कोल्हान : नक्सल प्रभावित गांवों में नहीं पहुंचा विकास

Updated at : 20 Apr 2018 2:00 AM (IST)
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कोल्हान : नक्सल प्रभावित गांवों में नहीं पहुंचा विकास

आज भी वनोत्पाद से जीवन बसर कर रहे ग्रामीण नक्सली मूवमेंट के कारण दहशत में रहते हैं ग्रामीण बारिश में अपने ही गांव में कैद हो जाते हैं लोग किरीबुरू : कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र स्थित बोरोय गांव से सटे सांगाजाटा, बाईहातु, पाटुंग आदि गांवों के आसपास बेहतर प्राकृतिक जलस्रोत, नदी-नाले हैं. यह भौगोलिक व […]

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आज भी वनोत्पाद से जीवन बसर कर रहे ग्रामीण

नक्सली मूवमेंट के कारण दहशत में रहते हैं ग्रामीण
बारिश में अपने ही गांव में कैद हो जाते हैं लोग
किरीबुरू : कोल्हान रिजर्व वन क्षेत्र स्थित बोरोय गांव से सटे सांगाजाटा, बाईहातु, पाटुंग आदि गांवों के आसपास बेहतर प्राकृतिक जलस्रोत, नदी-नाले हैं. यह भौगोलिक व प्राकृतिक रूप से नक्सलियों के मददगार साबित होते रहे हैं. इन गांवों में आज तक सरकारी विकास की किरणें नहीं पहुंची हैं. उक्त गांवों में जाने के लिये फॉरेस्ट सड़क है, जो जर्जर है. यहां पैदल चलना भी मुश्किल है. मरम्मत के अभाव में रास्ता संकीर्ण हो गया है. दोनों तरफ झाड़ियां उग गयी हैं. कई स्थानों पर खेत से होकर गुजरना पड़ता है. बरसात के मौसम में उक्त गांव टापू बन जाते हैं.
भगवान भरोसे चल रहे सरकारी स्कूल, बच्चे नहीं बोल पाते हिंदी
सांगाजाटा, पाटूंग आदि गांवों में सरकारी विद्यालय भगवान भरोसे चलते हैं. विद्यालयों में गोइलकेरा से शिक्षक पढाने आते हैं. बोरोई व पाटुंग गांव के बीच नदी पर पुलिया नहीं होने से गोइलकेरा व रोआम को जोड़ने वाली सड़क दशकों से अधूरी है. गांव के बच्चे हिंदी नहीं बोल पाते हैं. गांवों में बिजली की सुविधा आज तक नहीं पहुंची. कुछ गांवों में चापाकल हैं. ग्रामीणों की जीविका का मुख्य साधन वन उत्पाद व वर्षा आधारित थोड़ी-बहुत खेती है. बीमार होने पर जंगल की जड़ी-बूटी या अंधविश्वास सहारा है.
गांवों में पुरुष सदस्य नहीं, भय का माहौल : बोरोई गांव के पास स्थित पाटुंग गांव का सरकारी विद्यालय गुरुवार को बंद मिला. कुछ बच्चे विद्यालय के चापाकल पर पानी भर रहे थे. वह प्रभात खबर के संवाददाता को देख भाग गये. गांव के घरों में पुरुष नहीं दिखे. कई घरों के दरवाजे बंद मिले. महिलाएं व बच्चे नक्सली गतिविधियां या मुठभेड़ से जुड़ी बात पूछने पर अपना मुह बंद कर लेते हैं. गांवों में भय का माहौल है. सभी इतना कहते दिखे की आज सुबह घंटों गोलीबारी व बम फूटने की आवाज सुनायी दी.
पहले नक्सली हथियार लेकर घूमते थे
गांव में एक युवक ने बताया कि क्षेत्र में पहले हमेशा नक्सली हथियार लेकर घूमते व आते जाते थे. जब से पुलिस अभियान चला रही है, तब से वह दिखाई नहीं दिये. जहां गोलीबारी हो रही है, वहां काफी नक्सली हमेशा रहते हैं. उस क्षेत्र में किसी ग्रामीण को भी जाने की इजाजत नहीं रहती है.
270 ग्रामीणों को दो माह से नहीं मिला राशन, शिकायत
लाभुकों की शिकायत कलमबंद की गयी है. मामले जांच की जा रही है.
अरुण मुंडा, सीओ सह प्रभारी एमओ
जांच से साबित हो चुका है कि दुकानदार पूरी तरह से दोषी है. उसका लाइसेंस रद्द करवाया जायेगा.
– पूनम जेराई, मझगांव प्रखंड प्रमुख
लाभुकों के साथ अन्याय हो रहा है. इस मुद्दे को जिले के अधिकारियों के समक्ष रखुंगा.
– सोमनाथ चातार, जिप सदस्य मझगांव
दुकानदार को हटाकर दूसरे डीलर को वितरण का जिम्मा दिया जाये. डीलर पर पूर्ण वसूली के साथ कार्रवाई होनी चाहिये.
– बबीता हेम्ब्रम, मुखिया, घोड़ाबंधा पंचायत
पीडीएस सूची में नाम दर्ज है. दुकानदार राशन नहीं देता है. कहता है तेरा नाम कट गया है.
– मुखी नाग, ग्रामीण, हेसलबेरल
पीएच कार्ड है, जिसमें छह सदस्य है. राशन डीलर मात्र 15 किलोग्राम चावल देता है.
– लीला देवी, लाभुक हेसलबेरल
ऑनलाइन सूची में पूरे परिवार का नाम दर्ज है. राशन डीलर कहता है तेरा नाम सूची में नहीं है.
– सुकलाल नाग, ग्रामीण, हेसलबेरल
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