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रायबरेली में सोनिया गांधी की पांचवीं बार जीत को लेकर कांग्रेस है आश्वस्त, बसपा-सपा ने नहीं दिया उम्मीदवार

Updated at : 06 May 2019 5:47 AM (IST)
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रायबरेली में सोनिया गांधी की पांचवीं बार जीत को लेकर कांग्रेस है आश्वस्त, बसपा-सपा ने नहीं दिया उम्मीदवार

बसपा-सपा ने नहीं दिया उम्मीदवार, भाजपा प्रत्याशी भी पुराने कांग्रेसी 19 बार हुए आम व उप चुनावों में 16 बार कांग्रेस जीती देश की अति महत्वपूर्ण सीटों में शुमार रायबरेली में कांग्रेस नेहरू-गांधी परिवार से वहां के लोगों के सौ साल पुराने रिश्ते की एक बार फिर दुहाई दे रही है. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी […]

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बसपा-सपा ने नहीं दिया उम्मीदवार, भाजपा प्रत्याशी भी पुराने कांग्रेसी
19 बार हुए आम व उप चुनावों में 16 बार कांग्रेस जीती
देश की अति महत्वपूर्ण सीटों में शुमार रायबरेली में कांग्रेस नेहरू-गांधी परिवार से वहां के लोगों के सौ साल पुराने रिश्ते की एक बार फिर दुहाई दे रही है. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी इस सीट पर पांचवीं बार जीत की इबारत लिखने मैदान में हैं. यहां सोमवार को वोट डाले जायेंगे.
सोनिया गांधी ने 11 अप्रैल को नामांकन-पत्र दाखिल करने के बाद पहली बार दो मई को रायबरेली में कदम रखा. इस बार वोटरों से वह सीधा संवाद भी नहीं कर पायी हैं. वह अस्वस्थ हैं. उनकी गैर मौजूदगी में चुनाव प्रचार की कमान बेटी प्रियंका गांधी ने संभाल रखी है. बहरहाल, प्रचार में उतनी सक्रिय न होने के बावजूद लोग सोनिया की जीत तय मान रहे हैं.
सपा-बसपा ने नहीं उतारा है उम्मीदवार भाजपा प्रत्याशी भी दमदार नहीं : सपा-बसपा ने सोनिया के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा है. वहीं, अमेठी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराने के लिए हर संभव कोशिश कर रही भाजपा भी सोनिया के प्रति नरम दिख रही है.
पार्टी ने सोनिया के खिलाफ मजबूत प्रत्याशी नहीं उतारा है. भाजपा ने कांग्रेस से आये विधायक दिनेश प्रताप सिंह को टिकट दिया है. दिनेश दो बार कांग्रेस से विधान परिषद सदस्य रहे हैं और पिछले साल अप्रैल में भाजपा में शामिल हुए थे. उससे पहले वह विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता थे. उन्हें सोनिया का करीबी माना जाता था.
वर्ष 1921 में रायबरेली गये थे पंडित नेहरू
रायबरेली से नेहरू-गांधी परिवार का लगभग सौ साल पुराना नाता है. यही नहीं, सोनिया द्वारा 2004 में पीएम पद ठुकराना और 2006 में लोस से त्यागपत्र देना लोग भूले नहीं हैं. विकास के ढेरों कार्य कराने का श्रेय भी सोनिया को है. गांधी परिवार का रायबरेली से नाता 1921 में जुड़ा. तब नेहरू किसानों पर हुई पुलिस फायरिंग का विरोध करने यहां आये. फिरोज 1952 व 1957 में यहां से सांसद बने.
यहां से हार चुकी हैं इंदिरा
फिरोज के बाद इस क्षेत्र का संसद में प्रतिनिधित्व इंदिरा गांधी ने किया. 1977 में राज नारायण से हार के बाद 1980 में इंदिरा दो जगह से लड़ कर जीतीं. इसके बाद उन्होंने रायबरेली सीट छोड़ दी, जहां उपचुनाव में भतीजे अरुण नेहरू को खड़ा किया. 1996 व 1998 में यहां विपक्ष जीता था, पर 1999 में कांग्रेस के सतीश शर्मा जीते. सोनिया ने भले राजनीति में प्रवेश 1999 में अमेठी सीट से जीत कर की, मगर 2004 में वह रायबरेली आ गयीं.
घर-घर संपर्क कर रहे भाजपा कार्यकर्ता
बछरावां निवासी अध्यापक उमाशंकर त्रिपाठी बताते हैं कि रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की बेटी अदिति के कांग्रेस में शामिल होने और विधायक चुने जाने से दिनेश का परिवार कांग्रेस नेतृत्व से नाराज था. इसी वजह से उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर भाजपा का दामन थामा. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उनके समर्थन में सभा संबोधित कर चुके हैं. हरचंदपुर में वकील शांभवी सिंह कहती हैं कि शहरी इलाकों में भले कांग्रेस दिख रही हो, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जनसंपर्क में लगे हैं. मतगणना के दिन संभव है, वह लोग अचंभित रह जाएं, जो सोनिया के लिए आसान मान रहे हैं.
सोनिया की लगातार धमाकेदार जीत
सोनिया गांधी 2004 से इस सीट पर जीत रही हैं. 2006 में लाभ का पद मामले में सोनिया नेे इस्तीफा दे दिया, उपचुनाव में वह 4.18 लाख वोट से जीतीं. उसके बाद के दो चुनाव साढ़े तीन लाख से अधिक मतों से जीतीं. 2009 में उनके खिलाफ लड़े भाजपा के आरबी सिंह 25 हजार, तो 2014 में उसके अजय अग्रवाल एक लाख वोट बटोर पाये.
कांग्रेस ने लगाया विकास रोकने का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि पिछले 15 वर्ष में सोनिया ने कई बड़े प्रोजेक्ट रायबरेली लाये. कांग्रेस रेल कोच फैक्ट्री, रेल व्हील फैक्ट्री, एम्स, पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट, फूड पार्क, स्पाइस पार्क और मोटर ड्राइविंग कॉलेज जैसी परियोजनाएं गिनाती है़, भाजपा सरकारों ने विकास कार्य ठप कर दिया.
जातीय समीकरण
रायबरेली के 16 लाख मतदाताओं में से आठ लाख आदिवासी, दलित और पिछड़े हैं. लगभग चार लाख मुसलमान हैं. सभी जातियों में गांधी परिवार के लिए बड़ा सम्मान है.
रायबरेली में पिछले चुनावों की स्थिति
पार्टी 2009 2014
कांग्रेस (विजेता) 5.26 लाख 4.81 लाख
बसपा 1.09 लाख 63.6 हजार
भाजपा 25.4 हजार 1.73 लाख
रायबरेली सीट से कौन कितनी बार जीता
कुल आम व उपचुनाव : 19 बार
कांग्रेस : 16 बार : 1952, 1957, 1960 (उपचुनाव), 1962, 1967, 19771, 1980, 1980 (उपचुनाव), 1984, 1989, 1991, 1999, 2004, 2006 (उपचुनाव), 2009, 20014. (इनमें 12 बार गांधी-नेहरू परिवार यहां से जीता).
भाजपा : 02 बार : 1996, 1998
बीएलडी : 01 बार : 1977
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