आठ वर्ष से अधूरा 30 बेड का एमसीएच अस्पताल

Published at :09 Mar 2015 3:04 AM (IST)
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आठ वर्ष से अधूरा 30 बेड का एमसीएच अस्पताल

कमल विश्वास चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले की महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति झारखंड सरकार कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां 30 बेड का मदर चाइल्ड अस्पताल आठ साल में भी पूरा नहीं हो पाया है. 3.53 करोड़ की लागत से संयुक्त रूप में यह अस्पताल व […]

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कमल विश्वास
चाईबासा : पश्चिम सिंहभूम जिले की महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति झारखंड सरकार कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां 30 बेड का मदर चाइल्ड अस्पताल आठ साल में भी पूरा नहीं हो पाया है. 3.53 करोड़ की लागत से संयुक्त रूप में यह अस्पताल व डॉक्टरों व कर्मचारियों के तीन स्तर के क्वार्टर निर्माण का काम वर्ष 2007 में शुरू किया गया था.
इस काम को एक साल में पूरा होना था, लेकिन आठ वर्ष बाद भी यह पूरा नहीं हो पाया है. इसका प्राक्कलन अब काफी बढ़ गया है. हालांकि पिछले दिनों विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. सिविल सजर्न ने अस्पताल तथा क्वार्टर का काम फिर से शुरू करने के लिये विभाग को पत्रचार किया है.
सीएस आवास में बना डाला अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग अपने कार्यो के प्रति कितनी लापरवाह है, इसका एक नमूना रुका पड़ा एमसीएच अस्पताल को ही लिया जा सकता है. इस अस्पताल का निर्माण सदर अस्पताल परिसर में होना था, लेकिन काम करने वाली एजेंसी एनआरइपी के अभियंता व ठेकेदारों ने इसका निर्माण सीएस आवास परिसर में करना शुरू कर दिया, जबकि आवास में बनने वाले क्वार्टरों का निर्माण अस्पताल परिसर में कराया गया. सभी काम स्वास्थ्य विभाग के रांची हेडक्वार्टर से संचालित होने के कारण स्थानीय अधिकारियों ने भी इस दिशा से मुंह फेर लिया था.
घोटाले की वजह से रुका काम
3.53 लाख के इस काम के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 1.75 लाख की राशि एनआरइपी को आवंटन की जा चुकी है. इसमें 1.25 करोड़ रुपये विभाग द्वारा खर्च किया गया है. तत्कालीन टोंटो प्रखंड के जेइ विनय कुमार शर्मा को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दी गयी थी, लेकिन विभिन्न कामों को करवा रहे जेइ पर घोटाले के आरोप लगने तथा जेल जाने के कारण यह काम रुक गया है.
जच्च-बच्च दोनों को मिलता है लाभ
सदर अस्पताल में विशेष इंतजाम न होने के कारण कई बार गर्भवती और बच्चे को इलाज मिलने में देरी होती है, लेकिन 30 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के निर्माण होने पर यहां नार्मल डिलीवरी, सिजेरियन, मेडिकली टर्मिनेटेड प्रेगनेंसी, अलग लेवर रूम समेत सभी गर्भवस्था संबंधित ऑपरेशन व इलाज संभव हो पाता. इसके स्टाफ सदर अस्पताल से अलग होंगे. ओपीडी की सुविधा भी दिन भर मिलती.अस्पताल बनने पर जच्च बच्च दोनों को लाभ मिलता.
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