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गैस त्रासदी के पीड़ितों के अस्पताल BMHRC को बनाया कोविड19 हॉस्पिटल, मध्यप्रदेश सरकार को हाइकोर्ट का नोटिस

Updated at : 16 Apr 2020 8:55 AM (IST)
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गैस त्रासदी के पीड़ितों के अस्पताल BMHRC को बनाया कोविड19 हॉस्पिटल, मध्यप्रदेश सरकार को हाइकोर्ट का नोटिस

मध्यप्रदेश हाइकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर भोपाल गैस (Bhopal Gas Tragedy) पीड़ितों के लिए बने अस्पताल भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) में गैस पीड़ितों के इलाज का बंदोबस्त करने के संबंध में 21 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है. बीएमएचआरसी में केवल कोविड-19 (Covid19) के मरीजों का उपचार करने के 23 मार्च 2020 के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (Public Interest Litigation) पर अदालत ने यह नोटिस जारी किया है.

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जबलपुर : मध्यप्रदेश हाइकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर भोपाल गैस (Bhopal Gas Tragedy) पीड़ितों के लिए बने अस्पताल भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) में गैस पीड़ितों के इलाज का बंदोबस्त करने के संबंध में 21 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है. बीएमएचआरसी में केवल कोविड-19 (Covid19) के मरीजों का उपचार करने के 23 मार्च 2020 के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (Public Interest Litigation) पर अदालत ने यह नोटिस जारी किया है.

याचिका ‘भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन’ ने दायर की है. याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने बताया कि जनहित याचिका पर बुधवार (15 अप्रैल, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मध्यप्रदेश हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस विजय शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई.

उन्होंने कहा कि सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और बीएमएचआरसी में गैस पीड़ितों के इलाज के संबंध में 21 अप्रैल तक विस्तृत हलफनामा दायर करने का आदेश दिया. नागरथ ने कहा कि राज्य सरकार के इस निर्णय से बीएमएचआरसी में इलाज कराने वाले गैस पीड़ित मरीज परेशान हैं.

उन्होंने अदालत को बताया कि यह अस्पताल केवल भोपाल गैस पीड़ितों के इलाज के लिए ही बनाया गया है, लेकिन राज्य सरकार के आदेश ने उन्हें ही इस अस्पताल में उपचार से वंचित कर दिया है. नागरथ ने कहा कि बीएमएचआरसी में प्रति माह करीब 30,000 भोपाल गैस पीड़ित मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचते हैं.

उन्होंने कहा कि 16 मार्च एवं 21 मार्च, 2020 के बीच करीब 5,000 गैस पीड़ित इलाज कराने पहुंचे, जिनमें से 180 को इस अस्पताल में भर्ती किया गया था. कोविड19 के इलाज के लिए इस अस्पताल को आरक्षित करने से ये सभी लोग प्रभावित हुए हैं.

गैस पीड़ितों के लिए पिछले तीन दशकों से अधिक समय से काम कर रहे संगठनों का दावा है कि 2-3 दिसंबर, 1984 की दरम्यानी रात यूनियन कार्बाइड के भोपाल स्थित कारखाने से रिसी जहरीली गैस मिक से अब तक 20,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 5.74 लाख लोग प्रभावित हुए हैं.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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