Rourkela News: जीने का तरीका नहीं, सोच बदलने से हमारा जीवन बदलेगा : शिवानी दीदी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 11 Nov 2024 11:31 PM
Rourkela News: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि की ओर से सेक्टर-2 दुर्गापूजा मैदान में आयोजित आध्यात्मिक व्याख्यान को बीके शिवानी ने संबोधित किया.
Rourkela News: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से सेक्टर-2 दुर्गा पूजा मैदान में सोमवार को आध्यात्मिक व्याख्यान आयोजित किया गया. वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका तथा अंतरराष्ट्रीय प्रेरक शिवानी दीदी ने इसे संबोधित किया. उन्होंने कहा कि हम अकसर कहते हैं, आज अच्छा नहीं लग रहा. आखिर क्यों अच्छा नहीं लग रहा है, इस पर हमें विचार करना चाहिए. क्योंकि हम अच्छा सोच नहीं रहे होते हैं, इसलिए हमें ऐसी फीलिंग आती है. हम अपनी सोच को बदलेंगे, तो यह फीलिंग बदल जायेगी. उन्होंने कहा कि किसी भी बात को जब हम लगातार सोचते हैं, सोचते ही रहते हैं, तो वह बीमारी में तब्दील हो जाती है. फिर वह क्लॉट कर जाती है. हम चिकित्सक के पास जाते हैं. चिकित्सक उसे रिमूव कर देता हैं. हम ठीक हो जाते हैं. फिर चिकित्सक कहता है कि लाइफ स्टाइल बदलो. हम अपना खान-पान, रहन-सहन, वर्कआउट बदलते हैं, जो बाहरी है. लेकिन हम सोच को नहीं बदलते. लाइफ स्टाइल बदलने को कहा गया, तो लाइफ कहां है. लाइफ सोच में है, उसे बदल देंगे, तो हमारा जीवन बदल जायेगा.
‘मैं एक शक्तिशाली आत्मा हूं’ का दिलाया संकल्प
शिवानी दीदी ने मौके पर मौजूद हजारों लोगों से संकल्प कराया. उन्होंने कहा कि सभी संकल्प लें कि ‘चाहे कोई भी बात आ जाये, कोई मेरे साथ कैसा भी व्यवहार करे, वो उनका संस्कार है, मैं शक्तिशाली आत्मा हूं, प्रेम और सम्मान मेरा संस्कार है’. हम सब आज से एक संकल्प करते हैं, दिन में बीच-बीच में रुक कर अपने आप को स्मृति दिलायेंगे कि मैं कौन हूं? क्योंकि हम ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां हमने इसको स्वभाविक समझ लिया कि परिस्थितियों का और लोगों के व्यवहार का हम पर तो प्रभाव पड़ना ही है.सुनायी देना और समझ आना के अंतर को समझना है
बीके शिवानी ने कहा कि कलियुग में अज्ञान का अंधकार है. साथ-साथ रहते हैं, साथ काम करते हैं, हर बात तुरंत एक-दूसरे को मैसेज करते हैं. इतना अच्छा कम्युनिकेशन हो चुका है, लेकिन फिर भी एक-दूसरे को देखकर कहते हैं कि मुझे समझ नहीं आ रहा क्या कह रहे हो. सुनायी देना और समझ आना दोनों में फर्क है. हमें इसी को समझना है. जब ऐसी कोई बात आती है, तो हम मन को हिलने देते हैं. शांति आसपास की आवाजों से नहीं चाहिए होती है, शांति मन के शोर से चाहिए. हम मन की गति को कम नहीं कर सकते, हमें इसकी गति को कम नहीं करनी, क्वालिटी को बदलनी है. अगर आपको कहा जाये कि किसी की कमियां सुनायें, तो लंबा सुनायेंगे. लेकिन अच्छी बात बताने को कहेंगे, तो कम बोलेंगे. सोच का अंतर है. इसलिए सोच बदलना होगा.अतिथियों का किया गया सम्मान
सोमवार के कार्यक्रम में अतिथि के रूप में रघुनाथपाली विधायक दुर्गाचरण तांती, राउरकेला विधायक शारदा प्रसाद नायक, बणई विधायक लक्ष्मण मुंडा, राउरकेला स्टील प्लांट के निदेशक प्रभारी अतनु भौमिक, एनआइटी के निदेशक प्रो के उमामहेश्वर राव, सीआइएसएफ के सीनियर कमांडेंट अशोक जलवानिया, राउरकेला चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष शुभ पटनायक मौजूद थे. सभी को बीके शिवानी ने भगवान की तस्वीर देकर सम्मानित किया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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