कुंभ मेले की धांधली उजागर, कैग की रिपोर्ट बनी अखिलेश की मुसीबत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jul 2014 12:25 PM

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-राजेन्द्र कुमार- यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मुसीबतें खत्म नहीं हो रही. अभी वह लोकसभा चुनावों में हुई हार से उबर भी नहीं पाए थे कि भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा बीते वर्ष इलाहाबाद में हुए महाकुंभ को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट उनके लिए समस्या बन गई है. इस रिपोर्ट के अनुसार […]

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-राजेन्द्र कुमार-

यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मुसीबतें खत्म नहीं हो रही. अभी वह लोकसभा चुनावों में हुई हार से उबर भी नहीं पाए थे कि भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा बीते वर्ष इलाहाबाद में हुए महाकुंभ को लेकर तैयार की गई रिपोर्ट उनके लिए समस्या बन गई है.

इस रिपोर्ट के अनुसार इलाहाबाद के कुंभ में पहुंचे श्रद्धालु जब आस्था के संगम में डुबकी लगा रहे थे तब कुंभ मेला प्रशासन का तंत्र भ्रष्टाचार गोते लगा रहा था और सूबे की सरकार ने केंद्र सरकार के पैसे से पूरा मेला निपटा दिया. जबकि अखिलेश सरकार को कुंभ के आयोजन पर 70 फीसदी धनराशि खर्च करनी थी.

कैग की इस रिपोर्ट में कुंभ के आयोजन में हुए भ्रष्टाचार का विस्तार से खुलासा किया गया है. कैग का यह कदम ही मुख्यमंत्री के लिए संकट बन रहा है क्योंकि भाजपा सहित ‍सूबे के अन्य विपक्षी दलों ने कुंभ गे आयोजन में धांधली करने वाले अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. विपक्षी दल यह भी चाहते हैं कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और यूपी के नगर विकास मंत्री आजम खां कैग की इस रिपोर्ट पर सदन में जवाब दें, जनता को बताएं कि कैग ने अपनी रिपोर्ट में कुंभ के आयोजन को लेकर राज्य सरकार की भूमिका पर जो सवाल खडे किए है, उन पर समय से ध्यान क्यों नहीं किया गया. मुख्यमंत्री इसे बच रहे हैं, जिसके चलते कैग की इस रिपोर्ट को लेकर मुख्यमंत्री ने चुप्पी साध ली है.

कुंभ के समूचे आयोजन और उसके लिए कराए गए कार्य तथा उनमें रही खांमियों को लेकर भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक शशिकांत शर्मा ने बीती दो मई को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी. सौ पेंज की इस रिपोर्ट को मंगलवार को सदन के पटल पर रखा गया है. इस रिपोर्ट

में स्पष्ट शब्दों में लिखा गया कि कुंभ के आयोजन में लगे अफसरों ने कागजों में एक ही वक्त में कई मजदूरों को दो-दो जगह काम करते हुए दिखाया. ट्रैक्टरों से कराए गए कार्यों मे भी इसी तरह से धांधली की गई. कैग की पड़ताल में एक नंबर के ट्रैक्टर से एक साथ दो जगह काम कराने का भुगतान किया जाना पाया गया. कैग ने मेले में सड़क चौड़ी करने और सड़क की मरम्मत से लेकर घाटों के निर्माण तथा भीड़ के नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग कराने के काम में घपला पाया. अफसरों और ठेकेदारों के गठजोड़ से सरकार धन को हड़पने के तमाम मामले भी कैग ने पकड़े हैं.

जिसके आधार पर कैग ने माना कि मेले का नियोजन वैज्ञानिक ‍मापदण्डों पर आधारित नहीं था और मेले का वित्तीय प्रबंधन उचित प्रकार से नियोजित नहीं किया गया था. कुंभ मेले की यातायात योजना व्यापक ढंग से नहीं बनायी गई थी और महत्वपूर्ण सूचनाओं को जनता में प्रसारित करने की व्यवस्था का अभाव था. जिसके कारण भीड़ अनियंत्रित थी. कैग की रिपोर्ट के अनुसार इलाहाबाद शहर, कुंभ मेला स्थल, और रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था की गई थी, लेकिन सभी कंट्रोल रूम आपस में जुड़े ही नहीं थे.

इस वजह से रेलवे स्टेशन पर पुलिस को शहर की भीड़ का अनुमान ही नहीं लगा. कैग की रिपोर्ट में कुंभ मेले के लिए खरीदी गई दवाओं में से आधी के उपयोग ना होने पर भी सवाल खड़ा किया गया और कुछ दवाओं के एक्सपायर हो जाने के बाद उन्हें बीमार लोगों को दिए जाने पर आपत्ति जताई गई. मेले के दौरान कल्पवासियों को बीपीएल दर पर राशन उपलब्ध ना कराने और ठेकेदारों को करोड़ों रुपए कर काटे बिना ही देने को भी कैग ने गलत बताया है.

