Rourkela News : पुस्तकें सोने की खान, जितना गहराई में उतरेंगे, उतना ज्ञान प्राप्त होगा : आलोक वर्मा
Published by : SUNIL KUMAR JSR Updated At : 04 Feb 2026 11:34 PM
राउरकेला पुस्तक महोत्सव–2026 का भव्य शुभारंभ, साहित्य और संस्कृति का उत्सव शुरू
Rourkela News : भंज सांस्कृतिक ट्रस्ट द्वारा सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के सहयोग से आयोजित दस दिवसीय ‘राउरकेला पुस्तक महोत्सव–2026’ का भव्य उद्घाटन 3 फरवरी की संध्या भंज सांस्कृतिक परिसर में किया गया. महोत्सव का उद्घाटन आरएसपी के निदेशक प्रभारी आलोक वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया. उद्घाटन के बाद उन्होंने पुस्तक स्टॉलों का भ्रमण किया और प्रकाशकों व विक्रेताओं से संवाद किया. इस अवसर पर अपने संबोधन में आलोक वर्मा ने कहा कि पुस्तकें सोने की खान की तरह हैं. जितना अधिक व्यक्ति इनके भीतर उतरता है, उतना ही अधिक ज्ञान अर्जित करता है. उन्होंने युवाओं से पुस्तकों को अपना सबसे अच्छा मित्र बनाने और डिजिटल युग में भी पठन-पाठन की आदत को जीवित रखने का आह्वान किया. ओडिया पुस्तकों के स्टॉल देखकर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ओडिया भाषा संस्कृत के सबसे निकट है और इसका साहित्यिक विकास ऐतिहासिक रूप से अत्यंत समृद्ध रहा है. उन्होंने ओडिया में पढ़ने और लिखने को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. उद्घाटन समारोह में दीपिका महिला संघति की अध्यक्ष नम्रता वर्मा, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) तरुण मिश्र, कार्यपालक निदेशक (खान विकास-सीएमएलओ) बीके. गिरी, कार्यपालक निदेशक (संकार्य) विश्व रंजन पलई, कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) अनिल कुमार, कार्यपालक निदेशक (खान) एमपी. सिंह, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) सुदीप पाल चौधरी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, भंज सांस्कृतिक ट्रस्ट के न्यासी तथा बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरुआत भंज कला केंद्र के कलाकारों द्वारा गुरु बिनपानी रथ के नेतृत्व में प्रस्तुत मंगलाचरण गीत से हुई. दस दिनों तक चलने वाले इस पुस्तक महोत्सव में देशभर के अग्रणी प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं के कुल 114 स्टॉल लगाए गए हैं. भुवनेश्वर और कटक के प्रतिष्ठित प्रकाशन गृहों के साथ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, रायपुर, पुणे सहित अन्य प्रमुख शहरों के प्रकाशक भी इसमें भाग ले रहे हैं. महोत्सव सप्ताह के दिनों में दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक और रविवार को सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा. पुस्तक प्रदर्शनी और बिक्री के साथ साहित्यिक कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, काव्य-पाठ, लेखक संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं और प्रतिदिन सायंकाल स्पॉट क्विज जैसे कार्यक्रम इसे साहित्य और संस्कृति का जीवंत उत्सव बना रहे हैं.
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