AIMIM चीफ ओवैसी SC के आदेश पर बोले- उम्मीद है जिला जज न्याय करेंगे, सिविल जज ने मुस्लिम पक्ष को नहीं सुना
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 20 May 2022 6:50 PM
AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वुजू की इजाजत दी है. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मिसाल देकर आदेश दिया है. उन्होंने जिला जज को पूरे मामले को सुपुर्द करने के साथ ही कहा कि उम्मीद है कि जिला जज न्याय करेंगे.
Gyanvapi Masjid Dispute: AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश को बरकरार रखा है. सुप्रीम कोर्ट ने वुजू की इजाजत दी है. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मिसाल देकर आदेश दिया है. उन्होंने जिला जज को पूरे मामले को सुपुर्द करने के साथ ही कहा कि उम्मीद है कि जिला जज न्याय करेंगे. सिविल जज ने मुस्लिम पक्ष को नहीं सुना था. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज्ञानवापी प्रकरण पर सुनवाई करते हुए कई अहम फैसले दिए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा सुझाव है कि अगर हमारे अंतरिम आदेश को जारी रखा जाता है, साथ ही डिस्ट्रिक्ट जज को मामले की सुनवाई की अनुमति दी जाती है तो यह सभी पक्षों के हितों की रक्षा करेगा. इस बीच हिंदू पक्ष के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष की दलील का कोई मतलब नहीं है. आयोग की रिपोर्ट पर न्यायालय विचार करे तो उचित होगा. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जब तक जिला जज मामले को सुने हमारा पहले का अंतरिम आदेश जारी रह सकता है. इसमें हमने शिवलिंग को सुरक्षित रखने और नमाज पढ़ने को न रोकने को कहा था. ये सभी पक्षों के हितों की रक्षा करेगा.
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ज्ञानवापी पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़ ने कई बड़ी बातें कहीं…
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उन्होंने कहा कि इसलिए हम सोच रहे थे कि जिला जज मामले की सुनवाई कर सकते हैं. वे जिला न्याय पालिका में सीनियर जज हैं. वे जानते हैं कि आयोग की रिपोर्ट जैसे मुद्दों को कैसे संभालना है?
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हम यह निर्देश नहीं देना चाहते कि जिला जज को क्या करना चाहिए.
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वकीलों से मुलाकात के बाद ऑर्डर 7 के नियम 11 के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जिला न्यायाधीश को ही सुनना चाहिए. जिला जज अनुभवी न्यायिक अधिकारी होते हैं. उनका सुनना सभी पक्षकारों के हित में होगा.
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जिला अदालत को पहले उस पर विचार करने को कहा जाए. हम उनको निर्देश नहीं दे सकते कि कैसे सुनवाई करनी है. उनको अपने हिसाब से कार्यवाही करने दिया जाए.
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सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी मामले में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्षकारों के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि अब तक जो भी आदेश ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए हैं, वे माहौल खराब कर सकते हैं. कमीशन बनाने से लेकर अब तक जो भी आदेश आए हैं, उसके जरिए दूसरे पक्षकार गड़बड़ कर सकते हैं. उन्होंने स्टेटस को यथास्थिति बनाए रखने कहा कि 500 साल से उस स्थान को जैसे इस्तेमाल किया जा रहा था, उसे बरकरार रखा जाए.
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