काशीपुर के अस्तित्व को लील रही कोयना

Published at :14 May 2015 7:02 AM (IST)
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काशीपुर के अस्तित्व को लील रही कोयना

नदी में पानी के तेज बहाव के कारण कट रही मिट्टी से भय राधेश सिंह राज मनोहरपुर : मनोहरपुर प्रखंड मुख्यालय नंदपुर पंचायत के अंतर्गत आता है. इसी पंचायत से प्रखंड, अंचल, शिक्षा, आपूर्ति, कृषि, बाल-विकास समेत तमाम सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं. 15 पंचायतों के प्रखंड में नंदपुर पंचायत का विशेष महत्व इसी कारण […]

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नदी में पानी के तेज बहाव के कारण कट रही मिट्टी से भय

राधेश सिंह राज

मनोहरपुर : मनोहरपुर प्रखंड मुख्यालय नंदपुर पंचायत के अंतर्गत आता है. इसी पंचायत से प्रखंड, अंचल, शिक्षा, आपूर्ति, कृषि, बाल-विकास समेत तमाम सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं. 15 पंचायतों के प्रखंड में नंदपुर पंचायत का विशेष महत्व इसी कारण है. इसी पंचायत में एक गांव ऐसा है, जो प्रखंड के मानचित्र से मिटने के कागार पर आ पहुंचा है. बात हो रही है, नंदपुर पंचायत के काशीपुर गांव की.

400 की आबादी वाला यह गांव विगत नौ वर्ष से आपदा की मार ऐसी हावी हुई कि गांव का अस्तित्व मिट रहा है. कोयना नदी यहां के ग्रामीणों के लिए किसी खौफ से कम प्रतीत नहीं होता. नदी में पानी के तेज बहाव के कारण कट रही मिट्टी के कारण गांव का अस्तित्व पूर्ण रूप से मिटने के कगार पर आ गया है. इन नौ वर्षो में गांव अथवा ग्रामीणों के पुनर्वास व गांव बसाने के लिए प्रशासनिक तंत्र अथवा जनप्रतिनिधियों ने भी खासी रुचि नहीं दिखायी. वर्ष 2006 में यह गांव सुर्खियों में आया था.

लगातार दो मॉनसून की बारिश से गांव के दर्जनों से ज्यादा की संख्या में ग्रामीणों के आशियाने को कोयना नदी ने लीलना शुरू कर दिया था. हालांकि इस दौरान नेता व जनप्रतिनिधियों की खूब आवाजाही हुई, परंतु नदी के कटाव को रोकने अथवा गांव को बसाये रखने में किसी ने गहरी रुचि नहीं दिखायी. यही वजह रही कि देखते ही देखते गांव के 35 परिवारों के आशियानों को कोयना ने अपनी आगोश में ले लिया. हालांकि सेल द्वारा अपनी प्रस्तावित योजना के सीएसआर के तहत मिट्टी कटाव रोकने के लिए आधा-अधूरा प्रयास अवश्य हुआ, जो नाकाफी साबित हुआ.

35 के स्थान पर 14 परिवारों को मिला इंदिरा आवास. पिछले सालों में हुए कोयना नदी के मिट्टी कटाव के कारण 35 से ज्यादा की संख्या में लोगों के मकान नदी के आगोश में समा गये. जिनमें से महज 14 परिवारों को सरकारी जमीन पर इंदिरा आवास दिया गया. जबकि कई स्थायी तौर पर इधर-उधर रह अपने जीवन की गाड़ी खींच रहे हैं.

सेल ने शुरू किया था बचाव कार्य, अचानक हुआ बंद: उप मुखिया. काशीपुर गांव निवासी पंचायत के उपमुखिया सहदेव सिंह ने बताया कि कोयना नदी के पानी के तेज बहाव में हो रहे नुकसान की लीला देखने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है. सेल प्रबंधन द्वारा गांव को बचाने के लिये कार्य शुरू अवश्य किया गया. अचानक उसे बंद कर दिया गया. बारिश के मौसम में ग्रामीणों को खतरा बना रहता है.

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