नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट लिखने पर तबलीगी जमात ने की थी उमेश कोल्हे की हत्या, एनआईए का दावा
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 20 Dec 2022 4:22 PM
अमरावती के दवा विक्रेता उमेश कोल्हे की हत्या तबलीगी जमात के लोगों ने आतंक फैलाने के लिए की थी. चार्जशीट में एनआईए ने दावा किया है कि उमेश कोल्हे का कोई आपराधिक बैकग्राउंड नहीं है.
Umesh Kolhe murder case : उमेश कोल्हे की हत्या एक साधारण मर्डर केस नहीं है, यह एक सुनियोजित साजिश के तहत की गयी हत्या है. एनआईए ने उमेश कोल्हे की हत्या मामले में दाखिल चार्जशीट में इस बात का जिक्र किया है कि यह धार्मिक कट्टरवादी युवकों द्वारा आतंक फैलाने के लिए की गयी साजिश है, जिसके पीछे तबलीगी जमात का हाथ है.
गौरतलब है कि अमरावती के दवा विक्रेता उमेश कोल्हे की हत्या तबलीगी जमात के लोगों ने आतंक फैलाने के लिए की थी. चार्जशीट में एनआईए ने दावा किया है कि उमेश कोल्हे का कोई आपराधिक बैकग्राउंड नहीं है. उनका किसी के साथ कोई विवाद भी नहीं था.
Umesh Kolhe murder case: "The act committed by accused is not just a Simpliciter murder but a terror act of well-planned criminal conspiracy hatched by religiously radicalised Muslim youth (Tablighi Jamaat) to strike a terror into the minds of people," says NIA in its chargesheet pic.twitter.com/SIsnnD1LxF
— ANI (@ANI) December 20, 2022
एनआईए ने चार्जशीट में दावा किया है कि उमेश कोल्हे ने नुपूर शर्मा के समर्थन में एक व्हाट्सएप पोस्ट डाला था, जिसकी वजह से उनकी हत्या हुई है. ज्ञात हो कि नुपूर शर्मा का समर्थन करने के बाद राजस्थान के उदयपुर में भी एक दर्जी की गला काटकर कुछ इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी.
ज्ञात हो कि पूर्व भाजपा नेत्री नुपूर शर्मा ने एक टीवी शो के दौरान इस्लाम के बारे में कुछ विवादित टिप्पणी की थी जिसके बाद उनके खिलाफ बयानबाजी का दौर चला था. कुछ लोग उनके समर्थन में तो कुछ लोग उनके विरोध में खड़े हुए थे. नुपूर शर्मा पर कार्रवाई करते हुए भाजपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था.
अमरावती की सांसद नवनीत राणा ने एनआईए के दावे पर प्रतिक्रिया दी कि जो लोग भी हत्याकांड में शामिल हैं उन्हें कड़ी सजा दी जाये. उन्होंने कहा कि अब समय बदल गया है और जो लोग ये सोचते थे कि वे अपराध करके बच जायेंगे उन्हें समझ लेना चाहिए कि वे सफल नहीं होंगे.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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