कुंभ मेले के आयोजन मे कदम कदम पर हुए घपलों की सच्चाई को सामने लानी वाली कैग की यह रिपोर्ट अखिलेश सरकार के लिए समस्या बनेगी. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का यह मत है. इसकी वजह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सूबे के नगर विकास मंत्री आजम खां का कुंभ मेले के सफल आयोजन को लेकर किया गया दावा है.

मुख्यमंत्री ने कुंभ मेले के सफल आयोजन के लिए मेला प्रशासन के तमाम अधिकारियों को बधाई ही नहीं दी थी, बल्कि उन्होंने मलाईदार पदों पर तैनात किया था. और उन्होंने कुंभ मेले का सफल आयोजन कैसे किया गया, यह बताने के लिए अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी का निमंत्रण स्वीकार किया था. पर अब कैग ने कुंभ मेले में हुई धांधलियों का पूरा ब्यौरा सरकार को मुहैया करा दिया है.

कैग की इस रिपोर्ट के आधार कुंभ के आयोजन में जो गड़बड़ी और धांधली हुई उसके लिए सरकार को कार्रवाई करनी होगी. विपक्षी‍ दलों के नेता भी यही चाहते हैं कि मुख्यमंत्री कैग की रिपोर्ट पर सदन में चर्चा करें और दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अभी इस मामले में कोई कार्रवाई करने के इच्छुक नहीं है. इसी के तहत सरकार ने बुधवार को भी इस रिपोर्ट पर सदन में कोई चर्चा नहीं की. मुख्यमंत्री भी कैग की इस रिपोर्ट पर कुछ बोलने से बचते रहे. मुख्यमंत्री इस रिपोर्ट को लेकर क्या निर्णय लेंगे यह तो कुछ समय बाद ही पता चलेगा, फिलहाल तो वह इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं.

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कैग रिपोर्ट के मुख्य अंश

** कुंभ के आयोजन के लिए 1,152.2 करोड़ रुपये कुंभ मेला समिति को जारी किए गए.

** 134.83 करोड़ रुपये खर्च नहीं हुए.

** 1,141.63 करोड़ रुपये कुंभ मेले में केंद्र सरकार के खर्च हुए.

** 1,017 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए.

** कुंभ मेले के आयोजन में 10.57 करोड़ रुपये ही राज्य सरकार ने खर्च किए.

नियम के मुताबिक, राज्य सरकार को 70 और केंद्र को 30 प्रतिशत खर्च करना था.

** मेला शुरू होने तक 59 प्रतिशत निर्माण कार्य और 19 प्रतिशत आपूर्ति कार्य पूरे ही नहीं हुए.

** मेला प्रशासन ने 8.72 करोड़ रुपये से दो घाटों का निर्माण कराया जो कुंभ मेले के काम से संबंधित थे ही नहीं

** 111 निर्माण कार्यो में से 81 में तकनीकी स्वीकृति नहीं ली गई.

** सड़कें चौड़ी करने का काम 57.41 करोड़ रुपये और उनकी मरम्मत के 46.88 करोड़ रुपये बिना काम का परीक्षण किए ही दे दिए गए.

** 9.01 करोड़ की सामग्री बिना जरूरत के खरीदी गई.

** मोबिलाइजेशन और मशीनरी के एडवांस भुगतान के अलावा 23 ठेकेदारों को 4.65 करोड़ रुपये सुरक्षित एडवांस दे कर अनुचित लाभ पहुंचाया गया.

** ट्रैक्टरों की लॉगबुक की जांच में पाया गया कि दो ट्रैक्टर एक ही समय में दो स्थानों पर काम कर रहे थे

** 30 मजदूर एक ही समय में दो स्थानों पर लगाए गए दिखाए गए.

** ट्रैक्टरों की आपूर्ति के अनुबंधों में सभी टैक्स शामिल थे. इसके बावजूद दो ठेकेदारों को 1.30 लाख और 3.09 लाख रुपए सेवाकर का अलग से भुगतान किया गया.

** शौचालय की कमी होने की वजह से एक दिन में औसतन 900 लोगों ने एक शौचालय का इस्तेमाल किया. कई स्थानों पर देखा गया कि पुरुष और महिला शौचालयों के बीच विभाजन दीवार नहीं थी.

** 50 फीसदी कल्पवासियों को ही बीपीएल कार्ड उपलब्ध कराए गए. इनको भी राशन कार्ड तब मिले जब मेले की चार पावन तिथियां बीत चुकी थीं. उन्हें कम दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं हो सकी.

** पेयजल के लिए लगाए गए नलों से हर हफ्ते पानी के नमूने लिए जाने थे. 201 में से महज छह नलकूपों के सिर्फ छह नलों से ही नमूने लिए गए.

** स्नान घाटों पर कपड़े बदलने के लिए चेंच रूम नहीं बनाए गए.

** कई पैंटून पुलों पर जल पुलिस और एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं थी.

** टैक्स काटे बिना ठेकेदारों को दिए 3.35 करोड़

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