शरीयत औरतों को बराबर का हक देता है : कादिरी

Updated at : 13 Nov 2016 6:32 AM (IST)
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शरीयत औरतों को बराबर का हक देता है : कादिरी

उर्दू स्कूल में जलसा. उमड़ी तीन हजार मुसलिम महिलाएं इसलाम में महिलाअों को पूरा हक प्राप्त है. अगर मर्दों को तीन तलाक देने का अधिकार है, तो औरतों को भी खुला (तलाक) लेने का हक है. चक्रधरपुर : इस्लाम में महिलाअों को मुकम्मल हक दिया गया है, शरीयत में कहीं भी महिलाअों की हकतलफी नहीं […]

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उर्दू स्कूल में जलसा. उमड़ी तीन हजार मुसलिम महिलाएं

इसलाम में महिलाअों को पूरा हक प्राप्त है. अगर मर्दों को तीन तलाक देने का अधिकार है, तो औरतों को भी खुला (तलाक) लेने का हक है.
चक्रधरपुर : इस्लाम में महिलाअों को मुकम्मल हक दिया गया है, शरीयत में कहीं भी महिलाअों की हकतलफी नहीं की गयी हैं. उक्त बातें तहफ्फुज-ए-शरीयत सह इसलाह-ए-मुआसरा कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता आलीमा व फाजीला मोहतरमा जेबा कादिरी ने कही. अल्लामा अरशदुल कादिरी की पुत्री जेबा कादिरी जमशेदपुर में बाग-ए-आयशा मदरसा का संचालन करती हैं. मुसलिम महिलाओं की स्थिति में सुधार के उद्देश्य के उक्त कांफ्रेंस का आयोजन उर्दू स्कूल प्रांगण में शनिवार को किया गया था.
तिलावत व नात पढ़े जाने के बाद मोहतरमा जेबा कादिरी ने अपनी तकरीर में कहा कि 10 हिजरी में जब रसूल अल्लाह ने हज अदा की. हज के बाद अपनी कौम से खताब करते हुए कहा था कि कुरआन मुकम्मल नाजिल हो गया है, शरीयत पूरी हो गयी है. अब कुरान व शरीयत में कोई तब्दीली की गुंजाइश नहीं है. उन्होंने अपनी उम्मत से औरतों की हिफाजत करने का भी हुक्म दिया था. उस जमाने से आज तक इस्लाम में औरतों को इज्जत दी जा रही है. मुसलिम पर्सनल लॉ और शरीयत हमारा हक है, इसमें किसी और के सलाह की आवश्यकता ही नहीं है. इसलाम में महिलाअों को पूरा हक प्राप्त है. अगर मर्दों को तीन तलाक देने का अधिकार है, तो औरतों को भी खुला (तलाक) लेने का हक है. शौहर अगर गलत है तो औरतें उससे अलग हो सकती हैं. उन्होंने औरतों से कहा कि शरीयत के अहकाम की पाबंदी करें, नमाज बिना नागा किये ही अदा करें.
युवाओं ने दी सेवा : जलसा को सफल बनाने में मुसलिम सेंट्रल अंजुमन, एपीजे अब्दुल कलाम खिदमत फाउंडेशन के सदस्यों ने योगदान दिया. शहर का हर तबका जलसा को सफल बनाने में आगे आगे रहा.
उपस्थित महिलाएं.
उम्मीद से ज्यादा पहुंची महिलाएं
चक्रधरपुर में महिलाओं का यह पहले जलसा था. महिलाओं को बैठने के लिए डेढ़ सजार कुर्सियां कम पड़ गयीं. बाद में फिर कुर्सियां मंगायी गयीं, वह भी कम पड़ गयीं. इसके बाद स्कूल के सभी बेंच निकाले गये. एक अनुमान के अनुसार तीन हजार महिलाओं की भीड़ जलसा में थी.
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