प्रदूषण की चपेट में ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली, ग्रामीणों ने किया आंदोलन का ऐलान

चाईबासा के पांडरासाली में बैठक करते ग्रामीण. फोटो: प्रभात खबर
पश्चिमी सिंहभूम में कोयला और लौह अयस्क की धूल से ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली पांडरासाली क्षेत्र प्रदूषित हो रहा है. ग्रामीण खेती, पशुधन और स्वास्थ्य पर पड़ रहे असर से नाराज हैं और आंदोलन की चेतावनी दी है.
चाईबासा से अनिल तिवारी की रिपोर्ट
Pollution: पश्चिमी सिंहभूम जिले के खूंटपानी प्रखंड की माटकोबेडा पंचायत स्थित पांडरासाली रेलवे स्टेशन और उसके आसपास का इलाका इन दिनों कोयला और लौह अयस्क की धूल से जूझ रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे रैक के माध्यम से हो रहे कोयला एवं लौह अयस्क के परिवहन के कारण उड़ने वाली धूल ने करीब 15 से 20 किलोमीटर के दायरे को प्रदूषण की चपेट में ले लिया है. इसका असर खेती, पर्यावरण, पशुधन और लोगों के स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देने लगा है. बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीण अब आंदोलन की राह पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं.
सांस्कृतिक धरोहर पर मंडरा रहा प्रदूषण का खतरा
पांडरासाली क्षेत्र केवल एक गांव या रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महान समाज सुधारक और वारंग क्षिति लिपि के जनक ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली के रूप में पूरे कोल्हान क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि ने समाज को नई दिशा देने वाले महापुरुष को जन्म दिया, वही भूमि आज प्रदूषण की मार झेल रही है. उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह ऐतिहासिक धरोहर भी पर्यावरणीय संकट का शिकार हो जाएगी.
ग्रामीणों की बैठक में आंदोलन का फैसला
बढ़ती समस्या को लेकर पांडरासाली में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि क्षेत्र में फैल रहे कोयला और लौह अयस्क की धूल पर जल्द रोक नहीं लगाई गई तो चरणबद्ध जनआंदोलन शुरू किया जाएगा. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जिला प्रशासन, रेलवे और संबंधित कंपनियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने की स्थिति में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की जरूरत है.
किसानों की फसल और पर्यावरण पर पड़ रहा असर
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि लगातार उड़ रही कोयले और लौह अयस्क की धूल का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है. खेतों में लगी फसलों पर धूल की मोटी परत जमने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है. पेड़-पौधों की प्राकृतिक वृद्धि भी बाधित हो रही है. इसके अलावा जल स्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका भी लगातार बढ़ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि धूल के कारण पशुधन भी प्रभावित हो रहा है. चरागाहों और खुले क्षेत्रों में धूल जमने से मवेशियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. पर्यावरणीय असंतुलन के चलते क्षेत्र की जैव विविधता भी प्रभावित होने लगी है.
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि लगातार उड़ रही धूल के कारण लोगों में श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है. लोगों का कहना है कि हवा में धूल की मात्रा बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत, खांसी और एलर्जी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि प्रदूषण के स्तर की नियमित जांच कराई जाए और रेलवे रैक से होने वाले परिवहन के दौरान धूल नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय तत्काल लागू किए जाएं.
जन्मभूमि बचाने की अपील
बैठक को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सागू चरण हेंब्रम ने कहा कि ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मभूमि पूरे कोल्हान की पहचान और गौरव का प्रतीक है. इस पवित्र स्थल को प्रदूषण की चपेट में छोड़ देना सांस्कृतिक विरासत के साथ अन्याय होगा. उन्होंने कहा कि कोयला और लौह अयस्क की धूल से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, जल, जंगल और जमीन प्रभावित हो रहे हैं तथा लोगों का स्वास्थ्य लगातार खतरे में पड़ रहा है. उन्होंने जिला प्रशासन, रेलवे और संबंधित कंपनियों से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो ग्रामीण शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे.
कोल्हान रक्षा संघ ने भी उठाई आवाज
कोल्हान रक्षा संघ के सदस्य रविंद्र मंडल ने कहा कि पांडरासाली क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त रखना केवल प्रशासन की नहीं बल्कि सभी संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है. उन्होंने मांग की कि रेलवे स्टेशन और माल ढुलाई के दौरान ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे धूल का फैलाव रोका जा सके. उन्होंने कहा कि प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करते हुए ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली की गरिमा, क्षेत्र के पर्यावरण और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए.
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"पांडरासाली बचाओ, कोयला डस्ट हटाओ" के लगे नारे
बैठक के अंत में ग्रामीणों ने "पांडरासाली बचाओ, कोयला डस्ट हटाओ" के नारे लगाए और क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाने का संकल्प लिया. लोगों ने एकजुट होकर ओतगुरु कोल लाको बोदरा की जन्मस्थली की गरिमा बचाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए संघर्ष जारी रखने का फैसला किया. इस अवसर पर विजय बांदरा मुंडा, सच्चिदानंद इच्चागूटू मुंडा, बिरसा तियु मुंडा, जय सिंह पूर्ति मुंडा, बिजली मोती बारला, सरोज बनी बरला, सोमवारी बानरा, चरीवा बानरा, घनश्याम बानरा, बलराम बानरा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे. बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के लिए शीघ्र और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. मानव सभ्यता अक्सर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की बातें करती है, लेकिन जमीन पर धूल ही सबसे पहले सच उजागर कर देती है.
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लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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