Jharsuguda News: सम्मिलित आदिवासी समाज ने अत्याचार निवारण अधिनियम में बदलाव के फैसले को वापस लेने की मांग की

Updated at : 10 Sep 2025 11:58 PM (IST)
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Jharsuguda News: सम्मिलित आदिवासी समाज ने अत्याचार निवारण अधिनियम में बदलाव के फैसले को वापस लेने की मांग की

Jharsuguda News: सम्मिलित आदिवासी समाज की अत्याचार निवारण पर संगोष्ठी आयोजित हुई. इसमें अधिनियम में बदलाव का विरोध जताया गया.

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Jharsuguda News: बेहरामल स्थित संस्कृति भवन में सम्मिलित आदिवासी समाज की ओर से अत्याचार निवारण पर एक संगोष्ठी दो चरणों में आयोजित की गयी. प्रथम चरण में समाज के सलाहकार रत्नाकर प्रधान महला और त्रिनाथ ग्वाल मुख्य अतिथि, भुवनेश्वर के साहबा केसरी मल्लिक मुख्य वक्ता, लक्ष्मी चरण पाल विशिष्ट अतिथि और द्वितीय चरण में अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड परिषद के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नायक ने बैठक की अध्यक्षता की और सियाराम दास मुख्य अतिथि थे. अभिराम मल्लिक मुख्य वक्ता और एंथनी तिर्की विशिष्ट अतिथि थे.

आदिवासी और दलित समुदायों को नहीं मिलेगा उचित न्याय

इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि राज्य के गृह विभाग की ओर से अत्याचार निवारण अधिनियम पर 30 तारीख को जारी की गयी नोटिस में उस नियम को बदल दिया गया है, जिसके अनुसार अत्याचार के मामलों की जांच पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) द्वारा की जानी है और विशेष अदालत में पेश किया जाना है. साथ ही थाना के प्रभारी निरीक्षक उन्हें अदालत में पेश करेंगे. जिससे अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत आदिवासी और दलित समुदायों की सुरक्षा कमजोर होगी और इस वर्ग के लोगों को उचित न्याय नहीं मिल पायेगा. इसलिए मांग की गयी कि सरकार इस नोटिस को रद्द करे. वर्तमान में, इस उद्देश्य के लिए राज्य में तीन विशेष अदालतें कार्यरत हैं.

30 जिलों में विशेष अदालतें खोलने के लिए सौंपेंगे ज्ञापन

समय पर अत्याचार के मामलों का फैसला करने के लिए 30 जिलों में विशेष अदालतें खोलने की मांग की गयी है. इस संबंध में एक याचिका कल राज्य के 30 जिलाधिकारियों के माध्यम से ओडिशा के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपी जायेगी. गोंडवाना गोंड परिषद के प्रदेश अध्यक्ष श्री नायक ने कहा कि सम्मिलित आदिवासी समाज की ओर से हम जल्द ही अलग-अलग सेमिनार के माध्यम से आदिवासियों और दलितों की जमीन की रक्षा, भाइयों के बीच जमीन का बंटवारा, आदिवासियों की जमीन को खुलेआम बेचने, आइटीडीए आदि मुद्दों पर चर्चा करेंगे और ठोस निर्णय लेकर राष्ट्रपति को मांग सौंपेंगे. विजय दास, किसान नेता सुरेंद्र साहू, आरटीआइ कार्यकर्ता सत्यनारायण राव, सामाजिक कार्यकर्ता अजू बारिक, किसान समाज के जिला अध्यक्ष त्रिलोचन प्रधान, सम्मिलित आदिवासी समाज के सलाहकार प्रभाकर ओराम, महासचिव अशोक कुमार माझी, महासचिव विनोद बिहारी बाग, धर्मेंद्र किसान, गंगाधर भोई, बासुदेव धुरुआ, बीरेन मेराई, राजेश मुंडा, प्रेमानंद विशाल, सेवती बाग, चंद्रमा बरिहा, सरस्वती प्रधान प्रमुख रूप से उपस्थित थे.

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