गाजे-बाजे संग निकली कलश यात्रा, नदी से श्रद्धालुओं ने लाया जल

Published at :21 Oct 2015 9:11 AM (IST)
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गाजे-बाजे संग निकली कलश यात्रा, नदी से श्रद्धालुओं ने लाया जल

नोवामुंडी : बड़ाजामदा में दुर्गापूजा के मौके पर कुंआरी बालाओं ने गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली. बोकनो नदी से कलश में जल भर कर श्रद्धालु पैदल फुटबॉल मैदान व भट्टीसाई स्थित पूजा पंडाल पहुंचे. माता की प्रतिमा के समीप कलश को समर्पित किया. कलश यात्रा में 108 युवतियां शामिल थी. मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता […]

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नोवामुंडी : बड़ाजामदा में दुर्गापूजा के मौके पर कुंआरी बालाओं ने गाजे-बाजे के साथ कलश यात्रा निकाली. बोकनो नदी से कलश में जल भर कर श्रद्धालु पैदल फुटबॉल मैदान व भट्टीसाई स्थित पूजा पंडाल पहुंचे.
माता की प्रतिमा के समीप कलश को समर्पित किया. कलश यात्रा में 108 युवतियां शामिल थी. मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार साव, पुलक भट्टाचार्या, रोहन दत्ता समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
शंखनाद से गूंजे पूजा पंडाल
महासप्तमी की सुबह कलश यात्रा निकालकर मां की प्रतिमा के पास कलश स्थापित कर दुर्गा की आराधना शुरू हुई़ इस अवसर पर गणेश, कार्तिक, लक्ष्मी व सरस्वती की पूजा भी की गयी. महाशष्ठी से दुर्गा पूजा शुरू हो गयी है. पहले दिन मां की प्राण प्रतिष्ठा की गयी. अब पंडालों में ढ़ाक की थाप व भीड़ उमड़ने लगी है.
चाईबासा : पंडालों के पट खुलने के साथ ही शहर दुर्गोत्सव के रंग में रंग गया है. पूजा पंडाल शंखनाद से गूंजने लगे है. पंडालों में मां की आराधना शुरू हाे गयी है. इसी क्रम में शहर के अमलाटोला स्थित पूजा पंडाल में सुबह के छ: बजे कलश स्थापना के साथ पूजा व विभिन्न प्रकार के आयोजन शुरू हो गये़ कार्यक्रम शुरू हो गये है. आदि दुर्गोत्सव का पंडाल शहर के पुराने पंडालों में से एक है.
आज सप्तमी के दिन भोज का आयोजन किया गया. पारंपरिक पूजा के बाद प्रसाद वितरण किया गया जिसमें खिचड़ी भोग रखा गया था. इसके बाद महिलाओं के लिए शंखनाद की प्रतियोगिता रखी गई थी तथा उसके उपरांत कला प्रतियोगिता. सभी प्रतियोगिताओं का परिणाम नवमी के दिन बताया जाएगा. दो दिन संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया ह. जिसमें एक दिन जमशेदपूर से तथा दूसरे दिन कलकत्ता से संगीतकारों को बुलाया गया है.
अमलाटोला कमेटी के सचिव तपन मित्रा ने बताया कि भोज आखिरी दिन तक मिलेगा तथा इसके लिए किसी प्रकार की कोई राशि नहीं ली जाती. मगर महाअष्टमी के दिन जो महाभोग लगती है उसमें टोकन लागू किया जाता है. जिसमें दूर दराज से लोग आते हैं. महाभोग में इक्कीस पकवान बनाये जाते हैं व अधिक से अधिक लोग इसे ग्रहण करते है.
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