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पश्चिमी सिंहभूम नरसंहार मामला : पांच दिन बाद भी कारणों का नहीं चला पता, खून से सना डंडे, बेल्ट व मिट्टी ले गयी एसआइटी की टीम

Updated at : 25 Jan 2020 7:36 AM (IST)
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पश्चिमी सिंहभूम नरसंहार मामला : पांच दिन बाद भी कारणों का नहीं चला पता, खून से सना डंडे, बेल्ट व मिट्टी ले गयी एसआइटी की टीम

दो साल तक गांव से बाहर था जेम्स बुढ़, लौटते ही शुरू हो गयी रंजिश गांव में पसरा सन्नाटा गांव में नहीं दिख रहे एक भी पुरुष व महिला चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी प्रखंड स्थित बुरुगुलीकेरा गांव में हुए नरसंहार की गुत्थी पांच दिनों बाद भी नहीं सुलझी है. हालांकि इस गुत्थी को […]

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दो साल तक गांव से बाहर था जेम्स बुढ़, लौटते ही शुरू हो गयी रंजिश

गांव में पसरा सन्नाटा गांव में नहीं दिख रहे एक भी पुरुष व महिला

चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी प्रखंड स्थित बुरुगुलीकेरा गांव में हुए नरसंहार की गुत्थी पांच दिनों बाद भी नहीं सुलझी है. हालांकि इस गुत्थी को सुलझाने के लिए एसआइटी का गठन किया गया है. टीम ग्रामीणों से पूछताछ करेगी.

घटना के कारण का पता लगायेगी. मृतक के परिजन ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले सिर्फ बैठक की बात कही गयी थी. ग्रामसभा में सब ठीक-ठाक चल रहा था. इस बीच अचानक कुछ लोग बाहर से आये. इसके बाद मौत की सजा सुनाकर मारपीट शुरू कर दी गयी. इसके पूर्व दो युवकों ने बाहर से आये लोगों को पहचान लिया. इस कारण दो लोग वहां से भाग निकले. दोनों युवकों के भागने के बाद वहां मौजूद सात युवकों की पिटाई शुरू कर दी गयी. उन्हें जंगल के किनारे ले जाकर गला काटकर मौत के घाट उतार दिया गया.

गांव में दो नक्सली संगठनों में वर्चस्व की लड़ाई थी : सूत्रों के अनुसार, मारे गये सात में छह युवकों की गला एक ही जगह से व एक ही तरीके से काटी गयी थी. इससे इसकी आशंका जतायी जा रही है कि हत्या करने वाले लोग पेशेवर थे. आम आदमी इस तरह से किसी की हत्या नहीं कर सकता है.

अंदर खाने यह चर्चा है कि गांव में पूर्व में दो नक्सली संगठन का वर्चस्व रहा है. वर्चस्व के दंश से बचने के लिए जेम्स बुढ़ ने दो साल तक गांव छोड़कर सोनुवा में अपना ठिकाना बनाये रखा था. वहीं करीब एक साल पहले इलाका शांत हुआ तो वह गांव लौट आया था.

…तो गांव में हो सकता है खूनी संघर्ष : लोगों का कहना है कि यदि नरसंहार की घटना दो संगठनों के बीच के वर्चस्व की वजह से हुई है तो भविष्य में खूनी संघर्ष की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि ग्रामीण इस मामले में कुछ खुलकर नहीं बोलना चाहते हैं. मौजूदा समय में बुरुगुलीकेरा गांव में सन्नाटा पसरा है.

एसआइटी ने की जांच, मृतक के कपड़े, खून से सना डंडा, बेल्ट व मिट्टी ले गयी टीम

सोनुआ : गुदड़ी प्रखंड के बुरुगुलीकेरा गांव में 19 जनवरी को सात ग्रामीणों की निर्मम हत्या की निष्पक्ष जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित एसआइटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) ने शुक्रवार को गांव में जांच की. टीम शुक्रवार की दोपहर करीब दो बजे बुरुगुलीकेरा गांव पहुंची. टीम का नेतृत्व घाटशिला एसडीपीओ राजकुमार मेहता कर रहे थे.

एसआइटी ने बुरुगुलीकेरा गांव के घासी टोला (जहां विगत 19 जनवरी को ग्रामसभा हुई थी) से जांच शुरू की. यहां से टीम को खून के निशान मिले. इसे बालू से मिटाने की कोशिश की गयी थी. उसके बाद टीम ने उस रास्ते की जांच की, जहां से युवकों को घसीटकर जंगल में ले जाया गया था. वहीं जिस पहाड़ी पर हत्या हुई थी. वहां जांच कर हत्या से जुड़े कई सामान टीम ने बरामद किये.टीम के सदस्यों ने जंगल से हत्या में प्रयुक्त डंडे, रस्सी, मृतक के अवशेष, कपड़े के टुकड़े व बेल्ट, खून से सनी मिट्टी आदि जब्त किये.

टीम ने हर चीज़ की काफी बारीकी से जांच की. जांच के दौरान टीम के सदस्यों को पहाड़ के ढलान पर कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. टीम घटनास्थल देखकर हैरान हुई कि सात को कैसे इतनी दूर ले जाकर हत्या की गयी. एसआइटी ने हत्या प्रयुक्त कई सामग्रियों को जब्त किया. उसे एक बैग में सुरक्षित रखा. टीम के सदस्यों को जांच के दौरान कई अहम सबूत मिले.

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