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महाराष्ट्र के इस गांव में हर दिन राष्ट्रगान गाते है स्थानीय लोग, जानें क्या है कारण

Updated at : 18 Sep 2022 2:49 PM (IST)
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महाराष्ट्र के इस गांव में हर दिन राष्ट्रगान गाते है स्थानीय लोग, जानें क्या है कारण

ग्रामीणों में नयी ऊर्जा के लिए पुलिस अधिकारी रोजाना दो लाउडस्पीकरों के साथ मूलचेरा और विवेकानंदपुर के चक्कर लगाते हैं और एक मिनट के लिए देशभक्ति का गीत बजाते हैं. इससे संकेत मिलता है कि राष्ट्रगान शुरू होने वाला है.

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माओवाद प्रभावित गांव के रूप में बनी अपनी पहचान को मिटाने के प्रयास के तहत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के मुलचेरा के निवासी राष्ट्रगान गाकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं. गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल ने बताया कि यह एक अच्छी पहल है. ग्रामीणों को हर रोज सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाकर देशभक्ति की भावना का अनुभव होता है. बता दें कि यह गांव महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से 900 किमी दूर पर है. गांव की आबादी 2,500 के करीब है.

यह परंपरा शुरू करने वाला देश का तीसरा गांव बना मुलचेरा

पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि तेलंगाना के नलगोंडा गांव और महाराष्ट्र के सांगली जिले के भीलवाड़ी गांव के बाद मुलचेरा यह परंपरा शुरू करने वाला देश का तीसरा गांव है. हर दिन दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों, छोटे व्यापारियों और पुलिस कर्मियों सहित गांव के निवासी सुबह आठ बजकर 45 मिनट पर इकट्ठा होते हैं और राष्ट्रगान गाते हैं. उन्होंने बताया कि गांव में आदिवासियों और पश्चिम बंगाल के लोगों की मिश्रित आबादी है. उन्होंने कहा, जब राष्ट्रगान शुरू होता है तो लोग जहां भी होते हैं, राष्ट्रगान को सुनकर अपने वाहनों को रोकते हैं और इसके गायन में शामिल होते हैं.

पुलिस ने ग्रामीणों के लिए उठाया ये कदम

ग्रामीणों में नयी ऊर्जा के लिए पुलिस अधिकारी रोजाना दो लाउडस्पीकरों के साथ मूलचेरा और विवेकानंदपुर के चक्कर लगाते हैं और एक मिनट के लिए देशभक्ति का गीत बजाते हैं. इससे संकेत मिलता है कि राष्ट्रगान शुरू होने वाला है. पुलिस अधिकारी ने कहा कि इससे लोगों में नयी ऊर्जा आई है और देशभक्ति की भावना बढ़ी है. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक विवादों की संख्या में कमी आई है, क्योंकि राष्ट्रगान के गायन से भाईचारे की भावना बढ़ी है.

गढ़चिरौली है पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ का पहला स्थल

गांव में राष्ट्रगान के गायन की परंपरा शुरू करने वाले सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) अशोक भापकर ने कहा कि मुलचेरा के पड़ोसी गांव लोहारा, जो मूलचेरा पुलिस थाना के अधिकार क्षेत्र में आता है, गढ़चिरौली में पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ का पहला स्थल था.

भाषा- इनपुट

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Piyush Pandey

लेखक के बारे में

By Piyush Pandey

Senior Journalist, tech enthusiast, having over 10 years of rich experience in print and digital journalism with a good eye for writing across various domains.

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