चाईबासा के यश गुप्ता ने फलों व सब्जियों के छिलके से बनायी खाद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Jan 2015 8:53 AM (IST)
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मनोज कुमार चाईबासा : कहा जाता है कि प्रतिभा उम्र की मुहताज नहीं होती. इस बात को सच कर दिखाया है चाईबासा के यश गुप्ता ने. संत विवेका इंगलिश स्कूल में कक्षा 10वीं के इस छात्र की प्रतिभा को देश स्तर पर पहचाना गया है. यश ने सब्जी व फलों के छिलकों को मिला कर […]
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मनोज कुमार
चाईबासा : कहा जाता है कि प्रतिभा उम्र की मुहताज नहीं होती. इस बात को सच कर दिखाया है चाईबासा के यश गुप्ता ने. संत विवेका इंगलिश स्कूल में कक्षा 10वीं के इस छात्र की प्रतिभा को देश स्तर पर पहचाना गया है.
यश ने सब्जी व फलों के छिलकों को मिला कर काफी कम खर्च में खाद बनाने के तरीके का इजाद किया है. फसलों को कीट-पतंगों से बचाने के लिए लहसुन व गौ के मूत्र से स्प्रे तैयार किया है. इस स्प्रे का नाम बायोगार्लिक्स स्प्रे रखा गया. ये दोनों इजाद घर के बागवानी में लगाये जाने वाले पौधों को सिंचित करने उससे बेहतर उत्पाद प्राप्त करने में काफी सहायक है.
यश के इस दोनों प्रयोग को सबसे पहले चाईबासा में पिछले साल के 20 अक्तूबर को लगे विज्ञान प्रदर्शनी में पहचान मिली. जिला स्तर पर आयोजित इस विज्ञान प्रदर्शनी में यश को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया. धनबाद में आयोजित राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में यश के इस सैंपल का चयन किया गया.
14 से 17 नवंबर तक धनबाद में आयोजित इस विज्ञान प्रदर्शनी में यश के इस दोनों प्रयोग को राज्य स्तर पर द्वितीय पुरस्कार मिला. यहां राज्य भर से लगभग साढ़े चार सौ से अधिक विषयों पर अलग-अलग जिले से विज्ञान के नये खोज से सबंधी उपकरणों की प्रदर्शनी लगायी गयी थी. यहां भी यश ने बाजी मारी.
यश के इस नवीन खोज को बेंगलुरु में 27 से 31 दिसंबर को आयोजित राष्ट्रीय बाल विज्ञान प्रदर्शनी में भी चयनित किया गया. राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतियोगिता में कुल 40 विजेताओं की घोषणा की गयी. सभी को बाल वैज्ञानिक के खिताब से नवाजा गया. देश के मशहूर वैज्ञानिक भारत रत्न सीएन राव ने यश को मेडल देकर सम्मानित किया था.
सब्जियों-फलों के छिलके से यश ने ऐसे बनाया खाद
पांच लीटर की एक बाल्टी ली
– बाल्टी में सबसे नीचे कंकड़ रखा
– कंकड़ के बाद बालू
– बालू के बाद मिट्टी
– मिट्टी के बाद नारियल के छिलके
– नारियल के छिलके के ऊपर सब्जियों व फलों के छिलके
इनको 60 दिनों तक यूं ही बाल्टी में छोड़ दिया. 60 दिनों के बाद लगभग एक किलो खाद बन कर तैयार हो गया. इसका खेतों में प्रयोग किया गया. बाजार में मिलने वाले खादों से ज्यादा असरकारक था.
क्या है इससे फायदा
खर्च भी कम. फसलों को हानि भी नहीं. नारियल के छिलके मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में कारगर. हाइब्रिड खादों के दुष्प्रभाव से भी छुटकारा. इसे घर में आसानी से कोई भी बना सकता है. घर की बागवानी में लगाये जाने वाले फूलों, सब्जी व फल उगाने में सहायक होगा.
कीट-पतंगों से फसलों की रक्षा के लिए ऐसे बना स्प्रे
– 20 लीटर गौ मूत्र
– 200 ग्राम लहसुन
– आधा किलो धतूरा का फूल पत्ता समेत
इसका नाम बायोगार्लिक्स स्प्रे दिया गया. धतूरा को पानी में उबाला गया. इससे इसमें शामिल विषाक्त क्षमता नष्ट हो जायेगी. सात दिन तक इसे यूं ही प्लास्टिक या लोहे के बर्तन में छोड़ दिया गया. अब पूरी तरह से बायोगार्लिक्स स्प्रे तैयार हो गया. अब स्प्रिंक करने वाले किसी उपकरण में इसे डालकर पौधों पर छिड़काव किया जा सकता है.
इससे क्या है फायदा
ये हाइब्रिड से सस्ता पड़ेगा. फसलों को हाइब्रिड की तरह नुकसान नहीं करेगा. वातावरण को प्रदूषित नहीं करेगा. इसे घर में आसानी से बनाया जा सकता है.
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