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बिजली विभाग के अफसर यदि आपकी नहीं सुन रहे हैं तो खुश हो जाइए...अब जितनी देरी होगी उतना 'मुनाफा' मिलेगा

तय सीमा के अंदर अगर उपभोक्ताओं को योजना का लाभ नहीं मिला तो दंड के तौर पर पॉवर कॉर्पोरेशन उनको मुआवजा देगा. यह व्यवस्था पहले भी थी मगर ऑफलाइन सिस्टम होने की वजह से इंजीनियर उपभोक्ताओं को दौड़ाते रहते थे. अब इसको ऑनलाइन किया जा रहा है.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Lucknow
Updated Date
सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.
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UPPCL News: बिजली विभाग के अधिकारी यदि आपकी दिक्कतों का समाधान नहीं करते हैं. वे यदि आपकी एप्लीकेशन को इधर-उधर घुमाते रहता है तो यह आपके अच्छी खबर है. दरअसल, बिजली विभाग के ऐसे ही अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए एक आदेश जारी किया गया है. तय समय सीमा में समस्या का समाधान नहीं होने पर मुआवजा कानून के तहत निर्धारित प्रतिदिन के आधार पर उपभोक्ता मुआवजा पाने का हकदार होगा.

अब नहीं छुप पाएगी कारगुजारी

जानकारी के मुताबिक, तय सीमा के अंदर अगर उपभोक्ताओं को योजना का लाभ नहीं मिला तो दंड के तौर पर पॉवर कॉर्पोरेशन उनको मुआवजा देगा. यह व्यवस्था पहले भी थी मगर ऑफलाइन सिस्टम होने की वजह से इंजीनियर उपभोक्ताओं को दौड़ाते रहते थे. अब इसको ऑनलाइन किया जा रहा है. ऐसे में उनकी लेटलतीफी अब ऑनलाइन शो होगी. जाहिर है, उनकी कारगुजारी अब छुप नहीं पाएगी.

अप्रैल के अंत में मिलने लगेगा मुआवजा

तय समय सीमा में समस्या का समाधान नहीं होने पर मुआवजा कानून के तहत निर्धारित प्रतिदिन के आधार पर उपभोक्ता मुआवजा पाने का अधिकारी होगा. शिकायतों का समाधान नहीं होने पर मुआवजे की दर 50 से लेकर 250 रुपये प्रतिदिन तक हो सकती है. इसमें उपभोक्ता को अधिकतम 30 हजार रुपये तक का मुआवजा देने का प्रावधान है. अप्रैल के अंत तक उपभोक्ताओं को मुआवजा मिलना शुरू हो जाएगा.

कब बना था मुआवजा देने का कानून?

बिजली विभाग में व्याप्त लापरवाही पर लगाम लगाने के लिए मुआवजा देने के इस कानून को साल 2020 में बनाया गया था. इससे निपटने के लिए साल 2020 में स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन, 2019 मुआवजा कानून बनाया गया था. हालांकि, इस सिस्टम को ऑनलाइन करने में कंपनियों को काफी समय लग गया. दो साल से ग्राहकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था. मगर अब इसका लाभ जल्द ही बिजली उपभोक्ताओं को मिलने लगेगा. नियम के मुताबिक व्यवधान के लिए बिजली कंपनियों को जो मुआवजा देना होगा, वह उपभोक्ता के बिजली बिल में जोड़ दिया जाएगा. इसमें अधिकतम 60 दिन में उपभोक्ता को मुआवजा देना ही होगा.

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