पीते हैं नदी का पानी, चलने को कच्ची सड़क

Published at :16 Apr 2015 5:30 AM (IST)
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पीते हैं नदी का पानी, चलने को कच्ची सड़क

जानुमबेड़ा गांव में विकास के नाम पर सिर्फ बिजली का पोल गाड़ा गया प्रताप प्रमाणिक चक्रधरपुर : पानी के लिए चापाकल नहीं, चलने के लिए सड़क नहीं, शिक्षा के लिए स्कूल नहीं, उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं. इसके बाद भी खुश है केरा पंचायत के जानुमबेड़ा गांव के ग्रामीण. इस गांव में विकास के […]

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जानुमबेड़ा गांव में विकास के नाम पर सिर्फ बिजली का पोल गाड़ा गया
प्रताप प्रमाणिक
चक्रधरपुर : पानी के लिए चापाकल नहीं, चलने के लिए सड़क नहीं, शिक्षा के लिए स्कूल नहीं, उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र नहीं. इसके बाद भी खुश है केरा पंचायत के जानुमबेड़ा गांव के ग्रामीण.
इस गांव में विकास के नाम पर सिर्फ बिजली का पोल गाड़ा गया है. ग्रामीणों ने सोच लिया है अब इस गांव का भला नहीं हो सकता. ईश्वर ने जो व्यवस्था गांव को दी है, उसी में संतोष कर जीना है. चक्रधरपुर प्रखंड कार्यालय से सटा केरा पंचायत का यह गांव विकास की बाट जोह रहा है. स्कूल नहीं होने के कारण शिक्षा का स्तर शून्य है. ग्रामीणों को आंगनबाड़ी तक नसीब नहीं. शुद्ध पानी मिलना इस गांव के लिए सपना है. लगभग 400 की आबादी वाले इस गांव में एक भी चापाकल नहीं है.
इंदिरा आवास, बीपीएल कार्ड, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन जैसे सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों को नहीं है. लंबा रास्ता तय कर पगडंडी का सहारा लेकर व नदी पार कर मुख्य सड़क तक आते है. सबसे बड़ी बिडंबना यह है कि इस गांव का व्यक्ति स्व जगन्नाथ बांकिरा दो-दो बार विधायक बने. न गांव का भला हुआ न ही ग्रामीणों का.
जनप्रतिनिधियों के पास है सिर्फ ठगने का काम : चेतन
ग्रामीण चेतन हेंब्रम ने कहा कि जनप्रतिनिधि के पास सिर्फ ठगने का काम बच गया है. नेताओं के पास इच्छा शक्ति की कमी हो गयी है. विधायक सांसद बन जाने के बाद जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्य से दूर भागते हैं. समय पर बड़ी बड़ी बातें बोलते है. भोले भाले ग्रामीणों से काम निकलने बाद गांव की स्थिति को जान के लिये झांकने तक नहीं आते है. इस गांव में विकास क्या है तो ग्रामीण नहीं जानते.
जानुमबेड़ा गांव में होगा विकास : बीडीओ
प्रखंड विकास पदाधिकारी समीर रेनियर खलको ने कहा कि जानुमबेड़ा गांव में विकास होगा. गांव का दौरा किया जायेगा. जो भी समस्या सामने आयेगा, उसे दूर करने के लिये पहल किया जायेगा. उन्होंने कहा कि उपेक्षित गांव की सूची बनाया जा रहा है.
जानुमबेड़ा के ग्रामीणों को इंदिरा आवास मिला है : मुखिया
केरा पंचायत के मुखिया श्रीमती सुनीता केराई ने कहा कि जानुमबेड़ा गांव काफी उपेक्षित है. इस गांव में विकास के लिये प्रयास किया जा रहा है. दो इंदिरा आवास इस गांव में आवंटन किया गया है. सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य आदि की सुविधा ग्रामीणों को मिले. संबंधित विभाग को अवगत कराया गया है.
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