देश में समाप्त हो रही है खिला कर खाने की परंपरा : शंकराचार्य

मनोहरपुर/आनंदपुर : हमारे देश में खिलाकर खाने की परंपरा समाप्त हो रही है. इसका मूल कारण है कि बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा में धर्म को स्थान नहीं मिल पा रहा है. सरकारी स्कूलों में 200 हिंदू के बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन मात्र तीन अन्य धर्म के बच्चे के कारण उन स्कूलों में धर्म […]
मनोहरपुर/आनंदपुर : हमारे देश में खिलाकर खाने की परंपरा समाप्त हो रही है. इसका मूल कारण है कि बच्चों को दी जाने वाली शिक्षा में धर्म को स्थान नहीं मिल पा रहा है. सरकारी स्कूलों में 200 हिंदू के बच्चे पढ़ते हैं. लेकिन मात्र तीन अन्य धर्म के बच्चे के कारण उन स्कूलों में धर्म का पाठ पढ़ाना वर्जित कर दिया गया है.यह कैसी व्यवस्था है.पूरे देश में हिंदुओं को धर्मांतरण कराया जा रहा है. भूलवश जो लोग अपने धर्म से अन्य धर्मों में चले गये हैं,
वे धीरे-धीरे लौट रहे हैं. उन्हें मार्ग दर्शन की आवश्यकता है. सभी वापस अपने घर लौट आयेंगे. शिक्षा में धर्म को भी स्थान मिले. उक्त बातें अनंत विभूषित ज्योतिष्पीठाधीश्वर व द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती जी महाराज ने सोमवार की संध्या में विश्व कल्याण आश्रम में अपने प्रवचन में कहा.
उन्होंने कहा कि भोक्ता के लिये भोग बना है,भोग के लिये भोक्ता नहीं. मनुष्य के लिये भोजन होता है, भोजन के लिये मनुष्य नहीं. राम से बड़ा राम का नाम है. कल्पित की अराधना करने के बजाये राम को जाने उसे माने. राम लला की पूजा होगी, साधु संत मिलकर बनायेंगे राम लला का मंदिर.
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