Rourkela News: प्रथमाष्टमी पर माताओं ने की ज्येष्ठ संतान की वंदना, सुख-समृद्धि का दिया आशीर्वाद
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 23 Nov 2024 11:51 PM
Rourkela News: ओड़िया परिवारों ने शनिवार को प्रथमाष्टमी मनाया. इस दौरान घर के ज्येष्ठ संतान की पूजा-अर्चना की गयी.
Rourkela News: वर्ष के 12 महीने में 13 त्याेहार मनाने की परंपरा ओडिशा में अद्वितीय है. विभिन्न संक्रांति समेत जन्माष्टमी, राधाष्टमी, अशोकाष्टमी की भांति प्रथमाष्टमी भी राज्य के महत्वपूर्ण त्योहारों में एक है. मार्गशीर्ष महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को धूमधाम से प्रथमाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. इसमें ज्येष्ठ संतान की पूजा की जाती है. शनिवार को जहां मंदिरों में पूजापाठ के लिए भीड़ लगी रही, वहीं घरों में ज्येष्ठ संतान को नये पोशाक पहना कर वंदना करे के साथ ही विभिन्न प्रकार के पकवान खिलाये गये. शहर समेत आसपास के ओड़िया परिवारों में परंपरा के अनुसार यह पर्व मनाया गया. प्रथमाष्टमी पर ज्येष्ठ संतान को नये कपड़े पहनाकर माताओं ने वंदना की. साथ ही उनकी सुख-समृद्धि की कामना की गयी. इस प्रथा को पोढ़ुंवा कहा जाता है. इस पर्व में हल्दी पत्ते पर लपेट कर विशेष प्रकार का एंडुरी पीठा भी तैयार किया गया था.
मंदिरों में पूजा को उमड़े श्रद्धालु
विदित हो कि इस पर्व में सामाजिक व पारिवारिक बंधन, अनुशासन, आदर्श बोध समाहित है, क्योंकि पिता के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी ज्येष्ठ संतान पर ही होती है. इस कारण इसे सम्मान देना इस पर्व का मुख्य उद्देश्य होता है. इसके अलावा प्रथमाष्टमी को काल भैरव अष्टमी भी माना जाता है. इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने शनिवार को मंदिरों में जाकर परिवार की सुख-शांति के लिए पूजा-अर्चना की. राउरकेला समेत वेदव्यास, झीरपानी, फर्टिलाइजर, लाठीकटा, बिरमित्रपुर समेत अन्य स्थानों पर भी प्रथमाष्टमी को लेकर ओड़िया परिवारों में उत्सव का माहौल रहा.
हल्दी के पत्ते में बने विशेष पकवान का कराया सेवन
बंडामुंडा में प्रथमाष्टमी का त्योहार शनिवार को धूमधाम से मनाया गया. लोगों ने ज्येष्ठ संतान की पूजा कर विभिन्न प्रकार के पकवानों को सेवन कराया. माताओं ने प्रथमाष्टमी पर ज्येष्ठ संतान को नये कपड़े पहनाकर उनकी वंदना की तथा उनकी सुख-समृद्धि की कामना की. इस पर्व में हल्दी के पत्ते में लपेट कर विशेष पीठा तैयार किया जाता है, जिसे एंडुरी कहा जाता है. पर्व मनानेवाले घरों में यह पीठा बनाया गया. रिश्तेदारों व पड़ोसियों में भी इस पीठा का वितरण किया गया. शनिवार को बड़ी संख्या में लोगों ने मंदिरों में जाकर परिवार की सुख-शांति के लिए पूजा-अर्चना की.
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