खुले में मरीजों का इलाज दीवार में टांगे गये स्लाइन

Updated at : 09 Oct 2017 1:46 PM (IST)
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खुले में मरीजों का इलाज दीवार में टांगे गये स्लाइन

एएनएम व सहिया पर है मरीजों के इलाज का दारोमदार, आज पहुंचे डॉक्टर जांच के बाद लौटे मझगांव : मझगांव प्रखंड की धोबा-धोबिन पंचायत के देवधर एवं मोंडुवम गांव विगत एक सप्ताह से डायरिया की चपेट में हैं. डायरिया से अब तक देवधर गांव की एक युवती की मौत हो चुकी है, जबकि दोनों गांवों […]

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एएनएम व सहिया पर है मरीजों के इलाज का दारोमदार, आज पहुंचे डॉक्टर जांच के बाद लौटे
मझगांव : मझगांव प्रखंड की धोबा-धोबिन पंचायत के देवधर एवं मोंडुवम गांव विगत एक सप्ताह से डायरिया की चपेट में हैं. डायरिया से अब तक देवधर गांव की एक युवती की मौत हो चुकी है, जबकि दोनों गांवों के चालीस से अधिक लोग अभी इस बीमारी से पीड़ित हैं, जिनमें महिला-पुरुषों के अलावा बच्चे भी शामिल हैं. लेकिन एक हफ्ता बीत जाने के बावजूद चिकित्सा विभाग के पदाधिकारियों की नींद नहीं खुली है. देवधर गांव में एक एएनएम बीमार लोगों की तीमारदारी में लगी है.
जंगल में बसे दोनों गांवों में चिकित्सा की सुविधा नहीं
प्रखंड मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर जंगल के बीच देवधर तथा मोंडुवम गांव स्थित हैं, जहां सरकारी दस्तावेजों में स्वास्थ्य उपकेंद्र चल रहा है, लेकिन गांव में न तो उपकेंद्र का भवन है और न ही चिकित्सा की कोई सुविधा. बस स्थानीय मुंडा के घर से ही स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित होता है.
एएनएम व सहिया कर रहीं बीमारों का इलाज
दोनों गांवों में डायरिया फैलने की खबर मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में स्वास्थ्य शिविर तो लगाया गया है, बहुत दिनों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ एक चिकित्सक पहुंचे थे जो उसी दिन वापस लौट गये. फिलहाल स्वास्थ्य उपकेंद्र की एएनएम विंद्यवासिनी कुमारी, सहिया जानकी पिंगुवा तथा मझगांव सीएचसी के चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की देखरेख में ही मरीजों का इलाज हो रहा है. गांव के जगराम पिंगुवा, सविता पिंगुवा, मोती पिंगुवा, गुरुवारी पिंगुवा, नीतिमा हेंब्रम, मानी हेंब्रम एवं रानी महाराणा का वहां इलाज चल रहा है, जबकि अन्य मरीज निजी स्तर पर अपना इलाज करा रहे हैं.
बुधवार को हुई नीतिमा की मौत
डायरिया ने एक हफ्ते से दोनों गांवों को चपेट में ले रखा है. गांव की नीतिमा पिंगुवा (25 वर्ष) बीमार पड़ी, जबकि मायके से आयी उसकी बहन भी डायरिया की चपेट में आ गयी. हालांकि समय से इलाज होने के कारण वह तो बच गयी, लेकिन नीतिमा की विगत बुधवार को मृत्यु हो गयी.
कुआं व चापाकल के पानी के नमूने संग्रहित
चाईबासा से पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव के कुओं एवं चापाकलों के पानी का सैंपल एकत्र किया. इसके अलावा गांव के विभिन्न जलस्रोतों तथा अन्य स्थानों पर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी किया गया.
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