तालचेर-बिमलागढ़ रेल परियोजना में आयी तेजी, विद्युतीकरण और सुरंग निर्माण का टेंडर जारी
निर्माण कार्य का फाइल फोटो.
रेल मंत्रालय ने तालचेर-बिमलागढ़ रेल परियोजना में एक और बड़ा कदम उठाया है. बिमलागढ़ से महुलडीहा के बीच विद्युतीकरण और बारकोट से महुलडीहा तक सुरंग निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं. भूमि अधिग्रहण में देरी के बावजूद, रेलवे ने मार्च 2029 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य रखा है.
राउरकेला : बहुप्रतीक्षित तालचेर-बिमलागढ़ रेल परियोजना के निर्माण में रेल मंत्रालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है. सुंदरगढ़ जिले के बिमलागढ़ से महुलडीहा के बीच विद्युतीकरण कार्य के लिए 30 करोड़ रुपये की निविदा आमंत्रित की गयी है. इसके साथ ही देवगढ़ जिले के बारकोट से सुंदरगढ़ के महुलडीहा तक 19 किलोमीटर लंबे चुनौतीपूर्ण खंड में निर्माण कार्य के लिए 450 करोड़ रुपये की निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है. इस खंड में एक विशाल सुरंग का निर्माण होना है, जो इस परियोजना का सबसे कठिन हिस्सा माना जा रहा है.
भूमि अधिग्रहण नहीं होने से परियोजना में हुआ विलंब
विभागीय सूत्रों के अनुसार, निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही अगले महीने से काम शुरू हो जायेगा. गौरतलब है कि 2004 में इस परियोजना की लागत 900 करोड़ रुपये आंकी गयी थी, जो 2019 में बढ़कर 1999 करोड़ रुपये हो गयी. परियोजना में देरी की मुख्य वजह भूमि अधिग्रहण रहा है. कुल 2144.028 एकड़ में से 1868.357 एकड़ भूमि का अधिग्रहण हो चुका है, जबकि शेष 275.671 एकड़, जिसमें से अधिकतर देवगढ़ और सुंदरगढ़ जिले में है, वह अभी लंबित है. हालांकि अनुगूल जिले में अधिग्रहण पूरा हो चुका है. रेलवे ने मार्च 2029 तक इस रेल लाइन को पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की समीक्षा
वहीं, दूसरी ओर 149.78 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित तालचेर-बिमलागढ़ नयी ब्रॉड गेज रेलवे लाइन परियोजना की समीक्षा राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ अरविंद कुमार पाढ़ी ने की है. उन्होंने शुक्रवार को लोक सेवा भवन में आयोजित बैठक में भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों के तत्काल समाधान के निर्देश दिये. यह परियोजना 2003-04 में स्वीकृत हुई थी और अनुगूल, देवगढ़ तथा सुंदरगढ़ जिलों से होकर गुजरती है. परियोजना के लिए कुल 2144.028 एकड़ भूमि की आवश्यकता है, जिसमें से अब तक 1868.357 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है. अभी भी 275.671 एकड़ भूमि अधिग्रहण शेष है, जिसमें 202.15 एकड़ निजी भूमि, 13.7 एकड़ वन भूमि और 59.821 एकड़ सरकारी भूमि शामिल है.
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने का निर्देश
डॉ पाढ़ी ने कहा कि परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए शेष भूमि के अधिग्रहण और उसे रेलवे को बिना किसी बाधा के हस्तांतरित करना जरूरी है. बैठक में जानकारी दी गयी कि वन भूमि के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया का पहला चरण और सरकारी भूमि के लिए मंजूरी प्रक्रिया जारी है. समीक्षा बैठक में मुआवजा वितरण, अदालतों में लंबित मामलों और अधिग्रहित भूमि के हस्तांतरण पर भी चर्चा हुई. बैठक में रेलवे समन्वय आयुक्त कौस्तुभ दीप्ता पाणि, देवगढ़ जिलाधीश कविंद्र कुमार साहू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
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