जागरूक किया करती थीं. सबसे ज्यादा प्रभाव तब पड़ा जब फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप और अभिनेता डिनो मोरिया ने शहर के लोगों से अपील करते हुए उनके काम की तारीफ की. यहां तक कि कुछ समय तक उन्होंने अभिनेता डीनो मोरिया को योग की ट्रेनिंग भी दी. वह बताती हैं कि उन्होंने योग को अच्छी तरह से जानने के लिए केरल, मैसूर, कर्नाटक, बेंगलुरु और हैदराबाद तक जाकर योग की ट्रेनिंग ली. योग की नई-नई विधाएं सीखकर लोगों का और अच्छे तरह से इलाज करने की कोशिश की.
उन्होंने कहा, ‘मैं अब तक वाराणसी जिले में लगभग 50 हजार लोगों को योग सीखा चुकी हूं. इसमें राजनीतिक हस्तियां भी शामिल हैं. इनमे पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली, पूर्व मंत्री स्वाति सिंह तक हैं. वहीं, फिल्मी दुनिया की हस्तियों में अनुराग कश्यप, डिनो मोरिया, राजकुमार संतोषी, अनूप सोनी, सुखविंदर सिंह सरीखे कई नामी सितारों के नाम शामिल हैं. विदेशियों को योग सिखाने के लिए वह जर्मनी तक जा चुकी हैं. पुष्पांजलि ने बताया कि वह होटल ताज में आने वाले विदेशी पर्यटकों को योग सिखाती हैं. इसके अलावा अमेरिका, पुर्तगाल और ब्रिटेन के पर्यटकों का भी योग के प्रति रुझान है. उनके मुताबिक, विदेशी मन की शांति के साथ तन की सुंदरता को निखारना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं हर साल योग दिवस 21 जून के अवसर पर किसी न किसी गांव में शिविर लगाती हूं. जहां पहले 10 महिलाएं आती थीं, वहां अब 50 की संख्या है. मैं देख रही हूं महिलाओं के अंदर योग को लेकर जागरूकता बढ़ती जा रही है. योगा शिविर कैम्प में मैं सुबह साढ़े 4 बजे वह आती हूं. स्वास्थ्य संबंधी जितनी भी समस्याएं होती हैं, उनके निदान के लिए वह योग करती हैं. जैसे ही उन्हें लाभ मिलता है वह अपने आस-पास की उस समस्या से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी लेकर आती हैं.
स्पेशल रिपोर्ट : विपिन सिंह
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