आदिवासियों को आदिवासी नेताओं ने लूटा : सालखन

Updated at : 28 Nov 2017 5:09 AM (IST)
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आदिवासियों को आदिवासी नेताओं ने लूटा : सालखन

चाईबासा गांधी मैदान में कोल्हान सेंगेल जनसभा आयोजित झारखंड को बचाये रखने के लिए किया बंद का आह्वान चाईबासा : आदिवासियों को आदिवासी नेताओं ने ही लूटा है, और अब भी उन्हें लूट रहे हैं. झारखंड के 28 आदिवासी विधायक लोभ तथा सत्ता लोलुपता के वशीभूत हो आदिवासी समाज को बरबाद करने पर तुले हैं. […]

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चाईबासा गांधी मैदान में कोल्हान सेंगेल जनसभा आयोजित

झारखंड को बचाये रखने के लिए किया बंद का आह्वान
चाईबासा : आदिवासियों को आदिवासी नेताओं ने ही लूटा है, और अब भी उन्हें लूट रहे हैं. झारखंड के 28 आदिवासी विधायक लोभ तथा सत्ता लोलुपता के वशीभूत हो आदिवासी समाज को बरबाद करने पर तुले हैं. वर्तमान में जारी संकट का इन्हीं के बूते समाधान भी संभव है. इन्हीं की कमजोरी से आदिवासियों का हक, अधिकार एवं हिस्सेदारी झारखंड में लूटा जा रहा है. झामुमो सहित बाकी दलों ने आदिवासी हकों को बचाने की जगह केवल बेचने का काम किया. आदिवासी सेंगेल अभियान (आसा) आदिवासियों के लिए अंतिम लड़ाई की तरह है. उक्त बातें आदिवासी सेंगल अभियान के सुप्रीमो, पूर्व सांसद सलखान मुर्मू ने कहीं.
वे चाईबासा गांधी मैदान में आयोजित कोल्हान सेंगेल जनसभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने यहां हजारों की तादाद में जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आदिवासी जनता हंड़िया, दारू, चखना, रुपये-पैसे में अपना कीमती वोट न बेचे, क्योंकि झारखंड बनने के 17 साल की राजनीति में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस, जेवीएम आदि दलों ने सत्ता पर काबिज होकर आदिवासी हित में एक भी नीति नहीं बनायी. कोल्हान और झारखंड के लिए कुछ नहीं किया. बल्कि अपने निजी स्वार्थ में डूबे रहे.
आदिवासियों के साथ दलितों-मुस्लिमों का भी रहा जुटान
आज की जनसभा में हजारों आदिवासियों के साथ ही दलित और मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध नेता व कार्यकर्ताओं का जुटान भी महत्वपूर्ण रहा. सालखन मुर्मू ने लगभग डेढ़ घंटे तक लोगों के समक्ष अपनी बातें रखीं. जनसभा में प्रदेश संयोजक सुमित्रा मुर्मू, सोनाराम सोरेन, बिमो मुर्मू, राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष शकील अहमद खान, भारत मुक्ति मोर्चा के कासिफ राजा सिद्दीकी, प्रताप कुमार यादव, नईम खान, कुशनू कोड़ा, बिनोद गोप, भगवान सिंकू, सूबेदार बिरुआ, खूंटी जिला संयोजक – रिमीस कंडुलना, प्रेमशिला मुर्मू, सुगनाथ हेंब्रम, मल्हो मार्डी, समेत दलित व अल्पसंख्यक संगठनों के कई नेता उपस्थित थे.
18 मार्च को झारखंड बंद करेगी आशा
मुर्मू ने सभी विपक्षी पार्टियों का आह्वान किया कि वे यदि सही में झारखंडी जनता का हित चाहते हैं तो सरकार के खिलाफ आंदोलन में सड़क पर उतरें और जल्द ही झारखंड बंद की घोषणा करें. आदिवासी सेंगेल अभियान उनमें सहयोग करेगा. अन्यथा आदिवासी सेंगेल अभियान 18 मार्च 2018 को संपूर्ण झारखंड बंद करेगा. आसा के आंदोलन से जुड़कर अपने हक को बचाने का उन्होंने लोगों से अह्वान किया. उन्होंने आसा के इस आंदोलन में बीएएमसीइएफ का साथ मिलने पर खुशी व्यक्त की. कहा कि 85 प्रतिशत लोगों के हकों की लड़ाई को झारखंड में निश्चित जीत सकती है. उसने भाजपा और झमुमो को आदिवासी-मूलवासी और दलित-मुस्लिम विरोधी करार देते हुए आम लोगों से सीएनटी-एसपीटी कानून में संशोधन के खिलाफ चले मुखर आंदोलन की तरह अन्य जारी बिलों के विरोध में भी जनता से सामने आकर सहयोग करने की अपील की.
2019 नहीं, अभी समाधान चाहती है जनता : आदिवासी समाज राज्य सरकार द्वारा उत्पन्न वर्तमान संकट से मरना नहीं, बचना चाहता है. मगर झामुमो समेत विपक्षी कुनबा 2019 के चुनावी महागठ बंधन को आंदोलन से ज्यादा तरजीह देने पर अमादा है. आसा 2019 नहीं अभी समाधान चाहता है. मुर्मू ने इचा-खरकई बांध परियोजना में कोल्हान वासियों के विस्थापन, झारखंडी डोमिसाइल नीति नहीं बनने, सीएनटी-एसपीटी कानून में संशोधन के प्रयास में अग्रणी भूमिका अदा करने के लिए शिबू सोरेन एवं झामुमो को कसूरवार ठहराते हुए उनकी कड़ी अलोचना की.
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