Viral Video : बजरंग बली पर सियासत, अब मध्यप्रदेश कांग्रेस के विधायक उमंग सिंघार ने हनुमान जी को बताया आदिवासी

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Viral Video : बजरंग बली पर सियासत, अब मध्यप्रदेश कांग्रेस के विधायक उमंग सिंघार ने हनुमान जी को बताया आदिवासी

उमंग सिंघार का वो वीडियो वायरल है जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम को लंका पहुंचाने वाले आदिवासी थे. लिखने वालों ने आदिवासियों को वानरसेना का नाम दे दिया. उमंग सिंघार के इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति शुरू हो गयी है.

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बजरंग बली को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गयी है. लेकिन इन बार मामला बजरंग दल पर प्रतिबंध का नहीं हैं, बल्कि मध्यप्रदेश से कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार का बयान है. बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उमंग सिंघार ने कहा है कि हनुमान जी आदिवासी थे.

श्रीराम को लंका पहुंचाने वाले आदिवासी

उमंग सिंघार का वो वीडियो वायरल है जिसमें उन्होंने कहा कि भगवान राम को लंका पहुंचाने वाले आदिवासी थे. लिखने वालों ने आदिवासियों को वानरसेना का नाम दे दिया. उमंग सिंघार के इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति शुरू हो गयी है. कांग्रेस पार्टी ने सिंघार के बयान का समर्थन किया है वहीं भाजपा ने इसपर आपत्ति जतायी है.


सिंघार ने भाजपा से पूछे सवाल

हालांकि जब भाजपा की ओर से उनके बयान पर आपत्ति की गयी तो उन्होंने ट्वीट किया कि मेरे द्वारा आदिवासियों को भगवान हनुमानजी का वंशज कहने को आप हनुमानजी का अपमान मानते हैं ? मेरे द्वारा भगवान हनुमानजी को हमारे आदिवासी समाज का कहने पर आप उसे बजरंग बली का अपमान बता रहे हैं, क्या किसी को आदिवासी कहना उसका अपमान करना होता है.

कर्नाटक चुनाव  के दौरान बजरंग बली पर हुई सियासत

गौरतलब है कि कर्नाटक चुनाव के वक्त बजरंग बली को लेकर राजनीति हुई थी. वजह यह था कि कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने का वादा किया था, जिसपर जवाबी हमला करते हुए खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बजरंग बली का अपमान कर रही है. कांग्रेस पार्टी बजरंग बली का नाम लेने वालों पर प्रतिबंध लगाना चाहती है. हालांकि बाद में कांग्रेस पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की बहुत कोशिश की और बजरंग बली के मंदिर जाकर पूजा अर्चना की. खुद प्रियंका गांधी भी चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे पहले बजरंग बली के मंदिर गयीं और पूजा की थी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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